प्रसाद और थरूर के अकाउंट बंद करने के मामले में संसदीय समिति ने ट्विटर से दो दिन में जवाब मांगा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जून 30, 2021   12:44
प्रसाद और थरूर के अकाउंट बंद करने के मामले में संसदीय समिति ने ट्विटर से दो दिन में जवाब मांगा

इस समिति ने ऐसे समय में यह कदम उठाया है जब नए आईटी नियमों समेत कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच रस्साकशी चल रही है। सूत्रों ने बताया कि थरूर ने समिति को निर्देश दिया था कि प्रसाद और उनके अकाउंट पर रोक लगाने को लेकर ट्विटर से जवाब मांगा जाए।

नयी दिल्ली। संसद की एक समिति ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के ट्विटर अकाउंट अस्थायी रूप से बंद किए जाने के मामले में इस माइक्रो-ब्लॉगिंग इकाई से दो दिनों के भीतर जवाब तलब किया है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सूचना प्रौद्योगिकी मामलों संबंधी स्थायी समिति ने ट्विटर को पत्र भेजकर दो दिनों के भीतर जवाब मांगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर इस समिति के प्रमुख हैं। इस समिति ने ऐसे समय में यह कदम उठाया है जब नए आईटी नियमों समेत कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच रस्साकशी चल रही है। सूत्रों ने बताया कि थरूर ने समिति को निर्देश दिया था कि प्रसाद और उनके अकाउंट पर रोक लगाने को लेकर ट्विटर से जवाब मांगा जाए। 

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दरअसल, प्रसाद ने कुछ दिनों पहले ट्वीट कर अपने अकाउंट को अस्थायी रूप से बंद किए जाने की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था, ‘‘दोस्तो! आज कुछ बहुत ही अनूठा हुआ। ट्विटर ने संयुक्त राज्य अमेरिका के डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट अधिनियम (डीएमसीए) के कथित उल्लंघन के आधार पर लगभग एक घंटे तक मेरे अकाउंट तक पहुंच को रोका और बाद में उन्होंने मुझे अकाउंट के उपयोग की अनुमति दी।’’ प्रसाद के इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी मामलों संबंधी स्थायी समिति के प्रमुख थरूर ने कहा था, ‘‘रवि जी, मेरे साथ भी यही हुआ। स्पष्ट रूप से डीएमसीए अति सक्रिय हो रहा है।’’ कांग्रेस सांसद के मुताबिक, ट्विटर ने उनके एक ट्वीट को डिलीट कर दिया क्योंकि इससे किसी जमाने में मशहूर रहे वोकल ग्रुप (संगीत समूह) ‘बोनी एम’ के गाने ‘रासपुतिन’ से संबंधित कॉपीराइट का मामला जुड़ा था। थरूर ने कहा कि एक पूरी प्रक्रिया के बाद उनका अकाउंट फिर से शुरू कर दिया गया। उन्होंने कहा था कि इस मामले को लेकर ट्विटर से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

संसदीय समिति की बैठक में कहा गया: नए आईटी कानूनों और अदालती आदेशों का पालन करें फेसबुक, गूगल

फेसबुक और गूगल के अधिकारियों ने सोशल मीडिया मंचों के दुरुपयोग के मुद्दे पर सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों से कहा गया कि वे नए आईटी नियमों, सरकार के दिशानिर्देशों और अदालती आदेशों का पालन करें। फेसबुक और गूगल के अधिकारियों को इस समिति ने समन किया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर इस समिति के अध्यक्ष हैं। फेसबुक के भारत में लोक नीति निदेशक शिवनाथ ठुकराल और जनरल काउन्सल नम्रता सिंह ने समिति के समक्ष अपनी बात रखी। गूगल की तरफ से भारत में उसके प्रमुख अमन जैन (सरकारी मामलों एवं लोक नीति) तथा निदेशक (विधि) गीतांजलि दुग्गल ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा। संसदीय समिति की बैठक का एजेंडा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और सोशल मीडिया/ऑनलाइन समाचार मीडिया मंचों के दुरुपयोग को रोकना था। सूत्रों के मुताबिक, फेसबुक और गूगल के प्रतिनिधियों से कहा गया है कि उनकी मौजूदा डेटा सुरक्षा एव निजता संबंधी नीति में खामियां हैं और उन्हें अपने उपयोक्ताओं के डेटा की निजता और सुरक्षा के लिए कड़े मानक तय करने होंगे। 

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सूत्रों ने बताया कि समिति के अध्यक्ष थरूर ने सोशल मीडिया मंचों पर महिला यूजर्स की निजता को लेकर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि उन्हें कई महिला सांसदों की तरफ शिकायतें मिली हैं। बाद में गूगल ने एक बयान में कहा कि उसने भारत में स्थानीय कानूनों के अनुपालन में उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित रखने के अपने प्रयासों के हिस्से के रूप में उत्पाद परिवर्तन, संसाधनों और कर्मियों में लगातार निवेश किया है। गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा, हम नीति निर्माताओं के साथ वार्ता के अवसर का सदैव स्वागत करते हैं। साथ ही हमारे मंच पर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी साझा करते हैं। इस बीच, फेसबुक की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। इससे पहले फेसबुक के प्रतिनिधियों ने संसदीय समिति को सूचित किया था कि कोविड संबंधी प्रोटोकॉल के चलते उनकी कंपनी की नीति उनके अधिकारियों को भौतिक मौजूदगी वाली बैठकों में जाने की अनुमति नहीं देती है। हालांकि, समिति के अध्यक्ष थरूर ने फेसबुक से कहा कि उसके अधिकारियों को बैठक में पहुंचना होगा क्योंकि संसदीय सचिवालय डिजिटल बैठक की अनुमति नहीं देता है।





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