TDS के खिलाफ दायर याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने को कहा

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ANI
अभिनय आकाश । Jan 24 2025 12:35PM

वकील अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में टीडीएस प्रणाली को मनमाना और तर्कहीन और समानता सहित विभिन्न मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) प्रणाली को स्पष्ट रूप से मनमाना, तर्कहीन और विभिन्न मौलिक अधिकारों का उल्लंघन घोषित करने की मांग की गई थी। वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया कि टीडीएस तंत्र संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका को अस्वीकार करते हुए  पीठ ने कहा कि याचिका बहुत बुरी तरह से तैयार की गई थी और इसे दिल्ली उच्च न्यायालय में ले जाया जाना चाहिए। सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि क्षमा करें, हम इसका मनोरंजन नहीं करेंगे। इसे बहुत ख़राब तरीके से तैयार किया गया है. हालाँकि, आप दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। आदलत ने कहा कि टीडीएस लगाने का चलन कई देशों में रहा है।

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वकील अश्वनी  के माध्यम से दायर याचिका में टीडीएस प्रणाली को मनमाना और तर्कहीन और समानता सहित विभिन्न मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की गई। इसने आयकर अधिनियम के तहत टीडीएस ढांचे को चुनौती दी, जो भुगतानकर्ता द्वारा भुगतान के समय कर की कटौती और इसे आयकर विभाग के पास जमा करने को अनिवार्य करता है। कटौती की गई राशि को भुगतानकर्ता की कर देनदारी के विरुद्ध समायोजित किया जाता है। याचिका में केंद्र, कानून और न्याय मंत्रालय, कानून आयोग और नीति आयोग को पक्षकार बनाया गया था।

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यहां यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) प्रणाली भारत में कर संग्रह का एक तंत्र है, जिसे यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि कर आय सृजन के स्रोत पर ही एकत्र किए जाएं। इस प्रणाली के तहत, भुगतानकर्ता (कटौतीकर्ता के रूप में संदर्भित) को प्राप्तकर्ता (कटौतीकर्ता के रूप में संदर्भित) को भुगतान करने से पहले कर का एक निश्चित प्रतिशत काटने की आवश्यकता होती है।  

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