Karnataka में E20 की टेस्टिंग पर केंद्र ने जताई चिंता, OMC नियमों के उल्लंघन का आरोप

केंद्र ने कर्नाटक सरकार और विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें पेट्रोल में तय 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल होने का दावा किया गया था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तेल कंपनियों द्वारा सप्लाई ईंधन तय मानकों के अनुरूप है। इसके साथ ही केंद्र ने राज्य द्वारा अपनाए गए सैंपलिंग और टेस्टिंग के तरीकों पर सवाल उठाए।
केंद्र ने शनिवार को कर्नाटक सरकार के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि राज्य के पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे ईंधन में इथेनॉल की मात्रा तय सीमा (20 प्रतिशत) से अधिक है। केंद्र ने इस प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई सैंपलिंग और टेस्टिंग के तरीकों पर चिंता जताई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में फिर से स्पष्ट किया है कि कर्नाटक सहित पूरे देश में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) द्वारा सप्लाई किया जाने वाला E20 पेट्रोल, ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मानक IS 17021 के अनुरूप है। मंत्रालय ने बताया कि इन तीनों तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं के तहत किए गए परीक्षणों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। कंपनियों ने अक्टूबर 2026 की प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई सैंपलिंग (नमूना लेने) की प्रक्रियाओं और परीक्षण के तरीकों पर भी चिंता जताई है।
केंद्र ने कर्नाटक द्वारा E20 की गलत टेस्टिंग पर सवाल उठाए हैं।
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मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोल की टेस्टिंग के तय नियमों के तहत एक-एक लीटर के छह सैंपल लिए जाने चाहिए। इनमें से दो सैंपल डीलर को रसीद (पावती) लेकर सौंपे जाने चाहिए, दो सैंपल तेल कंपनी या संबंधित विभाग के पास रखे जाने चाहिए, और बाकी दो सैंपल 'कंट्रोल ऑर्डर' की अनुसूची III (Schedule III) में बताई गई या सरकारी गजट में अधिसूचित किसी प्रयोगशाला में भेजे जाने चाहिए। संबंधित अधिकारियों को सैंपल के लेबल पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर करने चाहिए, और टेस्टिंग के नतीजे तय समय-सीमा के भीतर डीलर और तेल कंपनी दोनों को बता दिए जाने चाहिए। मंत्रालय ने आगे बताया कि सितंबर 2026 की प्रक्रिया के दौरान लिए गए सैंपल, 'स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर' के माध्यम से OMC (तेल विपणन कंपनियों) की तय प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। वहां MDG 2024 के तहत तय गुणवत्ता मानकों के आधार पर इनकी टेस्टिंग की गई थी। हालांकि, इसके बाद अक्टूबर में हुई प्रक्रिया के दौरान लिए गए सैंपल, OMC प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना लिए गए थे। कंपनियों का यह भी कहना है कि 'स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर' से अनुरोध करने के बावजूद, उन्हें अपने पास रखने के लिए सैंपल (रिटेंशन सैंपल), आउटलेट-वार पूरी जानकारी या प्रयोगशाला की रिपोर्ट नहीं मिली।
विवाद क्या है?
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लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि कुछ पेट्रोल कंपनियां तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिला हुआ ईंधन सप्लाई कर रही हैं। कर्नाटक के सात जिलों से लिए गए नमूनों की लैब जांच का हवाला देते हुए, गांधी ने दावा किया कि एक मान्यता प्राप्त लैब में जांचे गए 14 पेट्रोल नमूनों में से 11 में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक थी। एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेता ने IOCL और HPCL की जांच रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर इथेनॉल की मात्रा क्रमशः 31.2 प्रतिशत और 30.5 प्रतिशत पाई गई। उन्होंने लिखा कि आपकी कार इतने अधिक इथेनॉल को झेलने के लिए नहीं बनी है। इसका मतलब है कि माइलेज कम मिलेगी और आपको बार-बार मैकेनिक के पास जाना पड़ेगा। जिस कार को आपने इतने उत्साह से खरीदा था, वह बर्बाद हो रही है।
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