Exit Polls से पहले Phalodi Satta Bazaar और Polymarket Election Prediction ने West Bengal के बारे में कर दी बड़ी भविष्यवाणी

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जब तक सभी चरणों का मतदान पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल प्रकाशित नहीं किये जा सकते। आयोग के अनुसार नौ अप्रैल सुबह सात बजे से लेकर 29 अप्रैल शाम छह बजकर तीस मिनट तक इस पर पूरी तरह रोक लागू है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल अपने चरम पर है। पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाने और दूसरे चरण के मतदान का समय नजदीक आने के साथ ही यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि आखिर राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाने वाली है? क्या सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बरकरार रख पाएगी या फिर भारतीय जनता पार्टी इस बार सत्ता परिवर्तन का इतिहास लिखेगी? हालांकि इन तमाम सवालों के बीच एक अहम तथ्य यह है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक मतदान संपन्न हो जाने से पहले किसी तरह के एग्जिट पोल या सर्वेक्षण को सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं है।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जब तक सभी चरणों का मतदान पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल प्रकाशित नहीं किये जा सकते। आयोग के अनुसार नौ अप्रैल सुबह सात बजे से लेकर 29 अप्रैल शाम छह बजकर तीस मिनट तक इस पर पूरी तरह रोक लागू है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126ए के तहत यह प्रतिबंध कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसका उल्लंघन करने पर कड़ी सजा का प्रावधान भी है। मीडिया तो इस नियम का पूरी तरह पालन कर रहा है लेकिन सोशल मीडिया पर जमकर पोल कराये जा रहे हैं और सट्टा बाजार भी अपने अनुमान व्यक्त कर रहा है जिससे माहौल गर्माया हुआ है।
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हम आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर विभिन्न अनौपचारिक सर्वे और पोल तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन पोलों में एक दिलचस्प रुझान देखने को मिल रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में परिणाम जाते हुए दिखा रहे हैं। हालांकि इन सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल भी उठते हैं, लेकिन जनभावना को समझने के एक संकेतक के रूप में इन्हें नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं, बल्कि सट्टा बाजार भी इस चुनाव को लेकर काफी सक्रिय नजर आ रहा है। राजस्थान के चर्चित फलोदी सट्टा बाजार के ताजा आंकड़े बताते हैं कि मुकाबला बेहद कड़ा है। यहां के अनुमानों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस को 158 से 161 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 127 से 130 सीटों के बीच समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस और वाम दलों को इस दौड़ में काफी पीछे माना जा रहा है।
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस चुनाव को लेकर दिलचस्पी देखने को मिल रही है। दुनिया के सबसे बड़े भविष्यवाणी बाजार माने जाने वाले Polymarket के आंकड़े भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में बढ़त दिखा रहे हैं। यहां भाजपा को करीब 57 प्रतिशत और तृणमूल कांग्रेस को लगभग 43 प्रतिशत संभावना दी जा रही है। इससे पहले भी कुछ आकलनों में भाजपा को 52 प्रतिशत और तृणमूल को 47 प्रतिशत तक समर्थन मिलने की बात सामने आई थी।
जमीनी स्तर पर भी चुनावी तस्वीर काफी दिलचस्प बनी हुई है। तृणमूल कांग्रेस को सत्ताविरोधी माहौल का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के आरोप और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे विपक्ष द्वारा जोर-शोर से उठाए जा रहे हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों और युवाओं के बीच कुछ असंतोष देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस का ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत संगठन और महिला मतदाताओं के बीच प्रभाव उसे अब भी एक मजबूत दावेदार बनाए हुए है।
उधर, भारतीय जनता पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य में अपनी उपस्थिति को तेजी से बढ़ाया है और अब वह मुख्य विपक्षी ताकत के रूप में उभरी है। विकास, पहचान और सुरक्षा जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर पार्टी ने अपनी रणनीति तैयार की है। उत्तर बंगाल और सिलीगुड़ी क्षेत्र में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है, जहां उसे सीटों में बढ़त मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल का यह चुनाव बेहद रोचक और करीबी मुकाबले का संकेत दे रहा है। आधिकारिक एग्जिट पोल भले ही अभी सामने नहीं आए हों, लेकिन सोशल मीडिया, सट्टा बाजार और अंतरराष्ट्रीय आकलनों के संकेत एक ऐसे चुनाव की ओर इशारा कर रहे हैं जहां हर सीट का महत्व बेहद अधिक होगा। अब सबकी नजर 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता की कुर्सी पर आखिर कौन बैठेगा।
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