रूस-यूक्रेन जंग के बीच PM मोदी की यात्रा की है खास अहमियत, 3 देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात, दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी

रूस-यूक्रेन जंग के बीच PM मोदी की यात्रा की है खास अहमियत, 3 देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात, दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी
ANI

युद्ध शुरू होने के बाद से ही कई बड़े देशों के नेता भारत आ चुके हैं। जिनमें ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन भी शामिल हैं। अब खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप की यात्रा पर जाने वाले हैं। जहां वो जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क के राष्ट्राध्यक्षों के साथ मुलाकात करेंगे।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के दो महीने गुजर चुके हैं। लेकिन अभी तक ये किसी अंजाम पर नहीं पहुंचा है। यूक्रेन की सेना ने रूसी फौज पर हमला बोला है और लुहान्स्क में सैन्य ठिकानों पर रॉकेट दागे हैं। वहीं जंग के बीच रूस ने पोलैंड, बुल्गारिया की गैस सप्लाई रोक दी है। जंग के बीच संयुक्त राष्ट्र के महासचिव से पुतिन की मुलाकात हुई है। इस दौरान पुतिन ने मारियुपोल-बूचा में नरसंहार का खंडन किया है। रूस और यूक्रेन की जंग ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। तमाम देशों की तरफ से कूटनीति के नए-नए दांव-पेंच चले जा रहे हैं। ऐसे में भारत जैसे देश की भूमिका बेहद खास हो चली है। अमेरिकी खेमे की कोशिश रूस को अंतराराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग करने की है। लेकिन भारत जैसे रूस के अहम दोस्त की वजह से ये कोशिश परवान नहीं चढ़ पा रही है। 

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युद्ध शुरू होने  के बाद से ही कई बड़े देशों के नेता भारत आ चुके हैं। जिनमें ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन भी शामिल हैं। अब खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप की यात्रा पर जाने वाले हैं। जहां वो जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क के राष्ट्राध्यक्षों के साथ मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चार मई को अपनी वापसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री पेरिस में कुछ समय के लिए रुकेंगे और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलेंगे। बयान में कहा गया है कि भारत और फ्रांस इस साल अपने राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं और दोनों नेताओं के बीच बैठक रणनीतिक साझेदारी का अधिक महत्वाकांक्षी एजेंडा तय करेगी।

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इस साल की पीएम मोदी की ये पहली विदेश यात्रा होगी। यूं तो ये यात्रा बाइलेट्रल मसलों पर ही रहने वाली है लेकिन बीच युद्ध में इस यात्रा की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पीएम मोदी अगले महीने दो से चार मई के बीच जिन तीन देशों में पहुंचेंगे वो तीनों ही अमेरिकी लीडरशिप वाले गठबंधन नाटो के अहम सदस्य हैं। हालांकि डेनमार्क जरूर इस युद्ध में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। लेकिन जर्मनी और फ्रांस तो रूस के यूक्रेन हमले के धुर विरोधी देश हैं। दोनों ही देश यूरोपीय यूनियन की सबसे बड़ी इकोनॉमी वाले देश हैं और इस जंग में यूक्रेन को हथियार भी मुहैया करा रे हैं। रूस पर लगी आर्थिक पाबंदियों में भी इन दोनों देशों की अहम भूमिका है।

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भारत रूस के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों की वजह से उस पर लगे पाबंदियों का असर दोनों देशों के बीच के व्यापार पर नहीं पड़ने दे रहा है। यहीं नहीं इन पाबंदियों के ऐलान के बाद भारत ने रूस के साथ कच्चे तेल की डील कर ली है। इसके भुगतान के लिए रुपया रूबल का ऐसा समझौता अमल में लाया गया है जो रूस पर लगी पाबंदियों को बाइपास कर देगा। ऐसे हालात में पीएम मोदी की ये यूरोप यात्रा बेहद खास हो जाती है। 





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