UPSC Centenary पर PM Modi बोले, युवाओं के भविष्य के लिए समय पर पूरी हों भर्ती परीक्षाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में UPSC के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए भर्ती और परीक्षा प्रक्रियाओं में सुधारों पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में समय की निश्चितता का पालन होना चाहिए ताकि युवाओं को परेशानी न हो। पीएम ने चयन प्रक्रिया में राष्ट्र पहले और नागरिक पहले के सिद्धांत को अपनाने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) से कहा है कि वह अपनी परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में चल रहे सुधारों को लागू करे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परीक्षाओं का युवा उम्मीदवारों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है और चेतावनी दी कि देरी से बड़ी मुश्किलें आ सकती हैं। 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में UPSC के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए, PM मोदी ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को देश की बदलती ज़रूरतों के हिसाब से खुद को ढालना चाहिए और समय की निश्चितता के सिद्धांत का पालन करना चाहिए।
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मोदी ने कहा कि परीक्षा को सिर्फ़ एक आयोजन नहीं माना जाना चाहिए। यह हमारे युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। कुछ महीनों की देरी भी युवाओं के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। इसलिए, परीक्षा प्रणाली को समय की निश्चितता के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। UPSC की 100 साल की विरासत को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने लाखों युवा भारतीयों के बीच इस संस्था के प्रति अटूट भरोसे का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि आज का यह मौका UPSC के 100 साल पूरे होने और इसकी शानदार विरासत का जश्न मनाने का है। यह जश्न हर साल लाखों युवाओं की उम्मीदों और सपनों को दर्शाता है। यह जश्न उस भरोसे को भी दिखाता है जो हर भारतीय इस संस्था पर करता है।
PM मोदी ने कहा कि पिछली एक सदी में पीढ़ियों, सरकारों, टेक्नोलॉजी और सिलेबस में बदलाव के बावजूद UPSC पर लोगों का भरोसा मज़बूत बना हुआ है और यह एक बड़ी संपत्ति है। उन्होंने भारत के विकास के लिए आने वाले 20 से 25 सालों को बहुत अहम बताया और कहा कि UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों की भूमिका ऐसे युवाओं को चुनने में बहुत ज़रूरी है जो एक विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भर्ती प्रक्रिया दो मुख्य पैमानों पर आधारित होनी चाहिए: राष्ट्र पहले और नागरिक पहले। उन्होंने कहा कि ये वे दो पैमाने हैं जिनके आधार पर हर चयन को परखा जाना चाहिए। इसके अलावा, पीएम मोदी ने ऐसी परीक्षाओं की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो उम्मीदवारों को न सिर्फ़ एकेडमिक जानकारी के आधार पर परखें, बल्कि पब्लिक सर्विस में आने के उनके मकसद को भी देखें। उन्होंने कहा कि हमें पब्लिक सर्विस में ऐसे युवाओं को लाने की ज़रूरत है जो पब्लिक सर्विस की ओर आकर्षित हों, न कि सिर्फ़ सरकारी पद की ओर। इसलिए, यह ज़रूरी है कि भर्ती परीक्षा में न सिर्फ़ यह देखा जाए कि उम्मीदवार को कितनी जानकारी है, बल्कि यह भी देखा जाए कि युवा सिविल सर्विस में क्यों शामिल होना चाहते हैं।
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उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नागरिकों की उम्मीदें बदल रही हैं और इसके लिए सिविल सर्विस के कामकाज के तरीके में बदलाव की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि 2047 का भारत आज के भारत से बहुत अलग होगा। आज की तुलना में भारत ज़्यादा शहरी होगा और गांवों और शहरों के बीच का अंतर कम हो जाएगा। हमारे नागरिकों, खासकर युवाओं की उम्मीदें और आकांक्षाएं कहीं ज़्यादा होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पब्लिक सर्विस को आज की 'इंस्टेंट-डिलीवरी' वाली दुनिया की रफ़्तार के साथ तालमेल बिठाना होगा।
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