Droupadi Murmu ने Birth and Death Registration बिल को दी मंजूरी, 1 साल बाद DM अनुमति अनिवार्य

संसद के दोनों सदनों से पारित जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ देश में कानून के रूप में लागू हो गया है। इसके जरिए 1969 के मूल अधिनियम में बदलाव किए गए हैं ताकि विलंबित पंजीकरण के नियमों को सख्त बनाया जा सके। अब एक से दो वर्ष के भीतर जन्म या मृत्यु दर्ज कराने के लिए डीएम या एसडीएम स्तर के अधिकारी का सत्यापन अनिवार्य होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उस विधेयक को अपनी स्वीकृति दे दी है, जिसमें जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के नियमों को और सख्त बनाने के प्रावधान हैं। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून बन गया है। इस विधेयक में विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को अधिक कड़े बनाने के लिए 1969 के जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन किया गया है।
विधेयक में कहा गया है कि इससे जन्म और मृत्यु की घटनाओं की समय पर सूचना को बढ़ावा मिलेगा। जन्म और मृत्यु का एक साल के अंदर सामान्य प्रक्रिया से पंजीकरण होता है तथा इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो इसका पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी की अनुमति और सत्यापन के बाद ही होगा।
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