PMO का नया पता हुआ Seva Teerth, नागरिक देवो भव मंत्र के साथ प्रधान सेवक Modi ने दिया बड़ा राजनीतिक संदेश

PM Modi
ANI

उद्घाटन के दौरान मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया, जिस पर देवनागरी में इसका नाम अंकित है और नीचे ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य लिखा है। यह संदेश सीधे तौर पर शासन व्यवस्था को नागरिक केंद्रित बनाने की सोच को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का उद्घाटन करते हुए एक बार फिर अपनी उस राजनीतिक और प्रशासनिक सोच को रेखांकित किया, जिसमें सत्ता को सेवा का माध्यम बताने पर जोर रहा है। यह वही विचार है जिसे मोदी वर्षों से “प्रधान सेवक” की अपनी पहचान के साथ जोड़ते रहे हैं। नए परिसर में अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक साथ काम करेंगे। अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय रायसीना हिल्स के साउथ ब्लॉक में स्थित था।

उद्घाटन के दौरान मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया, जिस पर देवनागरी में इसका नाम अंकित है और नीचे ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य लिखा है। यह संदेश सीधे तौर पर शासन व्यवस्था को नागरिक केंद्रित बनाने की सोच को दर्शाता है। इस मौके पर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, पीएमओ में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का कहना है कि इससे समन्वय बेहतर होगा और निर्णय प्रक्रिया तेज बनेगी।

इसे भी पढ़ें: Viksit Bharat का संकल्प: PM Modi बोले- गुलामी के प्रतीक मिटाकर बना रहे स्वतंत्र भारत की पहचान

यदि पिछले एक दशक के कदमों को देखा जाए तो यह केवल भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रतीकों की राजनीति और प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का प्रयास भी है। 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने औपनिवेशिक विरासत से जुड़े नामों और प्रतीकों को बदलने की दिशा में कई फैसले लिए। राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ, केंद्रीय सचिवालय को कर्तव्य भवन और प्रधानमंत्री आवास वाले मार्ग का नाम रेस कोर्स रोड से लोक कल्याण मार्ग किया गया।

देखा जाये तो ‘सेवा तीर्थ’ उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है, जहां सत्ता के पारंपरिक शक्ति केंद्रों को सेवा और कर्तव्य की भाषा में पुनर्परिभाषित किया जा रहा है। स्पष्ट है कि मोदी सरकार शासन की भाषा और प्रतीकों को बदलकर एक ऐसा संदेश देना चाहती है, जिसमें सरकार खुद को शासक नहीं, सेवक के रूप में प्रस्तुत करे और ‘सेवा तीर्थ’ उसी विचार का ताजा उदाहरण बनकर उभरा है।

हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ में पहला फैसला महिलाओं और किसानों के संदर्भ में लिया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता की और फिर अपने एक संबोधन के जरिये सबका मार्ग प्रशस्त किया।

All the updates here:

अन्य न्यूज़