Priyanka Gandhi ने Mohan Bhagwat की टिप्पणी पर कहा, GenZ को किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। संघ प्रमुख ने मुंबई में एक संबोधन के दौरान कहा था कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन केवल आम सहमति बनाने का जरिया होना चाहिए। प्रियंका गांधी ने इस पर स्पष्ट किया कि युवा पीढ़ी को अपने विचारों के लिए संघ प्रमुख से किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत की एक टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को कहा कि ‘जेन-जी’ को उनसे किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में भागवत की टिप्पणी से जुड़े सवाल पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘जेन-जी को मोहन भागवत जी से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।’’ मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा था कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन संवाद का एक वैध तरीका है, लेकिन इसका मकसद विभाजन पैदा करने के बजाय आम सहमति बनाना होना चाहिए। भागवत ने मुंबई में ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स’ (आईआईएमयूएन) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में ‘जेन-जी’ और ‘जेन अल्फा’ के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘विरोध प्रदर्शन भी बातचीत का एक तरीका है।
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लोकतंत्र में, विरोध प्रदर्शन आम सहमति बनाने का एक जरिया है। अलग-अलग विचार एक साथ आते हैं और चर्चा के बाद आम सहमति बनती है।’’ वर्ष 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी को ‘जेन-जी’ और 2013 से 2024 के बीच पैदा हुई पीढ़ी को ‘जेन-अल्फा’ कहा जाता है।
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