Rahul Gandhi मानहानि केस में Sultanpur कोर्ट में बहस अधूरी, अब 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सुलतानपुर की विशेष अदालत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में बहस पूरी नहीं होने के कारण अगली तारीख तय की गई है। परिवादी भाजपा नेता के वकील की ओर से दलीलें जारी रहने के बाद विशेष न्यायाधीश ने मामले को सात अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया। यह मामला 2018 में अमित शाह के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है।
सुलतानपुर (उप्र), छह अक्टूबर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं रायबरेली से कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी के खिलाफ एक मानहानि मामले में सुलतानपुर की एक विशेष अदालत में जारी सुनवाई मंगलवार को पूरी नहीं हो सकी। इसकी वजह से अदालत ने सात अक्टूबर की तिथि निर्धारित की। वादी के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि राहुल गांधी के खिलाफ सुलतानपुर की एक विशेष अदालत में चल रहे मानहानि के मामले में उन्होंने परिवादी भाजपा नेता विजय मिश्र की ओर से बहस की लेकिन बहस पूरी न होने पर आगे की बहस के लिए अदालत ने सात अक्टूबर की तिथि नियत की है।
अधिवक्ता पांडेय ने गत 21 सितम्बर को बहस शुरू की थी, लेकिन बहस पूरी नहीं हो सकी थी, जिस पर विशेष न्यायाधीश शुभम वर्मा ने आगे की सुनवाई के लिए 29 सितम्बर की तिथि नियत की थी मगर 29 सितम्बर को एक वरिष्ठ अधिवक्ता के निधन होने पर सुनवाई नहीं हो सकी जिसके बाद सुनवाई के लिए एक अक्टूबर की तिथि निर्धारित की गयी थी। हालांकि वादी के अधिवक्ता के अस्वस्थ होने के कारण एक अक्टूबर की सुनवाई फिर टल गई थी। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए छह अक्टूबर की तारीख तय की थी।
राहुल गांधी पर वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ बेंगलुरु में चुनाव के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। राहुल गांधी के खिलाफ चार अगस्त 2018 को भाजपा नेता एवं जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्र ने अदालत में मानहानि का परिवाद दायर किया था। इसके बाद 27 नवंबर 2023 को अदालत ने राहुल गांधी को विचारण के लिए तलब किया था।
इस मामले में राहुल गांधी ने अदालत में पेश होकर जमानत करायी थी। इसके बाद परिवादी विजय मिश्र ने राहुल गांधी के आवाज के नमूने का मिलान कराने के लिए अर्जी दाखिल की थी, जिसे विचारण अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका भी सत्र अदालत ने खारिज कर दी थी।
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