'जीत के इतने करीब थे, फिर क्या गलत हुआ?' DUSU चुनाव में सूपड़ा साफ होने पर कन्हैया कुमार पर भड़के राहुल गांधी!

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ANI
रेनू तिवारी । Sep 29 2026 11:50AM

कांग्रेस नेता ने सोमवार को चुनाव नतीजों की समीक्षा के लिए NSUI के इंचार्ज कन्हैया कुमार और नेशनल प्रेसिडेंट विनोद जाखड़ को मीटिंग के लिए बुलाया। कांग्रेस संगठन के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल भी वहाँ मौजूद थे।

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के नतीजों ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कांग्रेस के लिए DUSU का चुनाव सिर्फ एक छात्र संघ का चुनाव नहीं, बल्कि देश के युवा मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ का लिटमस टेस्ट था। हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के आगे कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का सूपड़ा साफ हो गया और वह चार में से एक भी सीट नहीं जीत सकी। इस शर्मनाक हार के कुछ हफ़्तों बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सख्त रुख अपनाते हुए कड़े सवाल दागे हैं।

कांग्रेस नेता ने सोमवार को चुनाव नतीजों की समीक्षा के लिए NSUI के इंचार्ज कन्हैया कुमार और नेशनल प्रेसिडेंट विनोद जाखड़ को मीटिंग के लिए बुलाया। कांग्रेस संगठन के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल भी वहाँ मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, गांधी ने दोनों नेताओं से पूछा कि प्रेसिडेंट पद जीतने के इतने करीब होने के बावजूद NSUI का प्रदर्शन इतना खराब कैसे रहा।पता चला है कि मीटिंग के दौरान गांधी ने पूछा, "हम प्रेसिडेंट पद जीतने के बहुत करीब थे, फिर क्या हुआ?" सूत्रों ने बताया कि गांधी ने चुनाव मैनेजमेंट को लेकर कुमार और जाखड़ पर नाराज़गी जताई और रणनीति, कैंडिडेट चुनने की प्रक्रिया और कैंपेन के बारे में विस्तार से जानकारी माँगी।

पता चला है कि वेणुगोपाल ने भी नतीजों को लेकर कुमार से सवाल किए। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि टिकट बंटवारे की प्रक्रिया के दौरान कुमार ने ही कैंडिडेट्स की ज़िम्मेदारी ली थी और पूछा कि नतीजा उम्मीदों से इतना अलग क्यों रहा। सवाल तब और तीखे हो गए जब NSUI के पूर्व सदस्य दीपांशु शोकीन का मामला सामने आया, जिन्होंने वाइस-प्रेसिडेंट पद के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

शोकीन 2023 से स्टूडेंट पॉलिटिक्स में सक्रिय थे और उन्होंने 2023 और 2024 के चुनावों में NSUI के लिए कैंपेन किया था। उन्होंने संगठन से दोबारा टिकट माँगा लेकिन उन्हें नहीं चुना गया और आखिरकार वे 2025 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरे।

सूत्रों के मुताबिक, गांधी ने खास तौर पर कुमार और जाखड़ से पूछा कि शोकीन को शामिल क्यों नहीं किया गया। बताया जाता है कि दोनों नेताओं ने उनसे कहा कि शोकीन की शर्तें वाजिब नहीं थीं।

हालाँकि, सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से इस मामले को संभाला गया, उससे गांधी संतुष्ट नहीं थे। कांग्रेस नेता अमिताभ दुबे ने इस दावे को गलत बताया है कि शोकीन को टिकट नहीं दिया गया था। X पर एक पोस्ट में दुबे ने कहा कि शोकीन को प्रेसिडेंट पद का टिकट ऑफर किया गया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया और वाइस-प्रेसिडेंट पद के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।

DUSU के नतीजों ने कांग्रेस की चिंताएं और बढ़ा दीं। RSS से जुड़ी ABVP ने प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट-सेक्रेटरी के पद जीते, जबकि शोकीन ने वाइस-प्रेसिडेंट का पद जीता। NSUI को कोई सीट नहीं मिली। कांग्रेस के लिए इस हार को और भी मुश्किल बनाने वाली बात इसका समय है।

पार्टी युवा वोटरों से फिर से जुड़ने की साफ़ कोशिश कर रही है, और गांधी का "छात्रों की गूंज" कैंपेन अलग-अलग शहरों में छात्रों को आकर्षित कर रहा है। इसलिए, DUSU के नतीजों ने संगठन के भीतर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या युवाओं तक पहुंचने की यह बड़ी कोशिश ज़मीनी स्तर पर संगठन की मज़बूती में बदल रही है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में देश भर के मुद्दों और आंदोलनों को लेकर Gen-Z युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी पर भी चर्चा हुई। इस माहौल में, लीडरशिप को लगा कि DUSU जैसे बड़े छात्र चुनाव में मिली हार पर बारीकी से विचार करने की ज़रूरत है।

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