इंदौर में रेलवे ने की कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर से लैस 320 बेड की व्‍यवस्‍था

इंदौर में रेलवे ने की कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर से लैस 320 बेड की व्‍यवस्‍था

उल्लेखनीय है कि इंदौर शहर में कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पतालों में बिस्तर की कमी को देखते हुए पिछले साल ही पश्चिम रेलवे ने कुछ ट्रेनों के कोच को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दिया था। बावजूद इसके एक भी कोच का इस्तेमाल अब तक नहीं हो सका था

भोपाल। मध्‍य प्रदेश की आर्थ‍िक राजधानी कहे जानेवाले इंदौर में मंगलवार को हनुमान जयंती के दिन रेलवे ने कोरोना मरीजों के संकटमोचक के रूप में अपने आप को प्रस्‍तुत किया है। उसने टीही स्टेशन पर 20 कोविड केयर कोच में 320 बेड्स की व्यवस्था की है। यह कोच रोगियों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर सहित अन्य सुविधाओं से लैस हैं। इस संबंध में मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्विटर पर रेल मंत्री पीयूष गोयल के ट्वीट को शेयर किया है, जिसमें यह जानकारी दी गई। इसमें बताया गया है कि राज्य सरकार के आग्रह पर यह कोच उन्हें उपलब्ध कराए गए हैं।

 

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रेल मंत्री गोयल ने अपने ट्वीट में लिखा, ''इंदौर के टीही स्टेशन पर भारतीय रेल द्वारा 320 बेड की व्यवस्था 20 कोविड केयर कोचेज में की गयी है। यह कोचेज रोगियों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर सहित अन्य सुविधाओं से लैस हैं। राज्य सरकार के आग्रह पर यह कोचेज उपलब्ध कराये गये हैं।'' 

वहीं, मुख्‍यमंत्री शिवराज ने बताया कि कोरोना के विरुद्ध युद्ध जारी है और संक्रमित मरीजों के इलाज के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। नई व्यवस्थाएं भी बनाई जा रही हैं। हम सभी जिलों में ऑक्सीजन प्लांट लगा रहे हैं ताकि इसकी कमी को पूरी तरह से दूर किया जा सके। उन्‍होंने धार में तीन साल से बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट को दिन-रात कार्य कर चार दिन में प्रारंभ करने के लिए टीम के सभी सदस्यों के प्रति हृदय से धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि यह आपकी कर्मठता और संकल्प का ही परिणाम है, जो 90 दिनों का काम चार दिन में संभव हुआ। आप सच्चे कर्मयोगी और सेवक हैं।

 

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उल्लेखनीय है कि इंदौर शहर में कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पतालों में बिस्तर की कमी को देखते हुए पिछले साल ही पश्चिम रेलवे ने कुछ ट्रेनों के कोच को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दिया था। बावजूद इसके एक भी कोच का इस्तेमाल अब तक नहीं हो सका था, जबकि रोजाना के मरीज भर्ती होने के लिए भटक रहे हैं। रेलवे कई बार जिला प्रशासन और राज्य सरकार को इस बात से अवगत करा चुका था, लेकिन इन्हें उपयोग करने का आदेश अब तक उसके पास नहीं पहुंचा था, पर जब मीडिया लगातार इस बात को प्रमुखता से उठाता रहा, तब जाकर प्रशासन को इन सभी कोचों के सार्थक उपयोग की याद आई है।





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