राजस्थान में Vishvendra Singh को कांग्रेस का नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब

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राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति ने पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कारण बताओ नोटिस थमाया है। पार्टी ने उनसे सात दिन के भीतर जवाब तलब किया है कि उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त क्यों न की जाए। इस पर पूर्व मंत्री ने कहा कि वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

जयपुर, दो अक्टूबर कांग्रेस की राजस्थान इकाई ने राज्य के पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह को कथित अनुशासनहीनता और पार्टी-विरोधी गतिविधियों के लिए शुक्रवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह नोटिस सोशल मीडिया पर सिंह की उस पोस्ट के कुछ घंटे बाद जारी किया गया जिसमें उन्होंने पार्टी से अलग होने का संकेत दिया था। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति की ओर से जारी नोटिस में सिंह से सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है और पूछा गया है कि उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने समेत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

सिंह ने सोशल मीडिया पर ही नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है और वह भी अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। सिंह ने नोटिस जारी करने वाले अनुशासन समिति के अध्यक्ष को संबोधित करते हुए एक पोस्ट में कहा, ‘‘पहले आपके नोटिस का जवाब दूं या प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मेरे बारे में जो बयान दिया है, उस पर प्रतिक्रिया दूं?’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह मुझे अपने बड़े भाई के रूप में देख रहे हैं और दूसरी ओर आपकी कारगुजारी सामने है.. मैं और मेरे समस्त कार्यकर्ता किंकर्तव्यविमूढ़ हैं।’’ सिंह ने कहा, ‘‘आप अपनी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं और मैं अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र हूं। मैं हमेशा मर्यादा और अनुशासन में रहा हूं।

उम्र के इस पड़ाव पर शायद मुझे किसी की नसीहत की जरूरत नहीं है।’’ पार्टी ने यह नोटिस भरतपुर और डीग के कांग्रेस जिला अध्यक्षों की शिकायतों के आधार पर जारी किया। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सिंह पार्टी के कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण बैठकों से दूर रहे तथा हाल में हुए नगर निकाय चुनावों के दौरान उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया और चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हुए। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भरतपुर नगर निगम के अध्यक्ष के चुनाव के दौरान कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार ने कथित तौर पर सिंह के कहने पर अपना नाम वापस ले लिया, जिससे ‘‘निकाय चुनाव में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन’’ के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया।

नोटिस में सिंह पर भरतपुर और डीग-कुम्हेर के कांग्रेस जिला अध्यक्षों की क्षमता पर सवाल उठाने और सोशल मीडिया पर डोटासरा के खिलाफ बयान देने का भी आरोप लगाया गया है। इससे पहले दिन में सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस से अलग होने का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि वह अब पार्टी की ‘‘गलत नीतियों’’ के साथ नहीं चल सकते।

भरतपुर के पूर्व राजघराने के सदस्य सिंह ने कहा कि कुछ ‘‘छुटभैये और तथाकथित नेताओं’’ की टिप्पणियों से उनके समर्थक नाराज हैं और वह स्वयं भी आहत हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर सच बोलना और गलत तथा झूठी बातों का समर्थन नहीं करना पाप है, तो मैं हर बार यह पाप करूंगा। मैं न तो गलत करता हूं और न ही गलत सहन करता हूं।’’ सिंह ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन पार्टी को दिया है और कभी अपने सिद्धांतों या स्वाभिमान से समझौता नहीं किया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जयपुर में संवाददाताओं से कहा कि सिंह लंबे समय से पार्टी की सेवा करने वाले वरिष्ठ नेता हैं और उनकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। सोशल मीडिया के जरिए इस मामले पर चर्चा हो रही है।

जब कुछ लिखित रूप में आएगा, तब मैं इस पर टिप्पणी कर पाऊंगा।’’ सिंह डीग-कुम्हेर से विधायक रह चुके हैं। वह पिछली अशोक गहलोत सरकार में पर्यटन मंत्री थे और 2023 का विधानसभा चुनाव हार गए थे।

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