कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस का कहर, दवा खरीदने के दिए आदेश

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मई 17, 2021   18:21
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कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस का कहर, दवा खरीदने के दिए आदेश

ब्लैक फंगस के उपचार में काम आने वाली दवा की 2500 शीशी खरीदने के आदेश दिए है।चिकित्सा मंत्री ने कहा कि अन्य दवाओं की तरह केंद्र सरकार ने ब्लैक फंगस की दवा को भी अपने नियंत्रण में ले लिया है और वही राज्यों को आपूर्ति कर रही है।

जयपुर। राजस्थान सरकार ने ब्लैक फंगस के उपचार में काम आने वाली दवा की 2500 शीशी खरीदने के क्रयादेश जारी किए हैं और आठ बड़ी कंपनियों से बातचीत कर रही है। प्रदेश में इस बीमारी के अब तक 100 रोगी सामने आ चुके हैं। राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताा कि ब्लैक फंगस की रोकथाम के लिए सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने लाइपोजोमल एम्फोटेरेसिन बी के 2500 शीशी खरीदने के लिये सीरम कंपनी को क्रयादेश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार देश की आठ बड़ी फार्मा कंपनियों से संपर्क कर रही है और दवा की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर भी जारी किया जा रहा है।

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चिकित्सा मंत्री ने कहा कि अन्य दवाओं की तरह केंद्र सरकार ने ब्लैक फंगस की दवा को भी अपने नियंत्रण में ले लिया है और वही राज्यों को आपूर्ति कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को भारत सरकार से केवल 700 शीशी ही प्राप्त हुई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से बात कर राज्य को कम से कम 50 हजार शीशी देने का आग्रह किया गया है। शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि राज्य में मरीजों के अनुपात में दवाओं का वितरण करे ताकि इस गंभीर बीमारी से लोगों को बचाया जा सके।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोरोना के बाद मधूमेह के मरीज, ज्यादा समय तक आईसीयू में रहने, संक्रमण और स्टेरॉइड दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल और कमजोर इम्यून सिस्टम के चलते ब्लैक फंगस के शिकार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के इलाज के लिये ब्लड शुगर के स्तर की नियमित जांच करते रहें क्योंकि ज्यादा ब्लड शुगर होने पर इस रोग की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी अस्पतालों में कोविड के दौरान सीमित मात्रा में स्टेरॉइड देने के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। शर्मा ने कहा कि प्रदेश में करीब 100 मरीज ब्लैक फंगस से प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि सवाईमानसिंह अस्पताल में भी बीमारी के उपचार के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है, जहां पूरे प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों द्वारा सुझाए दवा के विकल्पों पर भी राज्य सरकार काम कर रही है और विशेषज्ञों के अंतिम निर्णय पर वैकल्पिक दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।





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