राजस्थान में SIR के बाद अंतिम वोटर लिस्ट से 30 लाख नाम हटे, निखिल डे ने उठाए सवाल

राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण सूची के बीच करीब 30 लाख मतदाताओं का अंतर मिला है। नागरिक अधिकार कार्यकर्ता निखिल डे ने दावा किया कि एसआईआर में हटाए गए 26.63 लाख नाम अब भी निकाय चुनाव सूची में दर्ज हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार स्थानीय चुनावों की तैयारियां पहले शुरू होने के कारण पुरानी सूची को आधार बनाया गया था।
जयपुर, आठ नवंबर राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए इस्तेमाल की जा रही मतदाता सूचियों में शामिल करीब 30 लाख मतदाताओं के नाम निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में नहीं हैं। एक नागरिक अधिकार कार्यकर्ता ने यह दावा किया है। यह अंतर निर्वाचन आयोग की अंतिम एसआईआर सूची और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) की शहरी निकाय एवं पंचायत चुनावों के लिए तैयार मतदाता सूचियों के बीच सामने आया है।
फरवरी 2026 में प्रकाशित राजस्थान की अंतिम एसआईआर मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 5.47 करोड़ से घटकर 5.15 करोड़ रह गई थी। इस दौरान 44.28 लाख नाम हटाए गए, जबकि 12.91 लाख नए नाम जोड़े गए। इसके विपरीत, राज्य निर्वाचन आयोग की समान 199 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में करीब 5.45 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
इस तरह दोनों सूचियों में करीब 30 लाख मतदाताओं का अंतर है। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राजेश वर्मा ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियां पहले शुरू हो गई थीं और इसके लिए एसआईआर से पहले की मतदाता सूची को आधार बनाया गया था। इस सूची को आखिरी बार एक जनवरी 2025 को अद्यतन किया गया था।
उन्होंने कहा कि आयोग परंपरागत रूप से स्थानीय चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग की वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के तहत अद्यतन सूचियों का इस्तेमाल करता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने भी कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने एसआईआर से पहले की मतदाता सूची का इस्तेमाल किया था। उन्होंने बताया कि राजस्थान में एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची को लेकर कोई आपत्ति नहीं मिली थी।
मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता निखिल डे ने राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियां लगातार अद्यतन होती रहती हैं और आयोग एसआईआर की अंतिम सूची अपना सकता था। डे के तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार, एसआईआर के दौरान हटाए गए 26.63 लाख मतदाताओं के नाम राज्य निर्वाचन आयोग की 2026 की शहरी निकाय और पंचायत चुनावों की मतदाता सूचियों में अब भी शामिल हैं।
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