संस्कृत विश्वविद्यालय के पाँचवें कुलगुरु के रूप में अपनी सेवाएं देंगे प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायत

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय गोयल,प्रो.भाग सिंह बोदला, डॉ. जगत नारायण सहित विश्वविद्यालय परिवार ने उनका पुष्पगुच्छों के द्वारा उनका स्वागत किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के आचार्यों ने मांगलिक कलश व वैदिक मन्त्रों के द्वारा उनको कुलपति कक्ष तक सम्मान सहित पहुँचाया।
हरियाणा सरकार के राज्यपाल एवं कुलाधिपति महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल प्रो. असीम कुमार घोष ने प्रख्यात शिक्षाविद एवं अनुसन्धाता प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत को संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल का नया कुलपति नियुक्त किया है। आज 10 जनवरी 2026 शनिवार को प्रो. अनायत ने विश्वविद्यालय के भीमराव अम्बेडकर महाविद्यालय के परिसर में चल रहे विश्वविद्यालय के कार्यालय में कार्यभार ग्रहण किया।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय गोयल,प्रो.भाग सिंह बोदला, डॉ. जगत नारायण सहित विश्वविद्यालय परिवार ने उनका पुष्पगुच्छों के द्वारा उनका स्वागत किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के आचार्यों ने मांगलिक कलश व वैदिक मन्त्रों के द्वारा उनको कुलपति कक्ष तक सम्मान सहित पहुँचाया और उन्होंने अपना कुलगुरु का कार्यभार ग्रहण किया । इसके उपरान्त कुलपति का मांगलिक अभिभाषण हुआ जिसमें उन्होंने वैदिक मन्त्र भद्रं कर्णेभि: श्रणुयाम से प्रारम्भ करके इसका अर्थ एवं भाव सभी के समक्ष रखा कि हमेशा हम सभी कल्याणकारी शब्दों को सुनें, हम हमेशा अच्छा देखें और हमेशा अच्छी सोच रखें तो उन्नति के शिखर पर हम अवश्य अग्रणी होंगे।
गौरतलब है कि प्रो. अनायत इससे पहले दीनबंधु छोटूराम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल हरियाणा में दो बार कुलपति पद पर रह चुके हैं और एक बार बीपीएस महिला विश्वविद्यालय खानपुर हरियाणा में भी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल में चौथी बार कुलपति बने हैं । प्रो. अनायत प्रिंटिंग और मीडिया प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का नाम हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के कारण उन्हें मानद कर्नल की रैंक से भी नवाजा जा चुका है। प्रो. अनायत भारतीय शिक्षण मण्डल के अन्तर्गत भारतीय ज्ञान सम्पदा के अखिल भारतीय प्रमुख हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में उनकी नियुक्ति को पारंपरिक संस्कृत शिक्षा और आधुनिक तकनीक के समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। प्रो. अनायत के नेतृत्व में विश्वविद्यालय न केवल प्राचीन ग्रंथों और भाषा का संरक्षण करेगा, बल्कि उन्हें आधुनिक डिजिटल युग के साथ भी जोड़ेगा। विदित रहे कि गत 2 अप्रैल को पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चन्द्र भारद्वाज का कार्यकाल पूरा होने के बाद महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह को विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया था।
इनके कार्यभार ग्रहण के अवसर पर मुरथल विश्वविद्यालय से प्रो.कंवरदीप शर्मा, प्राचार्य अम्बेडकर महाविद्यालय प्रो.मनोज कुमार भाम्बू,प्रो.अनिल खुराना, डा.अशोक शर्मा एवं भारतीय शिक्षण मण्डल जिला कैथल के संयोजक महेश एवं सुनील की भी उपस्थिति रही। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार के विविध विभागों के विभागाध्यक्ष डॉ.रामानन्द मिश्र, डॉ.अखिलेश कुमार मिश्र, डॉ.नरेश शर्मा एवं डॉ.नवीन शर्मा, डॉ.हरीश कुमार,वित्ताधिकारी कृष्ण कुमार,अधीक्षक सुभाष चन्द एवं अंकुर गुप्ता इत्यादि उपस्थित रहे।
अन्य न्यूज़












