• राकेश टिकैत ने अमेरिकी राष्ट्रपति से लगाई गुहार, बोले- डियर बाइडन, मोदी से किसान आंदोलन पर करें बात

अंकित सिंह Sep 24, 2021 17:54

किसान लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर हमलावर हैं। इन सबके बीच किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया है।

देश में कृषि कानूनों को लेकर किसान नेता लगातार 11 महीने से केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसान नेताओं के बीच अब तक 11 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन हल नहीं निकल सका है। किसान लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर हमलावर हैं। इन सबके बीच किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से भी अपील की है। दरअसल, भारतीय प्रधानमंत्री इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं जहां उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति जो जो बाइडन से होने वाली है।

नरेंद्र मोदी और जो बाइडन की मुलाकात से पहले टिकैत ने ट्विटर पर अमेरिकी राष्ट्रपति को टैग करते हुए एक ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में राकेश टिकैत ने लिखा कि डियर प्रेसिडेंट बाइडन, भारतीय किसान प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 11 महीने में 700 से अधिक किसानों की इस से मौत हो चुकी है। हमें बचाने के लिए इन काले कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए। कृपया प्रधानमंत्री मोदी से मिलते समय हमारे मुद्दों पर ध्यान दें। 

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आपको बता दें कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की मुलाकात होगी। दोनों नेताओं की यह बातचीत व्हाइट हाउस में होगी। जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह पहला अमेरिका दौरा है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक हुई थी। ऐसे में मोदी और जो बाइडन की मीटिंग काफी सुर्ख़ियों में है। दूसरी ओर भारत में किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर पिछले 11 महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा किसान नेता देश के अलग-अलग हिस्सों का लगातार दौरा कर रहे हैं और सरकार पर निशाना साथ रहे हैं। किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। आने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।