मोदी सरकार ने कहा- हमारा अगला एजेंडा पाक के कब्जे वाले कश्मीर को हासिल करना है

मोदी सरकार ने कहा- हमारा अगला एजेंडा पाक के कब्जे वाले कश्मीर को हासिल करना है

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह हमेशा माना जाता था कि अनुच्छेद 370 को कभी भी निरस्त नहीं किया जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, यह संभव हुआ और इसी तरह पीओजेके को पुनः प्राप्त करने का संकल्प भी पूरा होगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) को फिर से हासिल करना अगला एजेंडा है। पीओजेके के विस्थापितों को समर्पित 'मीरपुर बालिदान दिवस' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिस नेतृत्व के पास संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने की क्षमता और इच्छाशक्ति है, वह ही पाकिस्तान के अवैध कब्जे से पीओजेके को फिर से हासिल करने की क्षमता रखता है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह जोकि उधमपुर से सांसद हैं, उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन मानव जाति के इतिहास में सबसे बड़ी त्रासदी थी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को तत्कालीन रियासत के एक हिस्से को खोने के रूप में दूसरी त्रासदी का सामना करना पड़ा जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में चला गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) को पुनः प्राप्त करना हमारा अगला एजेंडा है।”

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उन्होंने कहा कि यह हमेशा माना जाता था कि अनुच्छेद 370 को कभी भी निरस्त नहीं किया जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, यह संभव हुआ और इसी तरह पीओजेके को पुनः प्राप्त करने का संकल्प भी पूरा होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पीओजेके को फिर से हासिल करना न केवल एक राजनीतिक और राष्ट्रीय एजेंडा है, बल्कि मानवाधिकारों के सम्मान की जिम्मेदारी भी है क्योंकि "पीओजेके में हमारे भाई अमानवीय परिस्थितियों में रह रहे हैं" और स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से उन्हें महरूम रखा गया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने आजादी के समय 560 से अधिक रियासतों के विलय की जिम्मेदारी संभाली थी और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया था लेकिन उन्हें जम्मू-कश्मीर के मामले से उन्हें अलग रखा गया था क्योंकि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जम्मू-कश्मीर को अपने स्तर पर संभालना चाहते थे।

महबूबा की माँग

हैदरपोरा मुठभेड़ मामले को गर्माते हुए पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिवारों के साथ-साथ घाटी की पूरी आबादी से माफी मांगनी चाहिए। महबूबा ने गुपकर रोड स्थित अपने ‘फेयरव्यू’ आवास से राजभवन तक अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ विरोध मार्च निकाला। महबूबा ने मांग की कि मुठभेड़ में मारे गए जम्मू के रामबन निवासी तीसरे व्यक्ति आमिर मार्गे का शव उसके परिवार को लौटाया जाए। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हैदरपोरा मुठभेड़ में निर्दोष लोग मारे गए। चूंकि उपराज्यपाल एकीकृत कमान के प्रमुख हैं, उन्हें मारे गए लोगों के परिजनों से माफी मांगनी चाहिए और उन पर आतंकवादी या हाइब्रिड आतंकवादी या आतंकवादियों के सहयोगी होने का धब्बा हटाना चाहिए। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘उन्हें आमिर का शव लौटाना चाहिए, मुआवजा देना चाहिए और एकीकृत कमान को कश्मीर के लोगों से माफी मांगनी चाहिए।’’

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पीडीपी अध्यक्ष ने तथ्यों को सामने लाने के लिए घटना की न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘न्यायिक जांच की जाए और इसमें (घटना) शामिल लोगों को कड़ी सजा दी जाए।’’ महबूबा ने कहा कि इस पर "संदेह" है कि क्या वास्तव में कोई आतंकवादी था जिसके बारे में पुलिस का दावा है कि वह मुठभेड़ में मारा गया। उन्होंने कहा, ‘‘हमने उस चौथे व्यक्ति का शव या चेहरा नहीं देखा है, जिसे आतंकवादी बताया जा रहा है। हमें संदेह है कि क्या वास्तव में कोई आतंकवादी था या उन्होंने तीन नागरिकों को बेवजह मार डाला।’’ उन्होंने कहा कि पूरी घटना पर बड़ा सवालिया निशान है। महबूबा ने कहा, ‘‘हमारे पास जानकारी है, एक आरोप है कि उन्हें एक मानव ढाल बनाया गया था क्योंकि उन्हें संदेह था कि एक आतंकवादी था। हालांकि इस पर एक बड़ा सवालिया निशान है कि कोई आतंकवादी था या नहीं।’’ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि देश को भाजपा-आरएसएस के एजेंडे पर चलाया जा रहा है।

श्रीनगर में 68वां अखिल भारतीय सहकारिता सप्ताह समाप्त

श्रीनगर के टैगोर हॉल में 68वें अखिल भारतीय सहकारिता सप्ताह का समापन हुआ। इस सहकारिता उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय उत्पादकों ने यहां अपने स्टाल लगाये थे। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर कश्मीर संभाग के आयुक्त पांडुरंग के. पोल ने सहकारिता आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने सहकारिता क्षेत्र में सफलता हासिल करने वालों की कहानियां भी साझा कीं। हम आपको बता दें कि सप्ताह भर के इस आयोजन में युवाओं को सहकारी योजनाओं, सरकार के सहयोग से अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने की योजनाओं आदि से अवगत कराया गया। इस दौरान सहकारी समितियों के उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। उल्लेखनीय है कि इस उत्सव का आयोजन हर वर्ष 14 से 20 नवंबर तक किया जाता है।





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