Omar Abdullah की सरकार को अपने ही सांसद Ruhullah Mehdi ने घेरा, जनादेश से विश्वासघात का आरोप लगाया

Ruhullah Mehdi
ANI

जम्मू-कश्मीर सरकार की आलोचना विपक्षी दल का कोई नेता नहीं, बल्कि सत्तारुढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस का अपना सांसद कर रहा है। हम आपको बता दें कि मेहदी लंबे समय से पार्टी नेतृत्व की दिशा पर सवाल उठाते रहे हैं और हाल के महीनों में उनका टकराव सार्वजनिक रूप ले चुका है।

जम्मू-कश्मीर की सत्तारुढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के ही श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने अपनी ही सरकार और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोल दिया है, जिसने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ा दी है। मेहदी ने आरोप लगाया है कि जनता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को जिन संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई लड़ने का जनादेश दिया था, सरकार ने उस लड़ाई को केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तक सीमित कर दिया है। उन्होंने इसे जनता के जनादेश के साथ “विश्वासघात” तक करार दिया।

रुहुल्ला मेहदी का निशाना सीधे नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व पर था। उनका कहना है कि पांच अगस्त 2019 को छीने गए संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए पार्टी ने अब तक कोई वास्तविक संघर्ष शुरू नहीं किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में जनता ने नेकां को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद पार्टी उस जिम्मेदारी से पीछे हटती दिखाई दे रही है। मेहदी ने यहां तक कहा कि जिस पार्टी को सबसे मजबूती और शांतिपूर्ण तरीके से अपने मुद्दों की लड़ाई लड़नी थी, वही अब संघर्ष से बचने के लिए बहाने तलाश रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में पारित प्रस्तावों को भी धीरे-धीरे कमजोर किया गया और व्यापक राजनीतिक मांग को केवल राज्य के दर्जे तक समेट दिया गया।

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देखा जाये तो यहां जम्मू-कश्मीर सरकार की आलोचना विपक्षी दल का कोई नेता नहीं, बल्कि सत्तारुढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस का अपना सांसद कर रहा है। हम आपको बता दें कि मेहदी लंबे समय से पार्टी नेतृत्व की दिशा पर सवाल उठाते रहे हैं और हाल के महीनों में उनका टकराव सार्वजनिक रूप ले चुका है। उन्होंने यहां तक कहा कि लद्दाख ने अपने राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष करके केंद्र को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया, जबकि जम्मू-कश्मीर में पिछले दो वर्षों में लड़ाई शुरू न करने के लिए ही रास्ते तलाशे गए।

मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को आंदोलन की तरह काम करने की नसीहत देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों और दूसरे राजनीतिक संगठनों से संवाद और व्यापक लामबंदी की जरूरत बताई। उनका कहना है कि केवल भाषणों से यह लड़ाई नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए स्पष्ट रणनीति, लगातार राजनीतिक अभियान और देशभर में समर्थन जुटाने की जरूरत है।

बहरहाल, रुहुल्ला मेहदी की बगावती आवाज उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए महज एक असहमति नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ते राजनीतिक मतभेद का खुला संकेत बन गई है। अब सवाल यह है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व इस चुनौती को कैसे संभालता है और क्या पार्टी अपने ही सांसद की आपत्तियों का राजनीतिक जवाब दे पाएगी।

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