रूस यूक्रेन विवाद: क्या मोदी के हस्तक्षेप से कम होगा तनाव, अमेरिका ने पीछे किए हाथ

रूस यूक्रेन विवाद: क्या मोदी के हस्तक्षेप से कम होगा तनाव, अमेरिका ने पीछे किए हाथ

साथ ही साथ दावा किया गया है कि रूस के हमले में सैकड़ों लोग घायल भी हुए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि भले ही रूस की तरफ से यह दावा किया जा रहा है कि उसने केवल सैनिक ठिकानों पर हमला किया है लेकिन आवासीय क्षेत्रों पर भी हमले किए गए हैं जिसमें आम लोगों को नुकसान पहुंचे हैं। यूक्रेन की ओर से कहा गया है कि वे लोगों को मार रहे हैं और शहरी इलाकों को भी निशाना बना रहे हैं।

यूक्रेन पर रूस का आक्रमण जारी है। रूस लगातार यूक्रेन के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। दूसरी ओर यूक्रेन की ओर से दावा किया गया है कि रूस के हमले में अभी तक 137 नागरिक और सैन्य कर्मी मारे गए हैं। यूक्रेन की ओर से इन सभी लोगों को ‘‘योद्धा’’ बताया गया है। साथ ही साथ दावा किया गया है कि रूस के हमले में सैकड़ों लोग घायल भी हुए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि भले ही रूस की तरफ से यह दावा किया जा रहा है कि उसने केवल सैनिक ठिकानों पर हमला किया है लेकिन आवासीय क्षेत्रों पर भी हमले किए गए हैं जिसमें आम लोगों को नुकसान पहुंचे हैं। यूक्रेन की ओर से कहा गया है कि वे लोगों को मार रहे हैं और शहरी इलाकों को भी निशाना बना रहे हैं।  यह गलत तरीका है और इसके लिए कभी माफी नहीं मिलेगी। आज सुबह सवेरे भी रूस का यूक्रेन पर हमला जारी रहा राजधानी कीव में धमाकों के कई आवाज सुनाई दे।

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लेकिन यह भी आश्चर्य की बात है कि अब तक यूक्रेन के साथ खड़े होने का दावा करने वाले देश भी फिलहाल रूस को चुनौती देते नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो यह तक कह दिया है कि अगर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी कि नाटो देशों में घुस आएंगे तो अमेरिका उसमें हस्तक्षेप करेगा। अमेरिका की ओर से रूस पर कड़े प्रतिबंध के तो घोषणा की जा रही है लेकिन अब तक सीधे तौर पर चुनौती देने से जो बाइडन बचते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह एक बड़े संघर्ष का रूप ले चुका है। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बीच, अमेरिका ने अपने नाटो सहयोगियों की रक्षा के लिए विशेष रूप से पूर्वी यूरोप में अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया है। बाइडन ने दावा किया कि यूक्रेन में पुतिन की महत्वाकांक्षाएं काफी बड़ी हैं। हालांकि पार्टी ने भारत के रुख पर भी सवाल उठाए हैं। दरअसल, अमेरिका का दावा है कि यूक्रेन-रूस विवाद में भारत का रुख अब तक स्पष्ट नहीं है। अमेरिका ने कहा कि भारत ने ना तो अब तक रूस के हमले की निंदा की है और ना ही यूक्रेन के साथ संप्रभुता दिखाई है। हालांकि अमेरिका की ओर से दावा किया गया है कि आज जो बाइडन भारत के प्रधानमंत्री से बातचीत कर सकते हैं।

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अब बात भारत की करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन पर रूस के हमले से पैदा हुई स्थिति के मद्देनजर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की और तत्काल हिंसा रोकने की अपील करते हुए सभी पक्षों से कूटनीतिक बातचीत और संवाद की राह पर लौटने के ठोस प्रयास करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान ‘‘अपने दीर्घकालिक दृढ़ विश्वास’’ को दोहराया कि रूस और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) समूह के बीच मतभेदों को सिर्फ ‘‘ईमानदार और गंभीर वार्ता’’ से ही सुलझाया जा सकता है। पीएमओ के अनुसार, इस दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन से संबंधित हालिया घटनाक्रम से अवगत कराया। इसने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने तत्काल हिंसा रोकने की अपील की तथा सभी पक्षों से कूटनीतिक बातचीत और संवाद की राह पर लौटने के ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।’’ टेलीफोन पर हुई बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों, खासकर छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी भारत की चिंताओं से भी अवगत कराया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षित वापसी भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

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वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन संकट पर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से टेलीफोन पर बातचीत की। जयशंकर ने बृहस्पतिवार रात एक ट्वीट में कहा कि ब्लिंकन के साथ यूक्रेन में चल रहे घटनाक्रम और उसके प्रभावों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, ‘‘ ब्लिंकन से फोन कॉल की सराहना करता हूं। यूक्रेन में चल रहे घटनाक्रम और इसके प्रभावों पर चर्चा की। लावरोव के साथ बातचीत के बारे में जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अपने रूसी समकक्ष को बताया कि बातचीत और कूटनीति आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है। विदेश मंत्री ने ट्वीट किया, यूक्रेन के घटनाक्रम पर अभी रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बात की। इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है।





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