विपक्षी MPs को बंदूक की नोक पर रोका गया, संजय राउत ने Election Commission पर साधा निशाना

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शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में निर्वाचन आयोग कार्यालय जा रहे विपक्षी सांसदों के साथ सुरक्षाबलों ने बुरा बर्ताव किया। उन्होंने कहा कि निहत्थे सांसदों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर पार्टी का चुनाव चिह्न छीनने का आरोप लगाया।

(फाइल फोटो के साथ) मुंबई, सात अक्टूबर दिल्ली में विपक्षी दलों के नेताओं के सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के एक दिन बाद बुधवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने दावा किया कि सांसदों को ‘‘बंदूक की नोक पर’’ निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक जाने से रोका गया जैसे ‘‘मानो वे आतंकवादी हों’’ और महिला सांसदों के साथ बुरा बर्ताव किया गया। राउत ने पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार पर शिवसेना का चुनाव चिह्न ‘‘चोरों’’ को सौंपने का आरोप भी लगाया और दावा किया कि उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के मामले में भी ऐसा ही किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में मंगलवार को दिल्ली में विपक्षी दलों के सांसदों ने ‘‘वोट चोरी’’ के आरोपों को लेकर मार्च का आयोजन किया और इस दौरान बेहद नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिले।

कई सांसदों को हिरासत में लिया गया और उन्हें निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोका गया। राउत ने कहा कि मंगलवार को विपक्षी दल के सांसदों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने से रोकने के लिए हजारों जवानों को तैनात किया गया था। उन्होंने कहा कि 275 निहत्थे विपक्षी सांसदों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तैनात किया गया था जैसे ‘‘मानो वे आतंकवादी हों।’’ राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया, ‘‘उन्हें बंदूक की नोक पर रोका गया और हिरासत में लिया गया।

महिला सांसदों के साथ दुर्व्यवहार किया गया।’’ राउत ने सवाल किया कि अगर मुख्य निर्वाचन आयुक्त विपक्षी सांसदों से नहीं मिलते हैं तो क्या वह सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से ही मिलते हैं? शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें (ज्ञानेश कुमार को) जाना ही होगा।’’ उन्होंने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि पूर्व सीईसी ने शिवसेना और उसके चुनाव चिह्न को ‘‘चोरों के हाथों’’ में सौंप दिया।

उनका इशारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ओर था। राउत ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने राकांपा के मामले में भी ऐसा ही किया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन शिवसेना जून 2022 में विभाजित हो गई थी।

निर्वाचन आयोग ने फरवरी 2023 में शिवसेना का नाम और ‘‘धनुष-बाण’’ चुनाव चिह्न एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को आवंटित कर दिया था। शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा में 2023 में फूट के बाद निर्वाचन आयोग ने 2024 में अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को वास्तविक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के रूप में मान्यता दी और उसे पार्टी का आधिकारिक नाम तथा ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया। राउत ने कहा, ‘‘किसी की अपनी पार्टी को दूसरों को सौंपने की परंपरा राजीव कुमार ने शुरू की थी।

हमें पता है कि राजीव कुमार कहां हैं और यह भी पता है कि ज्ञानेश कुमार कहां जाएंगे।’’ शिवसेना (उबाठा) नेता ने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) या मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए निर्वाचन आयोग पर ‘‘कब्जा’’ कर लिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में 25 साल पूरे होने के मौके पर विज्ञापनों पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के लिए एकनाथ शिंदे और भाजपा नेताओं की भी आलोचना की। राउत ने कहा कि जो पैसा विज्ञापनों पर खर्च किया गया उसका इस्तेमाल सूखे से प्रभावित महाराष्ट्र के गरीब किसानों के लिए किया जा सकता था।

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