SC का पुलिस को सख्त निर्देश: Student Protests में संयम बरतें, हिंसक प्रतिक्रिया से बिगड़ेंगे हालात

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ANI
अभिनय आकाश । Aug 5 2026 3:21PM

मौखिक टिप्पणियां उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की गईं, जिसमें दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों में स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान हुई हालिया हिंसा जिसमें पत्थरबाजी की घटनाएं भी शामिल हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले को दिल्ली और अन्य राज्यों में छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया और कहा कि सभी मुद्दों पर एक साथ सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि स्टूडेंट प्रोटेस्टर्स से निपटने के दौरान कानून लागू करने वाली एजेंसियों को संयम बरतना चाहिए, क्योंकि अधिकारियों की ओर से कोई भी हिंसक प्रतिक्रिया स्थिति को और खराब कर देगी। ये मौखिक टिप्पणियां उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की गईं, जिसमें दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों में स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान हुई हालिया हिंसा जिसमें पत्थरबाजी की घटनाएं भी शामिल हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले को दिल्ली और अन्य राज्यों में छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया और कहा कि सभी मुद्दों पर एक साथ सुनवाई होगी।

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अधिकारियों को सावधानी बरतने की ज़रूरत है

सुरक्षा कर्मियों से संयम बरतने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए CJI ने कहा कि लोकतंत्र में ऐसे शांतिपूर्ण मार्च के दौरान सुरक्षा बलों को भी संयम बरतना चाहिए। अधिकारियों को बहुत सावधानी से काम लेना चाहिए ताकि युवा हिंसा न करें। हिंसक प्रतिक्रिया से स्थिति और बिगड़ सकती है। सबसे बड़ी ताकत है बात सुनना। यह सुनना कि वे क्या कह रहे हैं और क्यों विरोध कर रहे हैं। कोर्ट ने एक खतरनाक मिसाल कायम होने के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए और हालात को सावधानी से संभाला जाना चाहिए ताकि और हिंसा न हो। बेंच ने कहा हिंसक प्रतिक्रिया से हालात और बिगड़ेंगे। सबसे बड़ी ताकत उनकी बात सुनना है—यह समझना कि वे क्या कह रहे हैं और क्यों विरोध कर रहे हैं। ये युवा हैं। उन्हें बहुत ज़्यादा सलाह-मशविरे की ज़रूरत है। कोर्ट ने कहा ताकतवर सरकार की तरफ से आक्रामकता दिखाने से भी हालात बेवजह बिगड़ सकते हैं और और हिंसा भड़क सकती है। इससे बचना चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जब न्यायिक कार्यवाही चल रही हो, तो कानून लागू करने वाली एजेंसियों को हालात संभालने देने चाहिए।

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CJP के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा

NEET-UG पेपर लीक विवाद, जिससे देशभर में लाखों छात्र प्रभावित हुए थे, के विरोध में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च का आयोजन किया था। इस मार्च के दौरान हिंसा हुई; जंतर-मंतर और उसके आस-पास कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस हंगामे में 65 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी और 200 से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर प्लास्टिक पेलेट्स (प्लास्टिक की गोलियों) के इस्तेमाल का मामला बाद में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया, क्योंकि ऐसी खबरें आईं कि कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आई थीं।

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