गुना में कुनो उद्गम स्थल कंजा पर सिंधिया ने कार्यकर्ताओं के साथ की ‘टिफिन बैठक’, आत्मीयता के साथ किया संवाद

Jyotiraditya Scindia
प्रतिरूप फोटो
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टिफिन बैठक के दौरान सिंधिया ने कहा कि कार्यकर्ताओं के साथ ऐसे सहज और आत्मीय क्षण संगठन के प्रति समर्पण, आपसी विश्वास और साथ मिलकर आगे बढ़ने की भावना को और मजबूत करते हैं। कार्यकर्ताओं का समर्पण, अनुशासन और जनसेवा का भाव ही भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति है।

गुना, 19 सितम्बर 2026।  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को कुनो उद्गम स्थल ग्राम कंजा पर आयोजित टिफिन बैठक में पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया और सभी कार्यकर्ताओं के साथ सहज एवं स्नेहपूर्ण वातावरण में बैठकर भोजन किया। इस दौरान वे कार्यकर्ताओं के साथ आत्मीयता से घुले-मिले और एक-दूसरे को भोजन कराते हुए भी नजर आए।

टिफिन बैठक के दौरान सिंधिया ने कहा कि कार्यकर्ताओं के साथ ऐसे सहज और आत्मीय क्षण संगठन के प्रति समर्पण, आपसी विश्वास और साथ मिलकर आगे बढ़ने की भावना को और मजबूत करते हैं। कार्यकर्ताओं का समर्पण, अनुशासन और जनसेवा का भाव ही भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, भाजपा मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सभी कार्यकर्ता विकास, सुशासन, सेवा और संगठन के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं।

कूनो नदी के उद्गम स्थल पर की पूजा-अर्चना


इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने  कूनो नदी के उद्गम स्थल पर पूजा-अर्चना की।उन्होंने कूनो नदी के पुनर्जीवन एवं उसके संरक्षण के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की। सिंधिया ने कूनो नदी के पुनर्जीवन एवं पुनर्भरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि नदी और उसके उद्गम स्थलों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान सिंधिया ने भगवान सिंह का सम्मान भी किया। भगवान सिंह  ने कूनो नदी के उद्गम स्थल के विकास और संरक्षण के लिए अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा दान में दिया है। सिंधिया ने उनके इस योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया और उनके समर्पण की सराहना की।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए समाज की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भगवान सिंह  द्वारा अपनी भूमि का हिस्सा दान करना इसी सामाजिक सहभागिता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का उदाहरण है।

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