शिवसेना ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा- BMC से भगवा ध्वज हटाने की बात करने वालों को मुंबई के लोग करेंगे परास्त

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 20, 2020   16:15
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शिवसेना ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा- BMC से भगवा ध्वज हटाने की बात करने वालों को मुंबई के लोग करेंगे परास्त

शिवसेना का दो दशक से अधिक समय से बीएमसी पर नियंत्रण है जिसका वार्षिक बजट 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

मुंबई। शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि मुंबई के लोग उन्हें परास्त करेंगे जो बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) से भगवा ध्वज को हटाने की बात कर रहे हैं। शिवसेना ने यह टिप्पणी अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में की। उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने विश्वास जताया था कि उनकी पार्टी 2022 का बीएमसी चुनाव जीतेगी और शिवसेना को बीएससी की सत्ता से बेदखल कर देगी। फडणवीस ने कहा था कि बीएमसी में फिर से भगवा झंडा फहराया जाएगा, लेकिन यह शिवसेना की पूर्व सहयोगी पार्टी भाजपा का होगा। 

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि भाजपा के हिंदुत्व में मिलावट नहीं है। शिवसेना का दो दशक से अधिक समय से बीएमसी पर नियंत्रण है जिसका वार्षिक बजट 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है। ‘सामना’ के संपादकीय में लिखा गया है कि अतीत में दो पेशवाओं बाला नातू और चिंटू पटवर्धन ने लालमहल पर से भगवा उतारकर ब्रिटिश यूनियन जैक फहराया था। भगवा को नीचे उतारते समय टोली के चेहरे पर एक प्रकार का आसुरी आनंद दिख रहा था। भगवा उतरते देखकर, समस्त पुणेकर, देश दुख से गर्दन झुका कर तड़प रहा था लेकिन कुछ लोग अति आनंद से मदहोश हो गए थे। इस मदहोश टोली के वारिसों को मुंबई महानगरपालिका पर से भगवा उतारने की कुबुद्धि सूझी होगी तो उस कुबुद्धि का मकबरा बनाकर मुंबई की जनता उसपर भी भगवा लहरा देगी।’’

शिवसेना ने कहा कि बीएमसी पर भगवा ध्वज महाराष्ट्र गौरव का प्रतीक है। संपादकीय में कहा गया है, ‘‘यदि (तुम) भगवा (ध्वज) को स्पर्श करोगे तो तबाह हो जाओगे। यह पूरे इतिहास में स्पष्ट है। जो लोग बीएमसी पर नई ईस्ट इंडिया कंपनी के यूनियन जैक को फहराने की बोल रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए।’’ शिवसेना ने दावा किया कि दिवंगत बाल ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी के साथ हाथ मिलाने के बाद ही भाजपा भगवा ध्वज के साथ जुड़ी थी। शिवसेना ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका पर भगवा उतारने की बात करना मतलब मुंबई पर से महाराष्ट्र का अधिकार नकारने जैसा ही है। 

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संपादकीय में दावा किया गया है कि भगवा उतारने का मतलब मुंबई को पुन: पूंजीपतियों का निवाला बनाकर भूमिपुत्रों, श्रमिक, मजदूरों को गुलाम बनाने जैसा ही है। इसमें लिखा है कि जो लोग मराठी गौरव के झंडे को उतारने की साजिश कर रहे हैं, वे देश के कट्टर हिंदुत्व का अपमान कर रहे हैं। शिवसेना ने आरोप लगाया, ‘‘वे राजनीतिक लाभ के लिए मुंबई में भगवा ध्वज उतारना चाहते हैं। ... जिन लोगों ने बीएमसी से भगवा ध्वज को हटाने का सपना देखा, वे राजनीति और सार्वजनिक जीवन से हमेशा के लिए गायब हो गए।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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उत्तर प्रदेश ने देश में अपने प्रति भावना को बदला, मुख्‍यमंत्री योगी बोले- हमने खानदानी अपराधियों पर भी लगाई लगाम

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 24, 2021   18:13
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उत्तर प्रदेश ने देश में अपने प्रति भावना को बदला, मुख्‍यमंत्री योगी बोले- हमने खानदानी अपराधियों पर भी लगाई लगाम

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने सिविल सेवा और एनडीए जैसी विभिन्‍न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए नि:शुल्‍क कोचिंग कक्षा चलाने की घोषणा की जिसका नाम मुख्‍यमंत्री अभ्‍युदय योजना रखा गया है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सिविल सेवा और एनडीए जैसी विभिन्‍न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए नि:शुल्‍क कोचिंग कक्षा चलाने की घोषणा करते हुये मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रविवार को कहा कि प्रदेश की पहचान अब दंगाग्रस्‍त, अपराधग्रस्‍त प्रदेश की नहीं, बल्कि बेहतर कानून व्‍यवस्‍था वाले राज्‍य के रूप में है। अवध शिल्‍पग्राम में उत्तर प्रदेश दिवस का उद्घाटन करने के बाद रविवार को आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए योगी ने कहा, हमने केवल पेशेवर अपराधी और माफ‍िया पर ही नहीं बल्कि खानदानी अपराधियों पर भी लगाम लगाया है जिससे (प्रदेश में) निवेश की संभावना बढ़ी है।’’ मुख्‍यमंत्री ने सिविल सेवा और एनडीए जैसी विभिन्‍न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए नि:शुल्‍क कोचिंग कक्षा चलाने की घोषणा की जिसका नाम मुख्‍यमंत्री अभ्‍युदय योजना रखा गया है। 

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योगी ने कहा, ‘‘बसंत पंचमी से इसकी कक्षाएं शुरू करने की तैयारी है। प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्‍यालयों पर आयोजित होने वाली भौतिक कक्षाओं में विशेषज्ञों द्वारा छात्रों का मार्गदर्शन किया जाएगा। अधिकारियों के अलावा, विभिन्न विषयों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी अतिथि व्याख्याता के तौर पर आमंत्रित किए जाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्‍यर्थियों को मुख्य परीक्षा की और बेहतर तैयारी के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) में कोचिंग की व्यवस्था कराई जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के पहले चरण में प्रदेश में सभी 18 मंडल मुख्यालयों पर निःशुल्क कक्षाएं चलेंगी और ऑनलाइन प्रशिक्षण तथा विभिन्न परीक्षाओं के पाठ्यक्रम व परीक्षा प्रणाली आदि के संबंध में अभ्यर्थियों को पूरी जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि मंडल स्तर पर प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन व समन्वयन की ज़िम्मेदारी उपाम को दी गई है। उन्होंने कहा कि ये कोचिंग केंद्र युवाओं को नया मंच देंगे और उन्‍हें उड़ान भरने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्‍होंने कहा कि कोरोना काल में राजस्‍थान के कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 30 हजार छात्रों को सुरक्षित वापस लाया गया। योगी ने कहा कि तब मैंने कहा था कि अब छात्रों को कोचिंग के लिए दूसरे राज्‍य में नहीं जाना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश स्‍थापना दिवस के चतुर्थ संस्‍करण पर शुभकामनाएं देते हुए योगी ने कहा कि भारत की संस्‍कृति और गौरवशाली परंपरा पर गर्व की अनुभूति होती है, उत्तर प्रदेश देश का हृदय स्‍थल कहलाता है और भारत की संस्‍कृति, सभ्‍यता और स्‍वाधीनता आंदोलन का केंद्र भी रहा है। 

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उन्होंने कहा कि अगर समाज के जिम्‍मेदार लोगों में अपनी परंपरा और संस्‍कृति को आगे बढ़ाने का भाव नहीं होता है तो समाज दिग्‍भ्रम की स्थिति में रहता है और इसी स्थिति ने प्रदेश को 70 वर्षों में भटकाव की दिशा में पहुंचा दिया। उत्‍तर प्रदेश दिवस के आयोजन की कहानी बताते हुए योगी ने कहा, 2017 में जब यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो तत्‍कालीन राज्‍यपाल ने हम लोगों के सामने एक प्रस्‍ताव रखा कि देश के अधिकांश राज्‍य अपना स्‍थापना दिवस मनाते हैं और कार्यक्रम के साथ अपनी योजनाओं को आगे लाकर नई पीढ़ी के लिए एक अवसर प्रस्‍तुत करते हैं। योगी ने कहा कि जब मैंने कैबिनेट के सामने उत्‍तर प्रदेश दिवस मनाने का प्रस्‍ताव रखा तो सहर्ष सहमति मिली और यह आयोजन शुरू हुआ, तभी एक जिला-एक उत्‍पाद (ओडीओपी) की अभिनव योजना की भी शुरुआत हुई जो देश की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है और आत्‍मनिर्भर भारत का जज्‍बा रखने वाली इस योजना के साथ प्रारंभ हुए उत्तर प्रदेश दिवस को प्रधानमंत्री ने भी सराहा।

समारोह में उप मुख्‍यमंत्री डॉक्‍टर दिनेश शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों में उत्‍तर प्रदेश के उद्योग धंधे चौपट हो गये थे लेकिन मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की अगुवाई में अब विकास की गंगा बह रही है। उन्होंने कहा कि महराष्‍ट्र में उप्र दिवस बहुत पहले से मनाया जा रहा है लेकिन उत्‍तर प्रदेश में इसकी शुरुआत तत्‍कालीन राज्‍यपाल राम नाईक की प्रेरणा से मुख्‍यमंत्री ने कराई। प्रदेश के लघु एवं मध्‍यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्‍साहन मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह‍ ने एक जिला-एक उत्‍पाद योजना की चर्चा करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था मजबूत हो रही है। उन्‍होंने दावा किया योगी के विकास मॉडल पर आने वाले समय में हार्वर्ड जैसे विश्‍वविद्यालय शोध करेंगे।

इस मौके पर मुख्‍यमंत्री ने महिला व पुरुष खिलाड़ियों, उद्यमियों, युवाओं, दुग्‍ध उत्‍पादकों तथा किसानों को विभिन्‍न पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया। समारोह में राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन समेत कई मंत्री और वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद थे। उल्‍लेखनीय है कि 24 जनवरी 1950 को उत्‍तर प्रदेश की स्‍थापना हुई थी। पूर्व राज्‍यपाल राम नाईक की पहल पर उत्‍तर प्रदेश दिवस की शुरुआत योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्‍व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की थी। इस बार उत्‍तर प्रदेश दिवस का चौथा संस्‍करण मनाया जा रहा है।





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राममंदिर का निर्माण कार्य तीन साल में होगा पूरा, करीब 1,100 करोड़ रुपए की आएगी लागत: न्यास के कोषाध्यक्ष

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 24, 2021   18:04
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राममंदिर का निर्माण कार्य तीन साल में होगा पूरा, करीब 1,100 करोड़ रुपए की आएगी लागत: न्यास के कोषाध्यक्ष

न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि न्यास ने अभी तक मंदिर निर्माण की लागत पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए (मंदिर निर्माण हेतु) कुछ कॉरपोरेट से धन एकत्र करना संभव था।

मुंबई। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के एक महत्वपूर्ण पदाधिकारी ने कहा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य करीब तीन साल में पूरा होगा और उसपर करीब 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आने की संभावना है। न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा, ‘‘मुख्य मंदिर का निर्माण तीन-साढ़े तीन साल में पूरा होगा और उसपर 300-400 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। पूरी 70 एकड़ भूमि के विकास कार्य में 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आने की संभावना है।’’ उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के साथ सलाह करने के बाद वह लागत के इस अनुमान पर पहुंचे हैं। 

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एबीपी मांझा मराठी टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि न्यास ने अभी तक मंदिर निर्माण की लागत पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए (मंदिर निर्माण हेतु) कुछ कॉरपोरेट से धन एकत्र करना संभव था। कुछ (कॉरपोरेट) परिवार हमारे पास आए थे, उन्होंने अनुरोध किया था कि मंदिर का डिजाइन उन्हें सौंप दिया जाए और उन्होंने आश्वासन दिया था कि वे मंदिर परियोजना को पूरा करेंगे, लेकिन मैंने विनम्रता से उन्हें मना कर दिया।’’ राम मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रह अभियान 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा का अभियान होने को लेकर कुछ हलकों द्वारा आलोचना किये जाने के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, ‘‘लोगों की आंखों पर जैसा चश्मा चढ़ा होता है, उन्हें वही दिखाई देता है।हमारी आंखों पर कोई चश्मा नहीं चढ़ा हुआ है और हमारी आंखें भक्ति की राह पर हैं।’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य 6.5 लाख गांवों और 15 करोड़ घरों तक पहुंचने का है।’’ यह पूछने पर कि क्या वह मंदिर निर्माण के लिए दान लेने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास मातो श्री जाएंगे, उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह दान देने को तैयार हैं, तो मैं वहां जाउंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘शिवसेना नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद की उप सभापति नीलम गोरे ने हमें एक किलोग्राम चांदी की ईंट दी है।’’ महाराज ने पिछले सप्ताह राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मंदिर निर्माण के लिए 5,00,100 रुपये का चंदा प्राप्त किया। यह पूछने पर कि मंदिर निर्माण के लिए क्या वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांयाी के पास भी जाएंगे, महाराज ने कहा कि मैं ऐसा करने को तैयार हूं, बशर्ते कोई मुझे गारंटी दे कि वहां मेरा अपमान नहीं किया जाएगा।





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ट्रैक्टर रैली में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन दर्शाएंगी झांकियां, 2500 स्वयंसेवकों को किया गया तैनात

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 24, 2021   17:50
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ट्रैक्टर रैली में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन दर्शाएंगी झांकियां, 2500 स्वयंसेवकों को किया गया तैनात

किसान नेता ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए 2,500 स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है कि परेड शांतिपूर्ण रहे और कोई अप्रिय घटना न हो। स्वयंसेवकों को बैज और पहचान पत्र दिए गए हैं।

नयी दिल्ली। आंदोलनकारी किसानों की ‘गणतंत्र दिवस ट्रैक्टर परेड’ में विभिन्न राज्यों की कई झांकियां होंगी जो ग्रामीण जीवन, केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के साथ ही आंदोलनकारियों केसाहस को दर्शाएंगी। यह जानकारी आयोजकों ने दी। एक किसान नेता ने पीटीआई-को बताया कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले सभी संगठनों को परेड के लिए झांकी तैयार करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘देशभर से लगभग एक लाख ट्रैक्टर-ट्रॉलियां परेड में शामिल होंगी। इनमें से लगभग 30 प्रतिशत पर विभिन्न विषयों पर झांकी होगी, जिसमें भारत में किसान आंदोलन का इतिहास, महिला किसानों की भूमिका और विभिन्न राज्यों में खेती के अपनाये जाने वाले तरीके शामिल होंगे।’’ 

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महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के कुछ बच्चों ने किसानों की आत्महत्या पर एक झांकी की योजना बनाई है। स्वराज इंडिया के एक सदस्य ने कहा, ‘‘आत्महत्या करने वाले किसानों के बच्चों के परेड में हिस्सा लेने की उम्मीद है। उनकी झांकी में उस क्षेत्र के किसानों के सामने आने वाली कठिनाइयों को दर्शाया जाएगा जिसे पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।’’ हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड जैसे राज्यों की झांकी से पता चलेगा कि पहाड़ी क्षेत्रों में फलों और सब्जियों की खेती कैसे की जाती है। पंजाब और हरियाणा के प्रतिभागी पारंपरिक और आधुनिक कृषि तकनीक और महिलाओं द्वारा गाय का दूध निकालने और किसानों द्वारा बैलगाड़ी चलाने का प्रदर्शन करेंगे। प्रत्येक ट्रैक्टर पर तिरंगा लगा होगा और लोक संगीत एवं देशभक्ति के गीत बजाये जाएंगे।

प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ‘संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के एक सदस्य ने कहा कि परेड की शुरुआत दिल्ली के पांच सीमा बिंदुओं - सिंघू, टिकरी, गाजीपुर, पलवल और शाहजहांपुर से होने की संभावना है - जहां किसान पिछले साल 28 नवंबर से डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर परेड राजपथ पर आधिकारिक गणतंत्र दिवस परेड की समाप्ति के बाद शुरू होगी और शाम 6 बजे के करीब समाप्त होने से पहले 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगी। एसकेएम सदस्य ने कहा कि परेड के दौरान प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विरोध स्थल पर एक कक्ष स्थापित किया गया है। इन प्रत्येक कक्षों में डॉक्टर, सुरक्षाकर्मी और सोशल मीडिया प्रबंधकों सहित 40 सदस्य होंगे। किसी भी चिकित्सा आपात स्थिति से निपटने के लिए मार्ग के किनारे लगभग 40 एम्बुलेंस तैनात रहेंगी। 

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एक अन्य किसान नेता ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए 2,500 स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है कि परेड शांतिपूर्ण रहे और कोई अप्रिय घटना न हो। स्वयंसेवकों को बैज और पहचान पत्र दिए गए हैं। विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों की एक टीम भी सुरक्षा स्थिति पर नजर रखेगी। किसानों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने देने के लिए दिल्ली पुलिस ने सिंघू और टिकरी बार्डर से बैरिकेड हटाने पर सहमति व्यक्त की है। किसान नेताओं ने कहा कि ट्रैक्टर परेड शांतिपूर्ण रहेगी और किसी भी तरह से आधिकारिक गणतंत्र दिवस परेड को प्रभावित नहीं करेगी। केंद्र द्वारा तीन कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के रूप में पेश किया गया है, जो बिचौलियों को दूर करेगा और किसानों को देश में कहीं भी अपनी उपज बेचने की अनुमति देगा। हालांकि, प्रदर्शनकारी किसानों ने यह आशंका व्यक्त की है कि नए कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी व्यवस्था को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे और उन्हें बड़े कॉर्पोरेट की दया पर छोड़ देंगे।





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