निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शिवकुमार ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  सितंबर 26, 2019   17:17
निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शिवकुमार ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया

कांग्रेस नेता की जमानत याचिका पर विचार करते हुए अदालत ने कहा था कि उसे लोगों की आजादी के साथ समाज के हित को भी ध्यान में रखना पड़ता है।अदालत ने कहा था कि उसने शिवकुमार की मेडिकल रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ा है और पाया है कि भले ही उनकी एंजियोग्राफी हुई हो, लेकिन उनकी हालत स्थिर है और उन्हें दवा लेने की सलाह दी गई है।

नयी दिल्ली। धनशोधन के मामले में गिरफ्तार कर्नाटक के कांग्रेस नेता डी के शिवकुमार ने जमानत के लिए गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।शिवकुमार की जमानत याचिका को बुधवार को निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। उस फैसले को चुनौती देने के लिये अब उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।निचली अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया था कि शिवकुमार एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या संबंधित दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसको देखते हुए अदालत ने कहा था कि जांच के इस महत्वपूर्ण चरण में अगर शिवकुमार को रिहा किया जाता है तो जांच में बाधा आ सकती है। शिवकुमार को राहत देने से इनकार करते हुए न्यायाधीश ने कहा था कि जांच के इस चरण में शिवकुमार जमानत पाने के हकदार नहीं हैं।

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कांग्रेस नेता की जमानत याचिका पर विचार करते हुए अदालत ने कहा था कि उसे लोगों की आजादी के साथ समाज के हित को भी ध्यान में रखना पड़ता है।अदालत ने कहा था कि उसने शिवकुमार की मेडिकल रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ा है और पाया है कि भले ही उनकी एंजियोग्राफी हुई हो, लेकिन उनकी हालत स्थिर है और उन्हें दवा लेने की सलाह दी गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल सितंबर में शिवकुमार के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज दिया था। इसके अलावा नई दिल्ली में कर्नाटक भवन में काम करने वाले हनुमनथैया और अन्य के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था।

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यह मामला आयकर विभाग की ओर से बेंगलुरू की एक विशेष अदालत में इन लोगों के खिलाफ पिछले साल दायर किए गए आरोप पत्र पर आधारित है। इन लोगों पर कथित कर चोरी और ‘हवाला’ के जरिये करोड़ों रुपये के लेन-देन का आरोप है। आयकर विभाग ने आरोपी शिवकुमार और उनके कथित सहयोगी एस के शर्मा पर आरोप लगाया है कि ये नियमित तौर पर तीन अन्य आरोपियों की मदद से ‘हवाला’ के जरिए बिना हिसाब वाली नकदी की बड़ी राशि भेजते थे।





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