गृह मंत्रालय ने States और UTs को भेजा पत्र, BNS की धारा 111 से टूटेगा तस्करों का सिंडिकेट

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अंकित सिंह । Sep 24 2026 1:09PM

गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मानव तस्करी से निपटने के लिए तीन नए आपराधिक कानूनों को पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने पुलिस महानिदेशकों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 का उपयोग कर तस्करी सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं, फाइनेंसरों और उनकी संपत्तियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है।

गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निर्देश दिया है कि वे मानव तस्करी से निपटने को प्राथमिकता दें। इसके लिए उन्हें तीन नए आपराधिक कानूनों वाले 'नवीन न्याय संहिता' को पूरी तरह लागू करना होगा और कानून लागू करने की कोशिशों में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होगा। मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार की इस अहम प्राथमिकता से निपटने में राज्य के नेतृत्व और ज़िम्मेदारी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

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MHA के महिला सुरक्षा विभाग ने 28 अगस्त को राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को एक विस्तृत पत्र भेजा। इसमें अधिकारियों से कहा गया कि वे 'भारतीय न्याय संहिता, 2023', 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' और 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023' के प्रावधानों को पूरी प्रशासनिक तत्परता के साथ अधिकतम क्षमता तक लागू करें। पत्र में कहा गया है कि इन कानूनों को लागू करने का चरण पूरा हो चुका है, और अब नई आपराधिक न्याय प्रणाली के तहत इन्हें लागू करना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मुख्य ज़िम्मेदारी है।

नोट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भले ही केंद्र सरकार ने एक व्यापक कानूनी और डिजिटल ढांचा तैयार किया है, लेकिन इन सुधारों की सफलता राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मज़बूत नेतृत्व और उपलब्ध साधनों के सही इस्तेमाल पर निर्भर करती है। डिजिटल साधनों से समर्थित यह आधुनिक कानूनी ढांचा, आपराधिक न्याय प्रणाली में हुए बदलावों के बाद शोषण के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ज़रूरी सटीकता प्रदान करता है।

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MHA ने मानव तस्करी करने वालों पर मुक़दमा चलाने और उनके गिरोहों को खत्म करने के कानूनी प्रावधानों पर ज़ोर दिया। इसमें 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' की धारा 111 का ज़िक्र किया गया, जो आपराधिक नेटवर्क को निशाना बनाती है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि मानव तस्करी शायद ही कभी कोई अलग-थलग अपराध हो; इसे आम तौर पर संगठित गिरोह चलाते हैं। जांच अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नेटवर्क को खत्म करने के लिए इस धारा का इस्तेमाल करें। उन्हें सिर्फ़ छोटे-मोटे अपराधियों तक सीमित न रहकर, गिरोह की संपत्ति ज़ब्त करने और मुख्य आयोजकों व फाइनेंसरों को बेअसर करने की दिशा में भी कार्रवाई करनी चाहिए, जो अक्सर वैध कारोबार की आड़ में छिपकर काम करते हैं।
 

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