Supreme Court: चुनावी हलफनामे में झूठी जानकारी देने पर आम नागरिक दर्ज करा सकते हैं आपराधिक केस

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि चुनाव में गलत हलफनामा देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कोई भी नागरिक निजी आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 195 का प्रतिबंध ऐसे मामलों में आड़े नहीं आएगा।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि निजी नागरिक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने पर निर्वाचित उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 195 के तहत लगाया गया प्रतिबंध ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने में बाधा नहीं बनेगा। सीआरपीसी की धारा 195 के तहत आपराधिक अदालतें कुछ विशिष्ट अपराधों का सीधे संज्ञान नहीं ले सकतीं, जब तक कि अधिकृत लोकसेवक या संबंधित अदालत की ओर से औपचारिक रूप से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए के तहत किए गए अपराध का आरोप लगाने वाली निजी शिकायत को सीआरपीसी की धारा 195 की कठोर शर्तों पर खरा उतरना आवश्यक नहीं है, जैसा कि उच्च न्यायालय ने माना था।’’ पीठ ने कहा, ‘‘यदि किसी निर्वाचित उम्मीदवार को परेशान करने के लिए शिकायत दर्ज कराई जाती है या उसमें निराधार आरोप लगाए जाते हैं, तो देश के कानून सक्षम मजिस्ट्रेट को प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के अनुरूप उचित आदेश पारित करने के लिए आवश्यक अधिकार और शक्तियां प्रदान करते हैं।’’ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए उन उम्मीदवारों को दंडित करने का प्रावधान करती है, जो अपने नामांकन पत्रों या चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देते हैं, विवरण छिपाते हैं या अनिवार्य जानकारियां उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं। न्यायालय ने यह फैसला राजकुमार मडकी की अपील का निपटारा करते हुए सुनाया। मडकी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के सात मार्च, 2025 के फैसले को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने उनके द्वारा शैलेंद्र बेलडाले के खिलाफ दर्ज कराई गई आपराधिक शिकायत खारिज कर दी थी। बेलडाले बीदर निर्वाचन क्षेत्र से कर्नाटक विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं। मडकी ने आरोप लगाया था कि बेलडाले ने 2023 के विधानसभा चुनाव में नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में अपने आवासीय पते के संबंध में गलत घोषणा की थी।
मडकी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए के तहत दंडनीय अपराध का आरोप लगाते हुए बेंगलुरु के अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 200 के तहत निजी शिकायत दर्ज कराई थी। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शिकायत खारिज करते हुए कहा था कि कथित अपराध के लिए कार्यवाही केवल निर्वाचन आयोग की शिकायत पर शुरू की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा था कि मतदाता ऐसी निजी आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के बजाय चुनाव याचिका दायर कर सकता है।
फैसले में कहा गया कि ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने का अधिकार केवल लोकसेवकों तक सीमित करने वाला कोई अन्य वैधानिक प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए की भाषा भी इस निष्कर्ष का समर्थन करती है कि निजी शिकायत कानूनी रूप से स्वीकार्य है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने निजी शिकायतों की वैधता के पक्ष में कानूनी सवाल का निपटारा करने के बावजूद बेलडाले के खिलाफ कार्यवाही दोबारा शुरू करने से इनकार कर दिया।
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