छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द करने के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट, पुलिस ज्यादती पर भी दिया बड़ा आदेश

Supreme
ANI
अभिनय आकाश । Aug 18 2026 3:46PM

सुप्रीम कोर्ट ने यह बात तब कही जब वह 20 जुलाई के प्रदर्शनों के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने इस घटना की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। इनमें से एक याचिका में खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है। इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने की।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह एक हाई-पावर कमेटी बनाना चाहता है। इस कमेटी में पूर्व जज और DGP (डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस) रैंक के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी दिल्ली में NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ज्यादतियों और हिंसा के आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्णायक जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात तब कही जब वह 20 जुलाई के प्रदर्शनों के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने इस घटना की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। इनमें से एक याचिका में खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है। इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने की।

इसे भी पढ़ें: Supreme Court का बड़ा कदम: आरोपी की फोटो वायरल करने पर केंद्र, X और Meta को भेजा कड़ा नोटिस

हिंसा की जांच के लिए हाई-लेवल कमिटी

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कहा कि कमिटी मामले के सभी पहलुओं की जांच करेगी, जिसमें पुलिस की बर्बरता के आरोप, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बर्ताव और प्रदर्शनों के दौरान बल का इस्तेमाल शामिल है। बेंच ने यह भी साफ़ किया कि जांच सिर्फ़ किसी एक पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों तक ही सीमित नहीं रहेगी। ये बातें तब सामने आईं जब एक याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व सैनिक की पत्नी सुदेश को प्रदर्शनों के दौरान परेशान किया गया। एक और वकील ने दावा किया कि पीड़ितों के सोशल मीडिया अकाउंट सस्पेंड किए जा रहे थे, जबकि उन्हें ऑनलाइन परेशान करने वाले लोग बिना किसी रोक-टोक के अपने अकाउंट चला रहे थे। चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि कोर्ट हर पीड़ित के साथ है और ज़ोर देकर कहा कि सभ्य समाज में ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि कमिटी उसके सामने रखे गए हर आरोप की जांच करेगी। 

इसे भी पढ़ें: Ram Mandir Trust: सूत्रों का दावा, Champat Rai को UP SIT की पहली रिपोर्ट में Clean Chit

बेकसूर छात्रों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं: SC

कोर्ट ने आगे कहा कि जांच का फ़ोकस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि उन आदतन अपराधियों पर होना चाहिए जिन्होंने शायद इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया हो। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों की पहचान की है। साथ ही, चीफ़ जस्टिस ने कहा कि प्रदर्शनों में शामिल कई लोग बेकसूर छात्र थे जिन्होंने अपना भविष्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत की थी। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में मदद करने के लिए बरसों की कड़ी मेहनत और त्याग किया था। सुनवाई के दौरान, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल और याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट वृंदा ग्रोवर, दोनों ने अपनी दलीलें साफ़ तौर पर रखी हैं और अब कोर्ट को आगे की कार्रवाई तय करनी चाहिए। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़