क्या कृषि कानून रद्द कराने में सफल हो पाएंगे किसान ? सरकार के साथ 10वें दौर की वार्ता

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 20, 2021   15:52
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क्या कृषि कानून रद्द कराने में सफल हो पाएंगे किसान ? सरकार के साथ 10वें दौर की वार्ता

तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले लगभग 50 दिन से जारी गतिरोध को दूर करने के प्रयासों के तहत बुधवार को सरकार और कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच 10वें दौर की वार्ता शुरू हुई।

नयी दिल्ली। तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले लगभग 50 दिन से जारी गतिरोध को दूर करने के प्रयासों के तहत बुधवार को सरकार और कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच 10वें दौर की वार्ता शुरू हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, रेल, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश लगभग 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ यहां विज्ञान भवन में वार्ता कर रहे हैं। दसवें दौर की वार्ता 19 जनवरी को होनी थी लेकिन यह स्थगित कर दी गई थी।

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केंद्र सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच नौ दौर की वार्ता में मुद्दे को सुलझाने की कोशिश बेनतीजा रही थी। सरकार ने पिछली वार्ता में किसान संगठनों से अनौपचारिक समूह बनाकर अपनी मांगों के बारे में सरकार को एक मसौदा प्रस्तुत करने को कहा था। हालांकि किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे। उल्लेखनीय है कि सरकार और किसान संगठनों के मध्य चल रही वार्ता के बीच उच्चतम न्यायालय ने 11 जनवरी को गतिरोध समाप्त करने के मकसद से चार सदस्यीय समिति का गठन किया था लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने नियुक्त सदस्यों द्वारा पूर्व में कृषि कानूनों को लेकर रखी गई राय पर सवाल उठाए।

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इसके बाद एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस समिति से अलग कर लिया है। दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान करीब दो महीने से नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि इन कानूनों से मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की प्रणाली समाप्त हो जाएगी और किसानों को बड़े उद्योग घरानों की ‘कृपा’ पर रहना पड़ेगा। हालांकि, सरकार इन आशंकाओं को खारिज कर चुकी है।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


श्रीराम आवरेकर ने कहा- न्यूनतम शुल्क में उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा हेतु विद्या भारती कटिबद्ध

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 3, 2021   20:08
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श्रीराम आवरेकर ने कहा- न्यूनतम शुल्क में उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा हेतु विद्या भारती कटिबद्ध

न्यूनतम शुल्क में उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा के साथ-साथ बालक-बालिकाओं के सर्वांगीण विकास हेतु विद्या भारती कटिबद्ध है। संस्थान की योजनान्तर्गत चलने वाले सभी विद्यालय पंजीकृत लोकन्यासों अथवा पंजीकृत समितियों द्वारा संचालित किये जाते हैं। जिनका प्रतिवर्ष नियमानुसार आर्थिक अंकेक्षण करवाया जाता है।

नई दिल्ली। अखिल भारतीय महामंत्री श्रीराम अरावकर ने कहा कि विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की योजना से देशभर में जो विद्यालय संचालित किये जाते हैं, उनमें जाने वाली संस्कारक्षम शिक्षा की प्रशंसा समय-समय पर देश के प्रसिद्ध शिक्षाविदों, समाजसेवियों आदि ने भी की है। जाति, मत, पंथ, सम्प्रदाय के भाव से ऊपर उठकर देशभक्त और समाज के प्रति समर्पण का भाव रखने वाली संस्कारक्षम पीढ़ी का निर्माण करना हमारा लक्ष्य है। न्यूनतम शुल्क में उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा के साथ-साथ बालक-बालिकाओं के सर्वांगीण विकास हेतु विद्या भारती कटिबद्ध है। संस्थान की योजनान्तर्गत चलने वाले सभी विद्यालय पंजीकृत लोकन्यासों अथवा पंजीकृत समितियों द्वारा संचालित किये जाते हैं। जिनका प्रतिवर्ष नियमानुसार आर्थिक अंकेक्षण करवाया जाता है। नियमानुसार इनके निर्वाचन भी करवाए जाते हैं।

सामाजिक समरसता, सर्वपंथ समभाव तथा सभी विचारों का आदर व सम्मान पर हमारे विद्यालयों में विशेष आग्रह है। हमारे विद्यालयों में मुस्लिम व ईसाई वर्ग के लगभग 80,000 छात्र शिक्षा ले रहे हैं। जिन्होंने न केवल शैक्षिक दृष्टि से प्राविण्य सूची में भी उत्कर्ष स्थान प्राप्त किये हैं, वरन् अनेक छात्रों ने खेलों के क्षेत्र में भी अपने परिवार व विद्यालय के नाम गौरवान्वित किया है।





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एजुकेशन सेक्टर को लेकर स्पेशल वेबिनार, PM मोदी बोले- 19वीं सदी की सोच को पीछे छोड़ना होगा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 3, 2021   19:35
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एजुकेशन सेक्टर को लेकर स्पेशल वेबिनार, PM मोदी बोले- 19वीं सदी की सोच को पीछे छोड़ना होगा

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में देश और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सामग्री उपलब्ध कराना हर के शिक्षाविदों व विशेषज्ञों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और अनुसंधान को सीमित करना देश की क्षमता के साथ एक बड़ा अन्याय है।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) स्थानीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिये मिशन मोड में काम करने की जरूरत है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों और गरीबों की प्रतिभा को पनपने का मौका मिल सके। शिक्षा क्षेत्र के लिये केंद्रीय बजट में प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन पर एक वेबिनार को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में देश और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सामग्री उपलब्ध कराना हर के शिक्षाविदों व विशेषज्ञों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और अनुसंधान को सीमित करना देश की क्षमता के साथ एक बड़ा अन्याय है। मोदी ने कहा कि शिक्षा, कौशल, अनुसंधान और नवाचार पर बजट में स्वास्थ्य के बाद सबसे अधिक ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय बजट ने शिक्षा को रोजगार और उद्यमशीलता की क्षमता से जोड़ने के हमारे प्रयासों को व्यापक बनाया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत आज वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में शीर्ष तीन देशों में शामिल है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्ञान और अनुसंधान को सीमित करना देश की क्षमता के साथ एक बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी दृष्टिकोण के साथ, हमारे प्रतिभाशाली युवाओं के लिये अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, डीआरडीओ, कृषि जैसे कई क्षेत्रों के दरवाजे खोले जा रहे हैं।’’ मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करने के लिये देश के युवाओं में आत्मविश्वास महत्वपूर्ण है। यह आत्मविश्वास तभी आयेगा, जब युवाओं को अपनी शिक्षा और ज्ञान पर पूरा विश्वास होगा। मोदी ने कहा कि भारत नवप्रवर्त के वैश्विक सूचकांक में शीर्ष 50 देशों में शामिल हो गया है और इसमें लगातार सुधार हो रहा है। 

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शिक्षा प्रणाली में स्थानीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा, विशेषज्ञ जानते हैं कि किसी विषय को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने स्थानीय के उपयोग को प्रोत्साहित किया है। अब यह सभी भाषाविदों और हर के विशेषज्ञों की जिम्मेदारी है कि वे भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करायें। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी के इस युग में, यह निश्चित रूप से संभव है। मोदी ने कहा, ‘‘प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सर्वोत्तम सामग्री भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो। भारतीय भाषाओं में सामग्री तैयार करना करना आवश्यक है।’’ मोदी ने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांवों में रहने वाले और गरीब, जो अपनी स्थानीय के अलावा किसी भी को नहीं जानते हैं, उनके पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। हमें अपने गांवों की प्रतिभा को (कठिनाइयों) के कारण मरने नहीं देना चाहिये। उन्होंने कहा कि गांवों और गरीबों को देश की विकास यात्रा से वंचित नहीं किया जाना चाहिये। की बाधा पर काबू पाने और प्रतिभा को पनपने के लिये स्थानीय भाषाओं में अवसर प्रदान करने को लेकर मिशन मोड पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बजट में घोषित राष्ट्रीय अनुवाद मिशन इसके लिए बहुत प्रोत्साहन देगा। मोदी ने एनईपी के सभी प्रावधानों को प्री-नर्सरी से पीएचडी स्तर तक जल्दी लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि बजट इस संबंध में बहुत मदद करेगा। उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर तालमेल का भी आह्वान किया। मोदी ने कहा कि कौशल विकास, उन्नयन और प्रशिक्षुता पर बजट में जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार पर निरंतर ध्यान देने के साथ छात्रों व युवा वैज्ञानिकों के लिये नये अवसर बढ़ रहे हैं।





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कोरोना काल का इम्का कनेक्शन रहा खास, पुरस्कार के साथ हरियाली क्रांति कैंपेन के तहत बांटे गए पौधे

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 3, 2021   19:28
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कोरोना काल का इम्का कनेक्शन रहा खास, पुरस्कार के साथ हरियाली क्रांति कैंपेन के तहत बांटे गए पौधे

इस बार हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल की गई। 'गिव मी ट्री ट्रस्ट' की तरफ से कनेक्शन में आए हुए सभी पत्रकारों को पौधे भेंट किए गए। इसके साथ ही पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को पुरस्कृत भी किया गया।

नई दिल्ली। आईआईएमसी के एल्मुनाई एसोसिएशन का सालाना मीट कनेक्शंस नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान के प्रांगण में आयोजित किया गया। इस बार का इम्का कनेक्शन हर साल से अलग रहा। इस आयोजन के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जहां पहले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहा करती थी, वहीं इस बार हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल की गई। 'गिव मी ट्री ट्रस्ट' की तरफ से कनेक्शन में आए हुए सभी पत्रकारों को पौधे भेंट किए गए। इसके साथ ही पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को पुरस्कृत भी किया गया।

नई प्रक्रिया के तहत किया गया पुरस्कार विजेताओं का चयन

हर वर्ष जहां इम्का पुरस्कार विजेताओं का चयन ज्यूरी के माध्यम से किया जाता था, वहीं इस साल पुरस्कार विजेताओं का चयन चुनाव प्रणाली के द्वारा किया गया। पुरस्कारों के लिए एक निश्चित समय सीमा के अंदर आवेदन मंगाया गया, उसके बाद उनके कार्यों को सभी इम्का मेंबर के सामने चुनाव के लिए प्रस्तुत किया गया। अंततः ज्यादा वोट पाने वाले पत्रकारों को विजय घोषित किया गया।

हरियाली बढ़ाने के लिए लोगों को दिया गया प्रशिक्षण

पीपल बाबा के नेतृत्व वाली Give me trees trust के प्रशिक्षित पर्यावरण कर्मियों ने पत्रकारों को किचन गार्डनिंग का पैकेट, कम्पोस्ट खाद, इंडोर प्लांटिंग से जुड़े पौधे और बड़े पौधे जूट के बैग में रखकर गिफ्ट दिया। साथ ही साथ हरियाली बढ़ाने से जुड़े इन समानों को कैसे उपयोग में लाया जाय, इसके बारे में बाकायदा जानकारी भी दी। उनका कहना था कि दिल्ली जैसी जगह में हमारे पास जगह की कमी है, इस वजह से हम पेड़ न लगाने का बहाना बनाय, इसकी बजाय अपने फ्लैट की बालकनी और छत पर भी छोटे पौधे उगाकर ऑक्सीजन बढ़ाने का उपाय कर सकते हैं। घर के अंदर भी डेकोरेशन बढ़ाने वाले पौधे लगाए जाने की भी पहल की जानी चाहिए। इससे भी घर की सुंदरता के साथ घर के अंदर ऑक्सीजन का प्रवाह सुनिश्चित किया जा सकता है।

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क्या है हरियाली क्रांति कैम्पेन

Give me trees trust के इस अभियान के तहत यह संस्था लोगों क़ो जन्मदिवस, स्थापना दिवस या किसी भी शुभ दिवस क़ो हरियाली दिवस के रूप में मनाने की अपील करती है। जहाँ कहीं से भी जन्मदिवस क़ो हरियाली दिवस के रूप में मनाने के लिए सूचना आती है वहाँ पीपल बाबा की टीम जाकर पेड़ लगाती है। गौरतलब है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी के जन्मदिवस क़ो हरियाली दिवस के रूप में मनाया गया था और इनके 63 वें जन्मदिवस पर give me trees trust के साथ जुड़कर नकवी जी के समर्थकों नें दिल्ली के जौनापुर के हनुमान मंदिर में 63 नीम और 63 पीपल के पेड़ लगाए थे यहाँ पर आए सभी लोगों नें जन्मदिवस क़ो हरियाली दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया था अब ढेर सारे लोग इस अभियान से जुड़ रहें है  | आई आई एम सी में भी पीपल बाबा की टीम नें लोगों के जन्मदिवस क़ो हरियाली दिवस के रूप में मनाने के लिए इच्छुक पत्रकारों की एंट्री ली | इस संदर्भ में मुख्य बात यह है कि इस अभियान की डिजाइन मशहूर कैंपेन डिज़ाइनर बद्री नाथ ने की है | गौरतलब है कि बद्रीनाथ आई आई एम सी के पूर्व छात्र हैं। इन्होंने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश के चुनावी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। बद्रीनाथ हाल ही में दुनियां की सबसे बड़ी बस यात्रा "ऋषिकेश से लन्दन" यात्रा डिज़ाइन करके चर्चा में आए थे।|





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