बिहार के लिए NDA की सूची में जातिगत समीकरण का रखा गया पूरा ख्याल

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 24, 2019   16:00
बिहार के लिए NDA की सूची में जातिगत समीकरण का रखा गया पूरा ख्याल

खगड़िया से गठबंधन के उम्मीदवार की घोषणा अब भी बाकी है जो लोजपा के हिस्से में है। वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष महबूब अली कैसर कर रहे हैं।

पटना। बिहार में लोकसभा उम्मीदवारों की सूची तैयार करते वक्त राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने जाति के अंकगणित पर खासा ध्यान दिया है। इस गठबंधन में भाजपा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवन की लोजपा शामिल है। गठबंधन ने ‘सामान्य वर्ग’ के 13 लोगों को टिकट दी है। उम्मीद है कि इसे सबसे ज्यादा वोट ऊंची जाति से मिलेंगे जिन्हें मूलत: भाजपा का समर्थक माना जाता है। किशनगंज से जद (यू) के उम्मीदवार महमूद अशरफ एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार है। ऐसी अटकलें थी कि भाजपा के मुस्लिम चेहरे शाहनवाज हुसैन को भागलपुर या किशनगंज से उतारा जा सकता है लेकिन दोनों ही सीटें जदयू के खाते में चली गईं।  खगड़िया से गठबंधन के उम्मीदवार की घोषणा अब भी बाकी है जो लोजपा के हिस्से में है। वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष महबूब अली कैसर कर रहे हैं। 

ऊंची जाति के उम्मीदवारों में सात राजपूत हैं जो काफी पहले जनता दल के साथ रहते थे और कुछ समय तक उससे अलग हुए दल लालू प्रसाद की राजद के साथ सहानुभूति रखते देखे गए। प्रमुख नामों में राधा मोहन सिंह (मोतिहारी), आर के सिंह (आरा) और राजीव प्रताप रूड़ी (सारण) शामिल हैं। ये तीनों भाजपा से हैं। इसके अलावा तीन उम्मीदवार- गिरिराज सिंह (भाजपा-बेगूसराय), राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन (जदयू- मुंगेर) और चंदन कुमार (लोजपा- नवादा) भूमिहार समुदाय से हैं। इस समुदाय को बिहार की सभी उच्च जातियों में से सबसे मुखर माना जाता है। भाजपा के दो ब्राह्मणों अश्विनी कुमार चौबे (बक्सर) और गोपालजी ठाकुर (दरभंगा) को भी सूची में जगह मिली है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद कायस्थ हैं। उन्हें पटना साहिब से उतारा गया है जहां कायस्थों की तादाद काफी ज्यादा है। उनके पास इस सीट को भाजपा के लिए बरकरार रखने की चुनौती है। हो सकता है कि उनका सीधा मुकाबला सांसद शत्रुघ्न सिन्हा से हो जिन्हें इस बार कांग्रेस बतौर प्रत्याशी उतार सकती है।

इसे भी पढ़ें: चायवालों को भूलकर चौकीदारों को याद कर रहे हैं मोदी: कपिल सिब्बल

सूची के 12 उम्मीदवार अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) से हैं जिनमें पांच यादव हैं। राज्य में यादवों की संख्या सबसे ज्यादा है जो राजद का वोट बैंक माने जाते हैं। प्रमुख यादव उम्मीदवारों में नित्यानंद राय (उजियारपुर) और राम कृपाल यादव (पाटलिपुत्र) के नाम शामिल हैं। छह आरक्षित सीटों पर छह दलित उम्मीदवार भी शामिल हैं। इनमें लोजपा प्रमुख के बेटे चिराग पासवान (जमुई) और भाई राम चंद्र पासवान (समस्तीपुर) एवं पशुपति कुमार पारस (हाजीपुर) समेत चार पासवान हैं। अत्यंत पिछली जातियों जैसे धानुक, केवट, गंगोटा एवं चंद्रवंशी कहार जाति के सात उम्मीदवारों को भी सूची में जगह दी गई है। भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, “राजग ने टिकट के बंटवारे में समाज के प्रत्येक वर्ग का पर्याप्त ध्यान रखा है। लोकसभा चुनावों में गठबंधन राजद एवं महागठबंधन की अन्य पार्टियों की विभाजनकारी एवं जातिवादी राजनीति को तबाह करेगा।”





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।