ऑस्कर की दौड़ में शामिल हुई Theja Rio की नगालैंड आधारित फिल्म Aang

टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्लेटफॉर्म पुरस्कार जीतने के बाद नगालैंड की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म आंग ऑस्कर के सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म वर्ग की पात्रता दौड़ में पहुंच गई है। निर्देशक थेजा रियो ने बताया कि 1960 के दशक पर आधारित यह 103 मिनट की फिल्म कोन्याक जनजातीय समुदाय के पिता-पुत्र की कहानी बयां करती है। रियो चाहते हैं कि दुनिया उनकी नगा संस्कृति को केवल देखे ही नहीं बल्कि गहराई से समझे भी।
(रवि बंसल) नयी दिल्ली, एक अक्टूबर फिल्म निर्देशक थेजा रियो का कहना है कि नगालैंड की पृष्ठभूमि पर बनी उनकी फिल्म ‘आंग’ ऐसे फिल्म उद्योग से आती है, जो लगभग अस्तित्वहीन है और निश्चित रूप से आत्मनिर्भर नहीं है। अपनी फिल्म के नगालैंड की घाटियों से टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और अब ऑस्कर की दौड़ तक पहुंचने से उत्साहित रियो कहते हैं कि वह चाहते हैं कि उनकी संस्कृति को सिर्फ प्रदर्शित नहीं किया जाए, बल्कि समझा भी जाए। 1960 के दशक की पृष्ठभूमि पर बनी और 16 मिमी पर फिल्माई गई ‘आंग’ ने टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (टीआईएफएफ) में प्लेटफॉर्म पुरस्कार जीता।
यह फिल्म ऑस्कर के सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म वर्ग में पात्रता की दौड़ में शामिल हो गई। कोन्याक में बनी ‘आंग’ इस श्रेणी में संभावित नामांकन के लिए भारत की दूसरी फिल्म होगी। इससे पहले आधिकारिक प्रविष्टि के तौर पर मराठी फिल्म ‘गोंधल’ भेजी गई है।
कोहिमा में जन्मे 31 वर्षीय रियो पहली बार फिल्म निर्देशन कर रहे हैं। उन्होंने इसी नाम की अपनी पुरस्कार विजेता लघु फिल्म को विकसित करके यह 103 मिनट की फिल्म बनाई है। फिल्म कोन्याक जनजातीय समुदाय के एक पिता और पुत्र की कहानी है, जिन्हें अपनी मातृभूमि में बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश का सामना करना पड़ता है।
रियो ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम सिर्फ प्रदर्शित नहीं होना चाहते। हम चाहते हैं कि हमें समझा जाए। उम्मीद है कि ‘आंग’ के रिलीज होने के बाद ज्यादा से ज्यादा लोग हमारे बारे में जानेंगे और दुनिया को हमारे नजरिए से भी देखेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर और नगालैंड से बहुत से और फिल्मकार सामने आएंगे और मुझे उम्मीद है कि उन्हें समर्थन मिलता रहेगा।’’ अपनी फिल्म की ऑस्कर यात्रा के बारे में रियो ने कहा, ‘‘हमें यह अवसर मिला है, इसलिए हम नामांकन हासिल करने की पूरी कोशिश करेंगे।
हम फिल्म को यहां रिलीज करने पर भी विचार कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि ‘आंग’ एक नगा पात्र के नजरिए से कही गई कहानी है और इसे नगा लोगों ने बनाया है। रियो ने कहा, ‘‘यह किसी बाहरी व्यक्ति की खोज की कहानी नहीं, बल्कि पात्र के नजरिए से कही गई कहानी है। फिल्में एक खूबसूरत खिड़की की तरह होती हैं, जिनके जरिए किसी संस्कृति और वहां के लोगों को समझने की अंतर्दृष्टि मिल सकती है।’’ उन्होंने कहा कि अपनी फिल्म को टोरंटो जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाना उनके लिए सपना सच होने जैसा था और वहां उन्हें दूसरे फिल्मकारों से बातचीत का अवसर भी मिला।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि हम जीतने वाले हैं लेकिन मेरे निर्माता इस मामले में मुझसे ज्यादा आश्वस्त थे। उन्हें विश्वास था कि हम जीतेंगे। जब विजेता के तौर पर हमारे नाम की घोषणा हुई तो वह अवास्तविक-सा पल था, क्योंकि जैसा मैंने कहा, फिल्म को वहां तक ले जाना ही हमारे लिए बड़ी उपलब्धि थी।’’ रियो के अनुसार, भारत के अन्य हिस्सों के विपरीत नगालैंड में फिल्म निर्माण की संस्कृति नहीं रही और पूरे राज्य में केवल दो सिनेमाघर थे।
यहां तक कि राजधानी कोहिमा में भी कोई सिनेमाघर नहीं था। वह बचपन में टेलीविजन पर फिल्में देखते हुए बड़े हुए और बाद में पायरेटेड डीवीडी तथा अवैध स्ट्रीमिंग सेवाओं के जरिए फिल्में देखीं। उनका पहला सिनेमाघर का अनुभव सात साल की उम्र में दिल्ली में पीटर जैक्सन की फिल्म ‘द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द रिटर्न ऑफ द किंग’ देखने का था।
इस अनुभव का उन पर गहरा असर पड़ा और उन्होंने फिल्म निर्माण को अपना करियर बनाने का फैसला किया। रियो ने कहा, ‘‘‘आंग’ ऐसे फिल्म उद्योग से आती है जो लगभग अस्तित्वहीन है और निश्चित रूप से आत्मनिर्भर नहीं है। अपनी संस्कृति में रची-बसी फिल्में बनाने के बावजूद हमें दर्शकों और मान्यता के लिए बाहर देखना पड़ता है।
टीआईएफएफ और ऐसे अन्य फिल्म महोत्सव हमें दृश्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।’’ ‘आंग’ का निर्माण नैन्सी निसा बेसो और रियो ने किया है। फिल्म में हेंशल के साथ स्थानीय नगा कलाकारों ने अभिनय किया है। हेंशल को धारावाहिक ‘शेटलैंड’ में उनकी भूमिका के लिए बाफ्टा पुरस्कार मिल चुका है।
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