TMC का नाम और निशान बदला! खेला होबे करने वाली Mamata Banerjee को मिली फुटबॉल, अरूप के हाथ आया लिफाफा

यह फैसला उस अंतरिम आदेश के एक दिन बाद आया है, जिसमें चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और उसके पारंपरिक फूल और घास वाले चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। आयोग के मुताबिक दोनों पक्ष खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए संगठन पर नियंत्रण का दावा कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब सीधे पार्टी की पहचान और चुनावी अस्तित्व के सवाल तक पहुंच गई है। चुनाव आयोग ने आज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया। वहीं अरूप राय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह मिला है। दोनों गुट आगामी उपचुनाव इन्हीं अलग-अलग नामों और चिन्हों के साथ लड़ेंगे।
यह फैसला उस अंतरिम आदेश के एक दिन बाद आया है, जिसमें चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और उसके पारंपरिक फूल और घास वाले चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। आयोग के मुताबिक दोनों पक्ष खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए संगठन पर नियंत्रण का दावा कर रहे हैं। इसलिए चुनाव चिन्ह संबंधी आदेश की धारा 15 के तहत इस विवाद का अंतिम और ठोस निपटारा जरूरी है। तब तक दोनों गुटों को बराबरी की स्थिति में रखने के लिए यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।
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हम आपको याद दिला दें कि यह मामला जुलाई में चुनाव आयोग तक पहुंचा था। इसके बाद आयोग ने संगठनात्मक नियंत्रण, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं, पार्टी की संपत्तियों, नाम और चुनाव चिन्ह समेत कई मुद्दों पर दोनों पक्षों से दस्तावेज और जवाब मांगे। अब उपचुनाव सिर पर होने के कारण आयोग ने तत्काल व्यवस्था करते हुए दोनों गुटों की पुरानी पहचान पर रोक लगाकर उन्हें नई राजनीतिक पहचान दे दी है। अंतिम फैसला आने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी।
लेकिन चुनाव आयोग के इस फैसले ने बंगाल से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा राजनीतिक टकराव पैदा कर दिया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के कदम पर बेहद तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विवादों का हवाला देते हुए कहा कि पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में एक जैसा तरीका दिखाई दे रहा है।
राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ बताते हुए लोकतांत्रिक गिरावट का प्रतीक करार दिया और कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की चिंता करने वाले राजनीतिक दलों और मतदाताओं की है।
राहुल गांधी के इस हमले पर भाजपा ने भी पलटवार किया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने ही राजनीतिक इतिहास और अपनी ही पार्टी की समझ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका तर्क था कि तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दोनों ही कांग्रेस से अलग होकर बनी राजनीतिक ताकतें हैं। इसलिए चुनाव आयोग के फैसले को भाजपा द्वारा विपक्षी दलों को तोड़ने की साजिश बताने के बजाय पूरे घटनाक्रम को संबंधित दलों के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
बहरहाल, तृणमूल कांग्रेस का विवाद अब केवल बंगाल में पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह की लड़ाई नहीं रह गया है। एक तरफ ममता गुट नई पहचान और नए चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जोड़ रहा है। भाजपा राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक आरोपबाजी बता रही है। अंतिम फैसला आने तक बंगाल की राजनीति में यह नाम, निशान और नैरेटिव, तीनों की लड़ाई जारी रहने वाली है।
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