• शिमला में चौड़ी सडकों व सुरंगो के साथ होगा यातायात दिक्कतों का समाधान

मुख्यमंत्री ने ढली जंक्शन और ढली बाईपास के सुधार कार्य की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरंगों के निर्माण से बड़ी मात्रा में मलबा निकलता है, इसलिए भूमि के बेहतर उपयोग के लिए डंपिंग स्थलों पर स्टेडियम जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाना चाहिए।

शिमला। शिमला आने वाले पर्यटकों को आमतौर पर लंबे जाम व छोटी सडकों की वजह से कई दिक्कतों का सामना करना पडता है लेकिन आने वाले दिनों में अब यहां सुगम यातायात सुविधा मिलेगी। प्रदेश सरकार शिमला आने वाले मार्गों का सुधार कर रही है इसके लिये सडकों को चौडा कर कई स्थानों पर सुरंगों का भी नये सिरे से निर्माण होगा। दरअसल अक्तूबर 2019 से कालका-शिमला फोरलेन के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में कैथलीघाट से ढली तक बनने वाले 27 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण कार्य ठप पड़ा है। फोरलेन निर्माण में लगी कंपनी निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर चली गई । इसके बाद फोरलेन निर्माण का कार्य ठप है।  लेकिन केन्द्र सरकार के दखल के बाद अब इस काम के दोबारा षुरू होने की आस बंधी है इसी के चलते सीएम जय राम ठाकुर ने  इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दोबारा शुरू होने की तैयारी है। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के समक्ष यहां शिमला बाईपास फोरलेनिंग परियोजना के अन्तर्गत कैथलीघाट से ढली सेक्शन में प्रस्तावित संरेखण (अलाइनमेंट) और शिमला स्मार्ट सिटी मिशन के तहत ढली टनल के समानान्तर हाईवे टनल के निर्माण के लिए एक प्रस्तुति दी गई।

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मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि कैथलीघाट से ढली सेक्शन तक पांच सुरंगों के निर्माण की आवश्यकता है। इस फोरलेन परियोजना में भट्टाकुफर से ढली के लिए वर्तमान में प्रस्तावित ट्विन टनल/वायोडक्ट्स शहरी क्षेत्र को पूरी तरह बाईपास करेगी और इससे वन क्षेत्र तथा ढांचे कम से कम प्रभावित होंगे। जय राम ठाकुर ने कहा कि इस प्रस्तावित फोरलेन बाईपास से क्षेत्र के निवासियों की जिन्दगी में नगण्य प्रभाव होना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संजौली बाईपास और शहर की सड़कों से सम्पर्क के लिए प्रस्तावित ट्विन टनल से शिमला नगर के लोगों को बेहतर सम्पर्क सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने ढली जंक्शन और ढली बाईपास के सुधार कार्य की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरंगों के निर्माण से बड़ी मात्रा में मलबा निकलता है, इसलिए भूमि के बेहतर उपयोग के लिए डंपिंग स्थलों पर स्टेडियम जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को इन परियोजनाओं को निर्धारित समय पर पूरा करने के निर्देश दिए ताकि लोग शीघ्र इनसे लाभान्वित हो सकें।

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जय राम ठाकुर ने कहा कि ढल्ली सुरंग 175 वर्ष से अधिक पुरानी है और इसकी डिजाइन की अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ऊपरी शिमला क्षेत्र, मंडी, कुल्लू और किन्नौर जिलों को जोड़ने के कारण यह सुरंग एक महत्वपूण है। सरकार ने इस सुरंग के साथ समानांतर सुरंग बनाने का निर्णय लिया है ताकि वाहनों का सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि 55 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस टू लेन सुरंग का निर्माण किया जाएगा और अगले साल अगस्त माह तक इसका कार्य पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी हितधारकों विशेषकर प्रस्तावित सुरंग के ऊपर स्थित मकानों के मालिकों को विश्वास में लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उनके साथ बैठक कर उन्हें आश्वस्त किया जाए कि इस परियोजना से उनकी संपत्ति को कोई नुकसान नहीं होगा। प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुभाशीष पांडा ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के हर सम्भव प्रयास किये जायेंगे। बैठक में मुख्य सचिव अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव जे.सी शर्मा, विशेष सचिव अरिंदम चैधरी, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी जी.एस. संघा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।