Operation Sheruwali के तहत राजौरी के घने जंगलों में घिरे पाक आतंकी, खून के धब्बों से हुआ गुप्त ठिकाने का खुलासा

हेलिकॉप्टरों, ड्रोनों और खोजी कुत्तों की मदद से सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमें आसपास के इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान चला रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के माध्यम से ऑपरेशन क्षेत्र के चारों ओर घेरा भी मजबूत कर दिया गया है।
जम्मू और कश्मीर में राजौरी जिले के जंगलों में संभवत: छिपे दो-तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की सफाया करने के लिए सुरक्षा बलों का 'ऑपरेशन शेरुवाली' शनिवार को आठवें दिन भी जारी रहा जबकि पड़ोसी पुंछ जिले में भी एक अन्य आतंकवाद विरोधी तलाशी अभियान शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि राजौरी जिले में सुरक्षा बलों ने संदिग्ध आतंकवादियों के ठिकानों पर भारी गोलीबारी की क्योंकि ये आतंकवादी मांजकोट क्षेत्र के डोरिमल-गंभीर मुगला बेल्ट में दुर्गम इलाकों, घाटियों और दर्रों में लगातार ठिकाने बदलते रहे। उन्होंने कहा कि पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र में संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीमों ने शुक्रवार को वहां घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि दो-तीन व्यक्तियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद इलाके की गहन तलाशी शुरू की गयी।
हम आपको यह भी बता दें कि सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी-जम्मू) भीम सेन टूटी और सीआरपीएफ के एक महानिरीक्षक ने बुधवार को इलाके का दौरा किया तथा घने जंगलों में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुरक्षा बलों द्वारा भारी गोलीबारी और कई ग्रेनेड लॉन्चरों से निशाना बनाये जाने के फलस्वरूप वन क्षेत्र से धुएं के गुबार उठते हुए दिखाई दिए, जो ऑपरेशन के दौरान लक्षित स्थानों पर सफल हमलों का संकेत देते हैं। सुरक्षा बल खून के धब्बों के आधार पर संदिग्धों के आवागमन पर कड़ी नजर रख रहे हैं क्योंकि समझा जा रहा है कि ये खून के धब्बे भाग रहे आतंकवादियों के हैं। अधिकारियों ने बताया कि खून के धब्बे मिलने वाले इलाके में घेराबंदी मजबूत करते हुए संक्षिप्त गोलीबारी के बाद उन्होंने एक गुप्त ठिकाने का पता लगा लिया है।
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अधिकारियों के अनुसार हेलिकॉप्टरों, ड्रोनों और खोजी कुत्तों की मदद से सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमें आसपास के इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान चला रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के माध्यम से ऑपरेशन क्षेत्र के चारों ओर घेरा भी मजबूत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपायों को बढ़ाने के तहत, ऑपरेशन क्षेत्र से जुड़ी सड़कों पर वाहनों की जांच तेज कर दी गई है तथा गंभीर मुगला क्षेत्र के डोरी माल के जंगलों में अतिरिक्त बल भेजे गए हैं। हम आपको बता दें कि पिछले शनिवार को सिंहपोरा-चत्रू क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद डोरिमल-गंभीर मुगला बेल्ट में आतंकवादियों एवं सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ छिड़ी थी तथा उसके बाद ‘ऑपरेशन शेरुवाली’ शुरू किया गया था। सेना, जम्मू और कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक संयुक्त टीम ने संदिग्ध आतंकवादियों की गतिविधियों के बारे में मिली विशिष्ट जानकारी के आधार पर इलाके में व्यापक घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया। अभियान के दौरान आतंकवादियों से मुठभेड़ हुई और संक्षिप्त गोलीबारी हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने दुर्गम और घने जंगलों वाले इलाके में व्यापक तलाशी अभियान जारी रखा। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, एक कमांडर सहित दो-तीन पाकिस्तानी आतंकवादी इस क्षेत्र में छिपे होने की आशंका है। उधर, स्थानीय लोगों ने सेना के इस अभियान की काफी सराहना की है।
हम आपको यह भी बता दें कि जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जोगिंदर सिंह ने वार्षिक अमरनाथ यात्रा से पहले भगवती नगर आधार शिविर में सुरक्षा और रसद व्यवस्था की समीक्षा की। यह यात्रा तीन जुलाई से शुरू होने वाली है। यह 57 दिवसीय तीर्थयात्रा तीन जुलाई को दो मार्गों से शुरू होगी, अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग से और गांदरबल में खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से। यह यात्रा रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को समाप्त होगी। बेस-कैंप के अपने दौरे के दौरान, एसएसपी ने सुरक्षा तैनाती का व्यापक निरीक्षण किया और अधिकारियों और कर्मियों को तीर्थयात्रा के सुचारू संचालन के निर्देश दिए। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और प्रशासन के अधिकारियों ने भी समीक्षा बैठक में भाग लिया, जहां समग्र सुरक्षा रणनीति, भीड़ प्रबंधन, यातायात विनियमन, निगरानी उपायों, आपातकालीन प्रतिक्रिया तैयारियों और अंतर-एजेंसी समन्वय पर विस्तृत चर्चा हुई।
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