छत्तीसगढ़ के Sirpur को यूनेस्को की World Heritage Sites की अस्थायी सूची में मिली जगह

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महासमुंद जिले में महानदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक नगर सिरपुर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में दर्ज किया है। बौद्ध विहारों और सातवीं शताब्दी के ईंट निर्मित प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर के लिए पहचाने जाने वाले इस स्थल को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभारने के प्रयास जारी हैं।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन नगरी सिरपुर को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अधिकारियों के मुताबिक, प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों, दुर्लभ मूर्तिकला, स्थापत्य कला और धार्मिक सहिष्णुता की परंपरा के लिए प्रसिद्ध सिरपुर अब विश्व धरोहर का दर्जा हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में भी महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक जनवरी 2026 को सिरपुर के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों का दौरा किया था। शेखावत ने इस दौरान यहां की समृद्ध विरासत और स्थापत्य कला की सराहना करते हुए इनके संरक्षण तथा सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्राथमिकता से प्रयास करने की बात कही थी। प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से विख्यात सिरपुर पांडुवंशी शासकों के शासनकाल में दक्षिण कोसल की राजधानी था।

महानदी के तट पर स्थित यह नगर राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। सिरपुर का प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्ट उपलब्धियों में गिना जाता है। लगभग सातवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर ईंटों से बने प्राचीन भारतीय मंदिरों के प्रमुख उदाहरणों में शामिल है।

इसकी वास्तुकला, कलात्मक अलंकरण और सूक्ष्म शिल्पांकन तत्कालीन शिल्पकारों की दक्षता को दर्शाते हैं।

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