UP Chunav 2022: कहीं राजनीति ने जुड़वा भाइयों की राहे जुदा की, कहीं एक ही सीट पर दो भाइयों ने ठोकी दावेदारी

UP Chunav 2022: कहीं राजनीति ने जुड़वा भाइयों की राहे जुदा की, कहीं एक ही सीट पर दो भाइयों ने ठोकी दावेदारी

वेस्ट यूपी के सहारनपुर के काजी घराने के इमरान मसूद और उनके जुड़वा भाई नोमान मसूद की सियासी राहें हफ्ते भर के भीतर अलग-अलग हो गई। इसी तरह मुजफ्फरनगर से पूर्व मंत्री चित्तरंजन स्वरूप के दोनों बेटे गौरव और सौरव भी टिकट पाने की होड़ में लगे हैं।

उत्तर प्रदेश पूरी तरह से चुनावी माहौल में है और नेताओं के एक दल से दूसरे दल में आने-जाने का सिलसिला भी पूरे शबाब पर है। सपा ने बीते दिनों बीजेपी के ओबीसी वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की और कई नेताओं को अपने पाले में किया तो बीजेपी ने समाजवादी परिवार में ही सेंध लगा दी। मुलायम परिवार की बहू अपर्णा यादव ने बीजेपी का दामन थाम लिया। लेकिन दल बदल के सिलसिले के साथ ही प्रदेश की सियासत में सामाजिक और पारिवारिक तौर पर एक होकर भी राजनीति में अलग होती राहों से भी दो-चार हो रहा है। वेस्ट यूपी के सहारनपुर के काजी घराने के इमरान मसूद और उनके जुड़वा भाई नोमान मसूद की सियासी राहें हफ्ते भर के भीतर अलग-अलग हो गई। इस बार के सियासी सफर में इमरान कांग्रेस छोड़कर सपा से तो नोमान आरएलडी को छोड़ बसपा से चुनावी कमान संभाले हैं। इसी तरह मुजफ्फरनगर से पूर्व मंत्री चित्तरंजन स्वरूप के दोनों बेटे गौरव और सौरव भी टिकट पाने की होड़ में लगे हैं।

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जुड़वा भाईयों की अलग राह 

राजनीतिक खानदान से निकले काजी रशीद मसूद आठ बार सांसद तथा केंद्रीय मंत्री बने। काजी रशीद मसूद को देखकर ही उनके भतीजे इमरान मसूद तथा नोमान मसूद ने सियासी भविष्य के सपने देखने शुरू किए। गंगोह के काजी घराने से काजी राशिद मसूद नगर पालिका के अध्यक्ष रहे। उनके भाई काजी रशीद मसूद आठ बार सांसद। काजी रशीद मसूद के पांच भतीजों में इमरान सबसे बड़े हैं। उनसे छोटे जुड़वां भाई नोमान हैं। इसके अलावा सलमान, अदनान और जीशान हैं। 20 अप्रैल 1969 को जन्मे इमरान तथा नोमान मसूद ने चाचा से सियासी ककहरा सीखा। 

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एक ही सीट से दावेदारी ठोक रहे दो भाई

पूर्व राज्य मंत्री स्वर्गीय चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप और सौरव स्वरूप टिकट को लेकर अपनी-अपनी दावेदारी तेज कर रहे हैं। गौरव स्वरूप दो बार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। 2016 के उपचुनाव और 2017 के मुख्य चुनाव में उन्हें प्रत्याशी बनाया गया था। दोनों ही चुनाव में हार झेलनी पड़ी। इस बार शहर सीट रालोद के हिस्से में आई है। दोनों भाई अपने अपने टिकट के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि इस बार सौरव उर्फ बंटी पर रालोद दांव खेल सकता है।  





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