Ram Mandir दान चोरी के बाद अब Mata Vaishno Devi Temple में चढ़ाई गई चांदी पर सवाल, Court ने मंगवाया पूरा रिकॉर्ड

mata vaishno devi temple
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मामले की शुरुआत तब हुई जब इस वर्ष मई में माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने करीब बीस टन चांदी को मानक प्रक्रिया के तहत गलाने और सुरक्षित रखने के लिए सरकारी टकसाल भेजा। बताया गया कि जांच के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।

अयोध्या के राम मंदिर में दान से जुड़़े विवाद की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब माता वैष्णो देवी धाम में चढ़ाई गई चांदी को लेकर गंभीर सवाल खडे हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर की एक अदालत ने कथित तौर पर पांच सौ पचास करोड़ रुपये मूल्य की चांदी के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़े सभी अभिलेख अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है।

मामले की शुरुआत तब हुई जब इस वर्ष मई में माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने करीब बीस टन चांदी को मानक प्रक्रिया के तहत गलाने और सुरक्षित रखने के लिए सरकारी टकसाल भेजा। बताया गया कि जांच के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। कथित तौर पर पूरी खेप में केवल पांच प्रतिशत धातु ही असली चांदी निकली, जबकि लगभग पचानवे प्रतिशत हिस्सा कैडमियम और लोहे जैसी सस्ती धातुओं का पाया गया। यदि यह दावा सही साबित होता है तो पांच सौ पचास करोड़ रुपये आंकी गई चांदी का वास्तविक मूल्य घटकर करीब तीस करोड़ रुपये रह जाता है।

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शुरुआत में यह माना गया कि संभव है श्रद्धालुओं ने अनजाने में नकली चांदी चढ़ा दी हो। लेकिन बाद में अधिवक्ता दीपक शर्मा ने अपराध शाखा के महानिरीक्षक को शिकायत देकर अलग ही आशंका जताई। उनका आरोप है कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई असली चांदी को बीच में बदल दिया गया, उसमें मिलावट की गई, उसका दुरुपयोग हुआ और सरकारी अभिलेखों में भी हेरफेर की गई। शिकायत में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वास भंग और सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए तथा तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई।

शिकायत के अनुसार अपराध शाखा की ओर से समय पर प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने के बाद मामला जम्मू के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत पहुंचा। अपराध शाखा ने अदालत को बताया कि शिकायत को मंजूरी के लिए श्रीनगर स्थित मुख्यालय भेजा गया है और आवश्यक प्रक्रिया चल रही है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता का कहना है कि कानून के अनुसार सीधे प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जानी चाहिए थी।

अब अदालत ने अपराध शाखा के जांच अधिकारी को उन सभी अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है जो इस मामले से जुड़े हैं। शिकायतकर्ता ने चढ़ावे के संग्रह, भंडारण और परिवहन से जुड़े अभिलेख, निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग, धातु जांच रिपोर्ट, गलाने की प्रक्रिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने की भी मांग की है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए उन सभी दस्तावेजों को तलब किया है।

हम आपको बता दें कि हर वर्ष नब्बे लाख से अधिक श्रद्धालु कटरा से त्रिकुट पर्वत स्थित माता वैष्णो देवी धाम की यात्रा करते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग सोना और चांदी का चढ़ावा भी अर्पित करते हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि श्रद्धालुओं ने असली चांदी चढ़ाई थी तो वह आखिर कहां गई, और यदि वास्तव में नकली चांदी ही चढाई गई थी तो वह इतनी बड़ी मात्रा में मंदिर तक कैसे पहुंची। इन दोनों संभावनाओं का जवाब केवल निष्पक्ष जांच ही दे सकती है।

फिलहाल यह पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अदालत द्वारा अभिलेख तलब किया जाना यह जरूर बताता है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब सभी की नजर जांच पर है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह हाल के वर्षों में धार्मिक चढ़ावे से जुड़ा सबसे बड़ा घोटाला माना जा सकता है, और यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो इससे फैली शंकाओं का भी अंत हो जाएगा। फिलहाल सच अदालत और जांच के दस्तावेजों में छिपा है, जिसका सामने आना बाकी है।

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