कहां हैं मोदी के बचपन के दोस्त अब्बास, साथ में मनाते थे ईद, जानें अभी किस हाल में हैं?

Modi childhood friend Abbas
Creative Common
अभिनय आकाश । Jun 20 2022 12:27PM

जानकारों के अनुसार अब्बास के दो बेटे हैं। छोटा बेटा ऑस्ट्रेलिया में तो बड़ा बेटा गुजरात के कासीम्पा गांव में रहता है। अब्बास गुजरात सरकार में क्लास 2 कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। वो फूड एंड सप्लाई विभाग में थे। वो कुछ महीने पहले ही रिटायर हुए।

अब्बाल नाम आज से पहले तक बहुत आम हुआ करता था। लेकिन महज एक दिन के अब्बास ने वो मुकाम हासिल किया कि देश ही नहीं पीरी दुनिया में चर्चा तेज हो गई। फिर सवाल उठा कि आखिर अब्बास हैं कहां? सवाल उठा तो जवाबों की तलाश भी शुरू हुई। सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर अब्बास के नाम के पोस्टर चस्पा कर दिए गए। भला चर्चा हो भी क्यों न, आखिर पीएम मोदी ने खुद ही ये सवाल पूछा था। अब अब्बास को लेकर जानकारी भी सामने आने लगी। अब्बास इस समय सिडनी में अपने चोटे बेटे के पास रहते हैं। 

इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी की देशवासियों से अपील, योग दिवस को सफल बनाएं और योग की लोकप्रियता को और बढ़ाएं

जानकारों के अनुसार अब्बास के दो बेटे हैं। छोटा बेटा ऑस्ट्रेलिया में तो बड़ा बेटा गुजरात के कासीम्पा गांव में रहता है। अब्बास गुजरात सरकार में क्लास 2 कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। वो फूड एंड सप्लाई विभाग में थे। वो कुछ महीने पहले ही रिटायर हुए। पीएम के भाई पंकज भाई के अनुसार अब्बाल उनके साथ उनके स्कूल और क्लॉस में पढते थे। कहा जाता है कि अब्बास का पूरा नाम अब्बास मियांभाई मोमिन है।  पीएम के भाई के अनुसार अब्बास जिस गांव में रहते थे, वहां स्कूल नहां था। पिता की मौत के बाद उनकी पढ़ाई छूट जाती, इसलिए पिता उन्हें अपने साथ लेकर आ गए। पंकजभाई ने बताया कि अब्बास ने हमारे साथ रहकर आठवीं और नौवीं की पढ़ाई पूरी की है।

इसे भी पढ़ें: साइबर सुरक्षा पर बोले अमित शाह, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा भारत, निचले स्तर तक किया जा रहा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

दरअसल, पीएम मोदी ने अपनी मां हीराबेन के 100वें जन्मदिन पर एक ब्लॉग लिखा और अपने बचपन के दोस्त अब्बास को याद किया। इसमें उन्होंने लिखा, ‘‘मेरी मां जितनी सरल हैं उतनी ही असाधारण भी हैं। सभी माताओं की तरह।’’ उन्होंने याद किया कि उनके पिता के दोस्त का देहांत हो गया तो वह उनके बेटे अब्‍बास को घर ले आए। उन्होंने कहा, ‘‘वह हमारे साथ रहा और अपनी पढ़ाई पूरी की। मां अब्बास की वैसे ही देखभाल करती थीं, जैसे कि वह हम सभी भाई-बहनों की करती थीं। हर साल ईद पर वह अब्बास के लिए उसकी पसंद के खास पकवान बनाती थीं।’’

All the updates here:

अन्य न्यूज़