सरकारें जनता के साथ यूक्रेन युद्ध पर खुफिया जानकारी क्यों साझा कर रही हैं, क्या हैं जोखिम?

Ukraine
Prabhasakshi
खुफिया एजेंसियां ऐसे गुप्त संगठन होते हैं, जो ​​गुप्त जानकारी एकत्र करते हैं। उनकी रिपोर्टें अमूमन ‘‘टॉप सीक्रेट’’ या फिर, ‘‘संवेदनशील सूचना’’ के शीर्षक के साथ बनती हैं। सरकारें आम तौर पर अपनी वर्गीकृत सामग्रियों की सुरक्षा के महत्व को समझती हैं और उनके खुलासे से होने वाले नुकसान से भी अवगत होती हैं।

लंदन। (द कन्वरसेशन) खुफिया एजेंसियां ऐसे गुप्त संगठन होते हैं, जो ​​गुप्त जानकारी एकत्र करते हैं। उनकी रिपोर्टें अमूमन ‘‘टॉप सीक्रेट’’ या फिर, ‘‘संवेदनशील सूचना’’ के शीर्षक के साथ बनती हैं। सरकारें आम तौर पर अपनी वर्गीकृत सामग्रियों की सुरक्षा के महत्व को समझती हैं और उनके खुलासे से होने वाले नुकसान से भी अवगत होती हैं। फिर भी, पिछले आठ महीनों में, अमेरिका, ब्रिटिश और यूक्रेनी सरकारें और नाटो साझेदार नियमित रूप से वैश्विक जनता को रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बारे में अपनी खुफिया जानकारी साझा करते रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: चुनाव से पहले गुजरात दौरे पर अमित शाह, गांधीनगर में 750 बिस्तरों वाले अस्पताल का किया शिलान्यास

सर्वाइवल नामक पत्रिका में हमारा अध्ययन, इस प्रतीत होने वाले विरोधाभासी व्यवहार की जांच करता है, इस बारे में सवाल पूछता है कि सरकारें खुफिया जानकारी कैसे और क्यों साझा करती हैं - और किन जोखिमों के साथ। यूक्रेन में युद्ध से पहले और उसके दौरान, खुफिया खुलासे का उद्देश्य रूस के आक्रमण के खिलाफ यूक्रेनी और यूरोपीय प्रतिरोध को मजबूत करना, रूस के अपने कार्यों को सही ठहराने के प्रयासों को कमजोर करना और उसके युद्धकालीन अत्याचारों और विफलताओं को उजागर करना है।

इसे भी पढ़ें: फाल्गुनी पाठक और नेहा कक्कड़ की कोल्ड वॉर में कूदीं Dhanashree Verma, नए गाने को बताया पुराने से बेहतर

इन खुलासों का एक और मकसद नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्यों द्वारा यूक्रेन को दी जाने वाली रक्षा सहायता को सही ठहराना और रूस को कूटनीतिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए अन्य देशों के साथ सामंजस्य बढ़ाना था। इन खुलासे के तरीके और मकसद अभूतपूर्व नहीं हैं। अतीत में, देशों ने उन्हीं अंतर्निहित कारणों से खुफिया जानकारी का संचार किया है: कार्यों या नीतियों को सही ठहराने के लिए और भागीदारों या विरोधियों को इसके पक्ष में राजी करने और कई बार इसका उपयोग विरोधियों को उकसाने के लिए भी किया जाता है। फिर भी रूस और यूक्रेन से संबंधित खुफिया खुलासे का पैमाना, आवृत्ति और शुरू में पूर्वव्यापी प्रकृति नई है। यूक्रेन के तीव्र दबाव को देखते हुए, कीव यूक्रेनी युद्ध बंदियों को मौत के घाट उतारने के रूसी अभियानों और रूसी सुरक्षा सेवा युद्ध योजना से जुड़ी खुफिया जानकारी का खुलासा कर रहा है। यूके डिफेंस इंटेलिजेंस अधिक साफ-सुथरे तरीके से, रूसी सैन्य प्रगति और आंतरिक तनाव के बारे में सोशल मीडिया पर अपनी दैनिक ‘‘खुफिया ब्रीफिंग‘‘ जारी करता है। अमेरिका ईरानी ड्रोन के स्रोत के रूसी प्रयासों को उजागर करने और वैश्विक रूसी प्रभाव संचालन को स्पॉटलाइट करने के लिए आकलन का खुलासा करने के लिए उपग्रह इमेजरी का उपयोग कर रहा है। जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के वरिष्ठ कार्यकारी अन्ना होरिगन बताते हैं: ‘‘हम केवल अपने विरोधियों को देखते नहीं रह सकते हैं, हमें इसके बारे में कुछ करना होगा, चाहे समय पर जानकारी साझा करना, या उसके खिलाफ कार्रवाई करना।’’ फायदे और जोखिम हालांकि, प्रमुख ब्रिटिश हितधारकों, जैसे कि रक्षा खुफिया के प्रमुख, जनरल सर जिम होकेनहुल, और जीसीएचक्यू निदेशक, जेरेमी फ्लेमिंग द्वारा खुफिया जानकारी का उपयोग करने के बारे में हाल के सार्वजनिक जवाबों ने संबंधित जोखिमों को संबोधित नहीं किया है। खुफिया जानकारी का प्रसार आम तौर पर सीमित है क्योंकि रहस्यों तक पहुंच कमजोर है: इस मामले में पाना मुश्किल है और खोना आसान है। एक बार जब एक पक्ष को संदेह हो जाता है कि एक देश क्या जानता है, और कैसे, तो वह जानकारी को सुरक्षित रखने के तरीके बदल सकता है ताकि भविष्य में कोई उस तक पहुंच न सके। इस मामले में, रूस सूचना के लीक होने से बचाव के लिए कदम उठा सकता है, उदाहरण के लिए, संचार सुरक्षा में सुधार करके - या यह लीक के स्रोतों में हेरफेर कर सकता है। उदाहरण के लिए, अल्पकालिक जोखिम लाभ के लिए वरिष्ठ रूसी नीति निर्माताओं और खुफिया अधिकारियों के इंटरसेप्टेड संचार का सार्वजनिक रूप से खुलासा करने की यूक्रेन की इच्छा, लंबी अवधि में उसकी सूचना पहुंच को बाधित कर सकती है। जैसा कि सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है, यह देखते हुए कि कब और कैसे किसी के साथ खेलना है - किस स्तर पर और किन चैनलों के माध्यम से - भविष्य की गणना में महत्वपूर्ण होगा। विरोधियों की गुप्त गतिविधियों को बेनकाब करने के इस अस्पष्ट‘‘ग्रे ज़ोन’’ से बचना अकसर फायदेमंद होता है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के प्रशासन ने इस बिंदु को स्पष्ट रूप से समझा, जब उसने कोरियाई युद्ध के दौरान क्रेमलिन की सोवियत पायलटों की गुप्त तैनाती को सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं करने का फैसला किया। इसके अलावा, सार्वजनिक रूप से उजागर की जाने वाली खुफिया सूचना में अक्सर आंतरिक और वर्गीकृत आकलन की बारीकियों का अभाव होता है। यह सूचना आम तौर पर खुफिया और प्रासंगिक विचारों की सीमाओं से अपरिचित जनता तक पहुंच जाती है। दोनों ही मामलों में, जब जटिल परिघटनाओं पर प्रकट आकलन को आंशिक या पूर्ण रूप से ‘‘गलत’’ माना जाता है, तो जिम्मेदार एजेंसियों और नीति निर्माताओं की विश्वसनीयता धूमिल हो सकती है। खुफिया सूचना न केवल अक्षम, बल्कि लालची या भ्रष्ट भी दिखाई दे सकती है। सामूहिक विनाश के इराकी हथियारों (डब्ल्यूएमडी) पर ‘‘डोडी डोजियर’’ की विरासतब्रिटेन के लिए एक काली छाया बनी हुई है। सार्वजनिक और निजी तौर पर पहुंचे निष्कर्ष भी संरेखित होने चाहिए। यह उन नीति निर्माताओं के लिए उचित नहीं है, जो दुश्मनों को दोषी ठहराने, अपने कार्यों को सही ठहराने और भागीदारों को भविष्य के संकटों में उनके साथ जाने के लिए राजी करने के लिए खुफिया जानकारी का उपयोग करने की उम्मीद करते हैं। जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता की रक्षा के लिए खुफिया एजेंसियों को सावधान रहना चाहिए। इसी तरह, मीडिया बिचौलियों और सार्वजनिक उपभोक्ताओं को समान रूप से इस तरह के खुफिया-नेतृत्व वाले संचार को सावधानीपूर्वक, आलोचनात्मक नजर से देखने की जरूरत है।

Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


अन्य न्यूज़