Yes Milord: 3 Idiots वाले 'फुंसुक वांगडू' जेल से बाहर आएंगे? CJI का गजब का फैसला

सिब्बल ने खुदीराम दास के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अदालत का कर्तव्य है कि वह स्वयं को संतुष्ट करे कि कानून द्वारा प्रदान की गई सभी सुरक्षा-व्यवस्थाओं का पूरी निष्ठा से पालन किया गया है और किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से केवल संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के आधार पर ही वंचित किया जा सकता है।
साल 2009 में आई फिल्म 3 इडियट्स तो हर किसी ने देखी होगी। ‘सक्सेस नहीं, एक्सीलेंस के पीछे भागो’ वाला नारा देने वाला लीड किरदार फुंसुक वांगडू को भला कौन भुला सकता है। आमिर खान द्वारा निभाया गया फुंसकुक वांगडू का किरदार लद्दाख के सोनम वांगचुक से प्रेरित था। वहीं सोनम वांगचुक जो इस वक्त बीते 100 दिनों से ज्यादा वक्त से जेल में हैं। लद्दाख हिंसा में गिरफ्तार हुए सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 8 जनवरी को सुनवाई हुई। यह सुनवाई वांगचुक की गिरफ़्तारी के लगभग 4 महीने बाद हुई है। जिस दौरान कई दलीलें पेश की गई। वांगचुक के वकील ने कई आरोप भी लगाए। तो वहीं सुनवाई की तारीख भी टाल दी गई। तो और क्या कुछ हुआ इस मामले में सुनवाई के दौरान और कब होगी इस मामले में अगली सुनवाई?
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कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या कहा
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 8 जनवरी को सुनवाई हुई। जिस दौरान वांगचुक की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा सोनम को हिरासत में लेने के आधार 28 दिन के बाद बताए गए जो कानूनी समय सीमा का साफ उल्लंघन है उन्हें 29 सितंबर को डिटेंशन ऑर्डर और हिरासत के अधूरे आधार दिए गए थे। घटना के सबूत वाले चार वीडियो 29 तारीख को नहीं दिए गए थे। पुलिस ने वीडियो के लिंक दिए और हिरासत में लेने के आधार बताए। 5 अक्टूबर को एक लैपटॉप दिया गया। लेकिन 29 तारीख को दी गई पेनड्राइव में वह चार वीडियो नहीं थे। कानून कहता है कि अगर भरोसेमंद दस्तावेज जिसके आधार पर हिरासत ली गई है अगर उन्हें सप्लाई नहीं किया जाता तो हिरासत का आदेश रद्द हो जाता है।
गांधी ने भी ऐसा ही किया था
सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में यह बात कही है। कपिल सिब्बल ने कोर्ट को सोनम वांगचुक के भाषण का वीडियो दिखाते हुए आगे कहा कि आपको याद होगा कि गांधी ने भी ऐसा ही किया था। जब चौरीचौरा कांड के बाद हिंसा हुई थी तब उन्होंने भी बिल्कुल वैसा ही किया था। सोनम वांगचू के भाषण का लहजा किसी भी तरह से राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है। बता दें इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।
वांगचुक के डिटेंशन पर SC में सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. गीतांजली अंग्मो की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई की। याचिका में उन्होंने अपने पति और लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी है। लद्दाख में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सोनम को हिरासत में लिया गया था। जस्टिस अरविंद कुमार की कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। सिब्बल ने खुदीराम दास के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अदालत का कर्तव्य है कि वह स्वयं को संतुष्ट करे कि कानून द्वारा प्रदान की गई सभी सुरक्षा-व्यवस्थाओं का पूरी निष्ठा से पालन किया गया है और किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से केवल संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के आधार पर ही वंचित किया जा सकता है।
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