कारगिल दिवस पर योगी आदित्यनाथ ने यूपी के शहीदों के माता-पिता का किया सम्मान

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जुलाई 26, 2021   18:14
कारगिल दिवस पर योगी आदित्यनाथ ने यूपी के शहीदों के माता-पिता का किया सम्मान

उत्तर प्रदेश के पांच सैनिक कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। हम उनको नमन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा देश कारगिल युद्ध में शहीद हुए जांबाजों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। लखनऊ में भी पांच बलिदानियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान किया।

लखनऊ। कारगिल विजय दिवस पर आज 26 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीदों को नमन करते हुए उनकी प्रतिमाओं पर पुष्पाजलि भी की। योगी आदित्यनाथ ने कारगिल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के अलावा कैप्टन मनोज पांडेय के पिता गोपीचंद पांडेय, मेजर रीतेश शर्मा के पिता सत्यप्रकाश शर्मा और सुनील जंग की मां बीना महत को भी सम्मानित भी किया। लखनऊ में शहीद स्मारक के सामने कारगिल स्मृति वाटिका में शहीदों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कारगिल विजय दिवस की आज 22वीं जयंती पर हम सेना के जवानों की शहादत पर उनको नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि यह दिवस भारत की फौज की बहादुरी और संयम का प्रतीक है। हमारी फौज के पराक्रम को पूरी दुनिया ने देखा है।

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सीएम ने कहा कि इसी बहादुर फौज के साथ भारत मजबूती के साथ अपनी सीमा की सुरक्षा करने में सफल है। आज हम लोग शहीदों के बलिदान के कारण ही सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि हमको गर्व है कि हमको शहीदों के स्वजन के साथ कुछ क्षण रहने के साथ ही उनको सम्मानित करने का मौका मिला है। उत्तर प्रदेश के पांच सैनिक कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। हम उनको नमन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा देश कारगिल युद्ध में शहीद हुए जांबाजों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। लखनऊ में भी पांच बलिदानियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान किया। भारत माता के महान सपूत, वीर जवानों की सतर्कता , राष्ट्र की रक्षा के लिए उनके समर्पण और अदभुत बलिदान के कारण हम सब न केवल स्वाधीनता का अनुभव करते हैं बल्कि सुरक्षित माहौल में चैन से गुजर बसर भी करते हैं। शहीद की मौत ही कौम की जिंदगी होती है। कारगिल युद्ध मई 1999 में पड़ोसी राष्ट्र के द्वारा एक साजिश के तहत देश पर थोपा गया था। कारगिल की चोटियों पर दुश्मन देश ने कब्जा कर लिया। जिससे भारतीय जवानों को वहां से आसानी से निशाना बनाया जा सके, लेकिन विषम हालात में भी दो से ढाई महीने में भारतीय जवानों ने उनको खदेड़ दिया गया था।





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