Jawahar Lal Nehru Death Anniversary: देश के First PM का Farmer's March से लेकर 17 साल के शासन तक का पूरा Political सफर

आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का 27 मई को निधन हो गया था। वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने करीब 17 साल तक देश की कमान संभाली थी। उनको देश में औद्योगिक ढांचा खड़ा करने के लिए जाना जाता है।
आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का 27 मई को निधन हो गया था। वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने करीब 17 साल तक देश की कमान संभाली थी। पंडित नेहरू को देश में औद्योगिक ढांचा खड़ा करने के लिए जाना जाता है। वहीं इस बात की जानकारी बहुत कम लोगों को है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश में पहला किसान मार्च निकाला था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर पंडित जवाहर लाल नेहरू के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
इलाहाबाद में 14 नवंबर 1889 को जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू और मां का नाम स्वरूपरानी था। पिता पेशे से वकील थे। उन्होंने स्कूली शिक्षा हैरो और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज लंदन से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली।
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कांग्रेस से जुड़े
जवाहर लाल नेहरू, गांधी जी से प्रभावित रहे और साल 1912 में कांग्रेस से जुड़े। वहीं साल 1920 के प्रतापगढ़ के पहले किसान मोर्चे को संगठित करने का श्रेय पंडित नेहरू को जाता है। साल 1928 में लखनऊ में साइमन कमीशन के विरोध में पंडित नेहरू घायल हुए और साल 1930 के नमक आंदोलन में गिरफ्तार हुए थे। इस दौरान वह करीब 6 महीने जेल में रहे। पंडित नेहरू ने कुल 9 बार जेल यात्राएं की।
पंडित नेहरू ने 6 बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद को सुशोभित किया था। साल 1942 के 'भारत छोड़ो' आंदोलन में पंडित नेहरू 09 अगस्त 1942 को गिरफ्तार हुए और इस दौरान वह अहमदनगर जेल में रहे। वहां से 15 जून 1945 को वह रिहा हुए थे।
देश के पहले प्रधानमंत्री
साल 1947 में भारत की आजादी के बाद जब भावी पीएम के लिए कांग्रेस में मतदान हुआ, तो सरदार वल्लभभाई पटेल और आचार्य कृपलानी को सबसे ज्यादा वोट मिले थे। लेकिन महात्मा गांधी के कहने पर दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया और पंडित नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया। पंडित नेहरू के कार्यकाल में राष्ट्र और संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्थायी भाव प्रदान करना, लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना और योजनाओं के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु करना आदि मुख्य उद्देश्य रहा।
पंडित जवाहर लाल नेहरू पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार नहीं कर सके। हालांकि उन्होंने चीन की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाया। लेकिन साल 1962 में चीन ने धोखे से आक्रमण कर दिया। जोकि पंडित नेहरू के लिए बड़ा झटका था।
मृत्यु
वहीं 27 मई 1964 को पंडित जवाहर लाल नेहरू का दिल का दौरा पड़ने की वजह से मौत हो गया थी।
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