Chaudhary Charan Singh Death Anniversary: पहले गैर-कांग्रेसी CM से PM तक, ऐसा था Chaudhary Charan Singh का सियासी सफर

Chaudhary Charan Singh
ANI
Ananya Mishra । May 29 2026 1:19PM

देश के 5वें प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह का 29 मई को निधन हो गया था। उन्हें मुख्य रूप से किसानों के अधिकारों और भूमि सुधारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया।

आज ही के दिन यानी की 29 मई को देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का निधन हो गया था। चौधरी चरण सिंह सादगी पसंद व्यक्ति थे और उनको किसानों का मसीहा कहा जाता था। उन्होंने भारत के 5वें प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। उन्हें मुख्य रूप से किसानों के अधिकारों और भूमि सुधारों के लिए जाना जाता है। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर चौधरी चरण सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

हापुड़ में नूरपुर गांव में जाट परिवार में 23 दिसंबर 1902 को चौधरी चरण सिंह का जन्म हुआ था। आगरा विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई कर अपने करियर की शुरूआत वकालत से की थी। लेकिन बाद में उन्होंने गांधी जी के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और फिर राजनीति में प्रवेश लिया। चौधरी चरण सिंह आजादी से पहले दो बार जेल गए थे। वहीं साल 1937 के चुनावों में चौधरी चरण सिंह यूनाइटेड प्रोविंस की लेजिस्लेटिव एसेंबली के सदस्य भी रहे।

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सियासी सफर

जब भी चौधरी चरण सिंह के राजनीतिक सफर का जिक्र किया जाता है, तो आपातकाल के बाद के समय का होता है। लेकिन वह बहुत पहले ही किसानों की आवाज बन चुके थे। देश की आजादी से पहले भी चौधरी चरण सिंह किसानों और मजदूरों के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाते थे। वह किसानों की समस्या सुनकर द्रवित हो उठते थे।

कांग्रेस के साथ

साल 1951 में वह यूपी कैबिनेट में न्याय एवं सूचना मंत्री बने। फिर साल 1967 तक वह राज्य कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे। इसके साथ ही साल 1959 के नागपुर कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने पंडित नेहरू तक का विरोध करने से गुरेज नहीं किया। इस समय तब वह उत्तर भारत के किसानों के आवाज बन चुके।

साल 1967 में उन्होंने कांग्रेस से खुद को अलग कर लिया था। चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। वह जनता गठबंधन से जुड़े, जिसमें उनका दल भारतीय लोकदल सबसे बड़ा घटक था। लेकिन साल 1974 तक वह गठबंधन से अलग-थलग हो गए थे। फिर जब जयप्रकाश नारायण ने मोरारजी देसाई को पीएम चुना तो चौधरी चरण सिंह निराश हुए। हालांकि इस सरकार में वह उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे। 

वहीं कांग्रेस के समर्थन से साल 1979 में चौधरी चरण सिंह भारत के 5वें प्रधानमंत्री बने। लेकिन कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के कारण साल 1980 में उनको इस्तीफा देना पड़ा। माना जाता है कि कांग्रेस के समर्थन के साथ प्रधानमंत्री बनना चौधरी चरण सिंह के छवि को धूमिल कर गया था। लेकिन उन्होंने अपनी जमीन नहीं छोड़ी और वह हमेशा अपने क्षेत्र के लोकप्रिय नेता बने रहे। पीएम पद से इस्तीफा देने के बाद भी वह साल 1987 तक लोकसभा में लोकदल का प्रतिनिधित्व करते रहे और किसानों की आवाज बने रहे।

मृत्यु

वहीं 29 मई 1987 को 84 साल की उम्र में चौधरी चरण सिंह का निधन हो गया था।

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