Jagjit Singh Death Anniversary: बेटे की मौत से टूट गए थे गजल सम्राट जगजीत सिंह, संगीत को मिली नई पहचान

Jagjit Singh
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गजल सम्राट कहे जाने वाले जगजीत सिंह का 10 अक्तूबर को निधन हो गया था। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आज भी लोग उनकी गजलों को सुनना और गुनगुनाना पसंद करते हैं। वह अपनी गजलों के जरिए लाखों लोगों के दिलों पर राज किया।

आज ही के दिन यानी की 10 अक्तूबर को गजल सम्राट कहे जाने वाले जगजीत सिंह का निधन हो गया था। जगजीत सिंह ने अपनी गजलों के जरिए लाखों लोगों के दिलों पर राज किया। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आज भी लोग उनकी गजलों को सुनना और गुनगुनाना पसंद करते हैं। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर गजल किंग जगजीत सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

राजस्थान के श्री गंगानगर में 8 फरवरी 1941 को जगजीत सिंह का जन्म हुआ था। इनका पहले नाम जगजीवन सिंह था और बाद में उन्होंने इसको जगजीत सिंह कर लिया था। उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से इतिहास में एमए की पढ़ाई शुरू की थी। वहीं करीब 2 साल तक इसकी कक्षाओं में जाने के बाद भी इसको कभी पूरा नहीं किया।

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ऑल इंडिया रेडियो में गाने की शुरूआत

साल 1961 में अपने करियर की शुरूआत ऑल इंडिया रेडियो में गाने से की थी। उन्होंने संगीत की शुरूआती शिक्षा पंडित छगन लाल शर्मा और उस्ताद जमाल खान से ली थी। फिर साल 1965 में वह अपने परिवार को बिना बताए मुंबई आ गए थे। काफी संघर्ष करने के बाद उनको हिंदी सिनेमा में गाने का मौका मिला। साल 1967 में जब जगजीत सिंह काम की खोज कर रहे थे, तो इस दौरान उनकी मुलाकात चित्रा दत्त से हुई थी। हालांकि उस दौरान चित्रा शादीशुदा थीं।

बेटे की मौत का सदमा

हालांकि इसके बाद भी दोनों एक-दूसरे को दिल दे बैठे। जगजीत और चित्रा एक साथ कॉन्सर्ट करते थे। फिर साल 1980 तक वह गजल किंग बन चुके थे। प्राइवेट एल्बम के साथ जगजीत सिंह ने कई फिल्मों में भी कई गजलें गाईं। इनमें प्रेम गीत, अर्थ, जिस्म, जॉगर्स पार्क, तुम बिन जैसी फिल्में शामिल हैं। जगजीत और चित्रा का एक बेटा विवेक हुआ। लेकिन विवेक की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस घटना ने जगजीत और चित्रा को अंदर तक तोड़ दिया था।

इस घटना के बाद जगजीत सिंह संगीत की दुनिया से दूर हो जाना चाहते थे। कई महीनों तक जगजीत ने कोई गाना नहीं गाया था। धीरे-धीर संगीत की दुनिया में जगजीत सिंह ने फिर वापसी की। सीने में बेटे की मौत का सदमा दबाए बैठे जगजीत सिंह ने जब वह गजल की दुनिया में वापस लौटे, तो उनकी आवाज में किसी को खोने का दर्द पहले से काफी ज्यादा था। लेकिन पत्नी चित्रा ने बेटे की मौत से दुखी होकर उन्होंने अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी।

सम्मान

भारत सरकार द्वारा जगजीत सिंह को साल 2003 में 'पद्म भूषण' के सम्मान से नवाजा गया था।

मृत्यु

वहीं साल 2011 में यूके में जगजीत सिंह को गुलाम अली के साथ परफॉर्म करना था। लेकिन 23 सितंबर 2011 को ब्रेन हैमरेज के कारण जगजीत सिंह को मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। वहीं करीब 2 सप्ताह तक वह कोमा में रहे और उनकी हालत बिगड़ती चली गई। वहीं 10 अक्तूबर 2011 को जगजीत सिंह ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।

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