Vinoba Bhave Birth Anniversary: काशी से Wardha तक, जानिए कैसे विनायक भावे बने भूदान आंदोलन के Saint Vinoba

स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक नेता विनोबा भावे का 11 सितंबर को जन्म हुआ था। उनको भूदान आंदोलन से पूरी दुनिया में बड़ी पहचान मिली थी। विनोबा भावे को गांधी के उत्तराधिकारी के रूप में भी जाना जाता है।
आज ही के दिन यानी की 11 सितंबर को विनोबा भावे का जन्म हुआ था। विनोबा भावे महात्मा गांधी की विरासत को आगे ले जाने का काम करते दिखाई दिए। वह एक स्वतंत्रता सेनानी होने के अलावा प्रसिद्ध गांधीवादी समाज सुधारक नेता भी थे। विनोबा भावे को भूदान आंदोलन से पूरी दुनिया में बड़ी पहचान मिली थी। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर विनोबा भावे के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
महाराष्ट्र के कोंकण इलाके के गागोदा गांव में 11 सितंबर 1895 को विनोबा भावे का जन्म हुआ था। इनका असली नाम विनायक नरहरि भावे था। यह ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे। इनकी मां रुकमणी बाई एक विदूषी महिला थीं। वहीं विनोबा भावे पर अपनी मां का गहरा प्रभाव था। विनोबा को अपनी मां से ही ईश्वर के प्रति आस्था और आध्यात्म के प्रति झुकाव मिला था। वहीं पिता से विज्ञान, गणित और अलग विलक्षण सोच और तार्किता मिली थी।
आध्यात्मिक यात्रा
विनोबा भावे परीक्षा देने के लिए मुंबई जाने वाली रेलगाड़ी में तो बैठे, लेकिन उनका मन वैराग्य में रमा हुआ था। ऐसे में वह बीच में ही दूसरी गाड़ी में बैठकर आध्यात्मिक यात्रा पर हिमालय की ओर निकल पड़े। वह ज्ञान की तलाश में बहुत भटके। वह काशी में भी लंबे समय तक रहे। वहीं समाचार पत्रों में महात्मा गांधी के बारे में पढ़कर उनको ऐसा लगा कि गांधीजी उनके लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं। उस दौरान महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से लौटे थे। उन्होंने महात्मा गांधी को पत्र लिखा और जवाब में आमंत्रण मिलने पर वह फौरन अहमदाबाद रवाना हो लिए।
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गांधीजी से मुलाकात
महात्मा गांधी और विनोबा भावे की पहली मुलाकात 07 जून 1916 में हुई थी। दोनों ही पहली मुलाकात के बाद एक-दूसरे के मुरीद हो गए। इसके बाद विनोबा भावे ने खुद को महात्मा गांधी के आश्रम के लिए समर्पित कर दिया। जब गांधीजी को लगा कि वह अहमदाबाद या कहीं और कितना भी बड़ा आश्रम बना लें। देशभर में अहिंसक सैनिक तैयार नहीं हो सकेंगे। ऐसे में उन्होंने विनोबा भावे को वर्धा भेजा, जहां पर महाराष्ट्र धर्म नाम से मराठी में प्रकाशित होने वाली उनकी पत्रिका काफी लोकप्रिय हुई थी।
संत और आचार्य के रूप में जाने गए विनोबा भावे
देश की आजादी तक विनोबा भावे संत और आचार्य के रूप में पहचान मिली थी। महात्मा गांधी के निधन के बाद उन्होंने गांधीजी की विरासत को कायम रखा। लेकिन वह अपने स्वभाव के मुताबिक इसको आध्यात्मिक रूप से ही आगे बढ़ाते रहे। साल 1951 में महाराष्ट्र में भूदान आंदोलन ने विनोबा भावे को दुनियाभर में मशहूर कर दिया था। यह एक स्वैच्छिक सुधार आंदोलन था, जिसमें रचनात्मक कार्यों और विचारों के प्रयोग से सामाजिक स्तर पर बदलाव की कोशिश की गई। उन्होंने सर्वोदय समाज की स्थापना की और आजादी के बाद अपना जीवन वर्धा के ब्रह्म विद्या मंदिर आश्रम में गुजारा।
मृत्यु
वहीं 15 नवंबर 1982 को अन्न जल त्याग कर विनोबा भाने ने समाधि मरण को अपना लिया।
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