लोकतंत्र में लोक की आस्था का प्रमाण– बम्पर मतदान

राजनैतिक विश्लेषक बंगाल में बंपर मतदान के पीछे कई कारण बता रहे हैं जैसे कि मतदाता जागरूकता अभियानों में लगातार वृद्धि, महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी, बेहतर चुनाव प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही स्थानीय मुद्दों पर जागरुकता। बंगाल में एक बड़ा कारण जनमानस में राजनीतिक चेतना जाग्रत होना भी माना जा रहा है।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुआ अभूतपूर्व बम्पर मतदान लोकतंत्र में लोक की आस्था का प्रमाण है। यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। यह बताता है कि भारत के आम नागरिक का अपने संविधान, संवैधानिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर कितना अटूट विश्वास है। राजनैतिक दलों के लिए इस मतदान में क्या छुपा है वो तो 4 मई 2026 को ज्ञात होगा किन्तु जनता जनार्दन अपना कर्तव्य निभाने में जीत चुकी है।
राजनैतिक विश्लेषक बंगाल में बंपर मतदान के पीछे कई कारण बता रहे हैं जैसे कि मतदाता जागरूकता अभियानों में लगातार वृद्धि, महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी, बेहतर चुनाव प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही स्थानीय मुद्दों पर जागरुकता। बंगाल में एक बड़ा कारण जनमानस में राजनीतिक चेतना जाग्रत होना भी माना जा रहा है। कुछ लोग एसआईआर के कारन कम हुए मतदाताओं को ही इसका एकमात्र कारण बता रहे हैं जबकि कुछ लोग टीएमसी व बीजेपी द्वारा अपने-अपने मतदाताओं को मतदान केंद्रो तक पहुंचाने को भी महत्वपूर्ण कारण मान रहे हैं। चुनावी हिंसा के लिए कुख्यात पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव आयोग द्वारा सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं अतः भयमुक्त वातावरण स्वाभाविक रूप से यहाँ अधिक मतदान का एक कारण है। बंगाल में केंद्रीय सुरक्षा बलों के 2 लाख 40 हजार जवानों की तैनाती की गई है और अधिकतर सीटों पर मतदान शांत रहा है। पश्चिम बंगाल में रिकार्ड मतदान ने चुनावी मनोविज्ञान पूरी तरह से बदल दिया है और चुनावी सर्वे करने वाली संस्थाओं को भी हैरान कर दिया है।
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सभी के मन में यह प्रश्न है कि क्या भयमुक्त वातावरण में हुआ भारी मतदान बीजेपी के पक्ष में हो रहा है ? इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि बंगाल में भाजपा बहुत मजबूती से करो या मरो के जूनून से चुनाव लड़ रही है। स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा के चालीस स्टार प्रचारकों ने पूरे बिहार को मथ डाला है। ठेठ बंगाली में बोलती स्मृति ईरानी, भीड़ खींचती कंगना रानौत, लोगों का मन मोहती मैथिली के साथ साथ हिंदुत्व को धर देते योगी जी और हिमंता जी और फिर स्वयं गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी जी।
भाजपा इतने उत्साह में है कि उसकी ओर से पहले चरण के बाद ही घोषणा तो कर दी गई है कि महाजंगलराज का समापन हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिंतामुक्त होकर कोलकाता में हुगली नदी के किनारे समय बिता रहे हैं हुए और नौका विहार का आनंद लेते हुए फोटोग्राफी कर पूरी दुनिया को कोलकोता दर्शन करा रहे हैं। ये बात और है कि इससे बंगाल का चुनावी वातावरण गर्म हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मां गंगा का बंगालियों के जीवन में एक विशेष स्थान है, इसका जल एक प्राचीन सभ्यता की भावना को अपने साथ समेटे हुए है”। उन्होंने लिखा कि कोलकाता में मैंने हुगली नदी के तट पर कुछ समय बिताया यह मा गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अवसर था। हुगली के तट पर मैंने पश्चिम बंगाल के विकास और महान बंगाली लोगों की समृद्धि के लिए काम करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने यह भी बताया कि नौका विहार के दौरान उन्हें प्रसिद्ध विद्यासागर सेतु और हावड़ा ब्रिज को देखने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होने नाव की सवारी कराने वाले नाविक को गले लगाया। जब प्रधानमंत्री मोदी नाव की सवारी कर रहे थे उस समय नदी के तट पर हजारों की भीड़ एकत्र हो गई ओैर मोदी-मोदी के नारे लगाने लगी। प्रधानमंत्री मोदी का यह नौका विहार सोशल मीडिया पर खूब वायरल है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि अब भय जा रहा हे और भरोसा आ रहा है। पीएम मोदी ने एक अत्यंत विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि लंबे समय से बंगाल में परिवर्तन की जो लहर दिख रही थी पहले चरण के मतदान ने उस पर मुहर लगा दी है। पहले चरण के मतदान से बीजेपी की विजय का शखनाद हो चुंका है। पीएम मोदी ने अगले चरण के लिए कहा कि अब आपको अगले चरण में विजय पताका फहरानी है। उन्होंने कहा कि टीएमसी का दीया बुझने से पहले फड़फड़ा रहा है। बंगाल को फिर से अवसरों की भूमि बनाने के लिए टीएमसी से आजादी बहुत जरूरी है।
माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में जिन 152 सीटों पर मतदान संपन्न हो चुका है वहां भाजपा की स्थिति अच्छी थी किंतु अगला चरण भाजपा की अग्निपरीक्षा से कम नहीं है क्योकि इन 140 सीटों पर ममता बनर्जी की टीएमसी का व्यापक प्रभाव है। पिछली बार यहाँ पर टीएमसी ने 89 सीटें जीती थीं। अगर यह बात सही है कि बंगाल के प्रथम चरण के मतदान में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं ने एकजुट होकर टीएमसी को और हिंदू बाहुल्य सीटों में 65 प्रतिशत से अधिक हिंदू मतदाताओं ने भाजपा को मत दिया है और यही रुख अगले चरण में भी रहता है तो यह अधिक मतदान बंगाल में परिवर्तन के लिए ही है।
प्रथम चरण के मतदान के बाद ममता दीदी के पक्ष में केवल शिवसेना के संजय राउत ने बयान जारी कर कहा है कि बंपर मतदान एसआईआर के खिलाफ आक्रोश है जबकि राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता दबी जुबान से कुछ और ही बयान दे रहे हैं।
यद्यपि चुनाव पांच प्रान्तों में हो रहे हैं किन्तु पूरे भारतीय जनमासनस की दृष्टि बंगाल में अटकी है। भीषण गर्मी के बीच लगभग 93 प्रतिशत मतदान हो जाने के बाद भारतीय जनता पाटी और अधिक आक्रामकता के साथ प्रचार कर रही है। बंगाल के विधानसभा चुनावों में इस बार मुर्शिदाबाद और कुछ अन्य जगहों को छोड़कर कहीं और व्यापक हिंसा नहीं हुई। बंगाल के मतदाताओं ने मतदान केंद्रों पर जो बंपर उत्साह दिखाया है उसे ममता दीदी एसआईआर के खिलाफ जनता का आक्रोश बता रही हैं और पहली बार उन्होंने यह कह दिया है कि बीजेपी को कैसे पता कि वह बंगाल में जीत रही है क्या उन्होंने ईवीएम को फिक्स कर लिया है। यह बात तय हो गई है कि अगर 4 मई को बंगाल से ममता की सरकार जाती है तो वह चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली, एसआईआर और ईवीएम पर ही निशाना साधेंगी।
- मृत्युंजय दीक्षित
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