लद्दाख से कश्मीर तक... आसमान में दिखेगा Aurora Borealis का अद्भुत नजारा, जानें क्या है सही Time

सूर्य से आए एक विशाल सौर तूफान के चलते आज रात भारत के आसमान में नॉर्दर्न लाइट्स का अनोखा नजारा दिख सकता है। यह खगोलीय घटना लद्दाख और कश्मीर जैसे उत्तरी इलाकों में 8 जून की रात 11:30 से 2:30 के बीच दिखाई देगी, जहां यह सामान्य हरे रंग की बजाय लाल रंग में चमकेगी।
आज रात आपके पास एक ऐसा नजारा देखने का मौका है, जो भारत में शायद ही कभी देखने को मिला हो। दरअसल, आज यानी 8 जून को भारत के कुछ हिस्सों में 'नॉर्दर्न लाइट्स' (Northern Lights) या 'ऑरोरा बोरियालिस' (Aurora Borealis) दिखाई दे सकती है। आमतौर पर यह जादुई रोशनी स्विट्जरलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे जैसे ठंडे देशों में ही देखने को मिलती है, लेकिन अंतरिक्ष में आए एक बहुत बड़े और ताकतवर सौर तूफान की वजह से यह खूबसूरत कुदरती रोशनी आज रात भारत के आसमान में भी चमकने वाली है।
कब देखने को मिलेगा यह नजारा?
यह सौर तूफान सोमवार (8 जून) की आधी रात से ठीक पहले शुरू हो जाएगा। इसका सबसे शानदार और असरदार रूप आज रात 11:30 बजे से लेकर कल सुबह (9 जून) 2:30 बजे के बीच देखने को मिलेगा। इसलिए अगर आप इन जगहों पर हैं, तो आज रात आसमान पर नजर बनाए रखें।
कहां दिखेगा यह नजारा?
यह अनोखा नजारा भारत के केवल ऊंचे और पहाड़ी इलाकों में ही देखने को मिलेगा। कश्मीर के कुछ हिस्सों, उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी इलाकों या फिर लद्दाख की खूबसूरत पैंगोंग त्सो झील और हानले इलाके में रहने वाले लोग भारत के उन चुनिंदा खुशकिस्मत लोगों में से होंगे, जो इस जादुई नजारे को लाइव देख पाएंगे।
क्या दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी दिखेगा?
अगर आप दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई या कोलकाता जैसे बड़े मेट्रो शहरों में रहते हैं, तो आपके लिए थोड़ी निराशाजनक खबर है। इन शहरों में बहुत ज्यादा लाइट पॉल्यूशन होता है और ग्लोब पर इन शहरों की लोकेशन ऐसी है कि यहां से इस रोशनी का दिखाई देना नामुमकिन है।
क्या है यह 'ऑरोरा' और यह कैसे बनता है?
आसान शब्दों में कहें तो यह अंतरिक्ष में होने वाला एक पूरी तरह से नेचुरल लाइट शो है। सूरज से उठने वाले तूफान के कारण बहुत सारे चार्ज्ड कण (जिन्हें आयन कहते हैं) अंतरिक्ष में फैल जाते हैं। जब ये कण पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड को पार करके हमारे वायुमंडल में दाखिल होते हैं, तो यहां मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन गैसों के एटम्स से टकराते हैं। इस टकराव से एक एनर्जी पैदा होती है, जो आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी के रूप में चमकती है। इसी को ऑरोरा कहते हैं।
इसे 'नॉर्दर्न लाइट्स' क्यों कहते हैं?
यह घटना ज्यादातर पृथ्वी के उत्तरी हिस्से में उत्तरी ध्रुव के पास होती है, इसीलिए इसे 'नॉर्दर्न लाइट्स' कहा जाता है। यह आमतौर पर कनाडा, अलास्का, आइसलैंड और नॉर्वे जैसे देशों में दिखती है। वैज्ञानिक भाषा में इसे 'ऑरोरा बोरियालिस' कहते हैं। ठीक ऐसी ही रोशनी जब पृथ्वी के निचले यानी दक्षिणी हिस्से में दिखती है, तो उसे 'ऑरोरा ऑस्ट्रालिस' या 'सदर्न लाइट्स' कहा जाता है।
भारत में यह किस रंग का दिखेगा?
आमतौर पर लोग टीवी या सोशल मीडिया पर हरे रंग की नॉर्दर्न लाइट्स देखते हैं, लेकिन भारत में यह गहरे लाल रंग की दिखाई देगी। इसका कारण यह है कि भारत उत्तरी ध्रुव से काफी दूर है। भारत से लोग आसमान के जिस हिस्से को देख पाएंगे, वहां ऑक्सीजन के एटम्स सूरज की ऊर्जा से सीधे टकराते हैं और उस ऊंचाई पर होने वाले टकराव से लाल रंग की रोशनी पैदा होती है।
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