पूर्व प्रधानमंत्री HD Deve Gowda ने आलेख लिख कर बताया PM Modi की सफलता का राज, नेहरू और मोदी की तुलना करते हुए कह गये बड़ी बात

Modi Devegowda
ANI

अपने आलेख में देवेगौड़ा बताते हैं कि जब नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे, तब परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत, महात्मा गांधी का नैतिक प्रभाव और कांग्रेस का व्यापक प्रभुत्व उनके साथ था। उस समय विपक्ष बेहद कमजोर था और चुनावी प्रतिस्पर्धा सीमित थी।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, कार्यशैली और राजनीतिक यात्रा पर अपने विचार रखते हुए कहा है कि मोदी की सबसे बड़ी विशेषता उनका आत्मचिंतनशील स्वभाव है। मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के अवसर पर लिखे गये अपने आलेख में देवेगौड़ा ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी केवल लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि वह ऐसे जननेता हैं जिन्होंने बदलते भारत की आकांक्षाओं, चुनौतियों और लोकतांत्रिक चेतना को समझते हुए स्वयं को समय के अनुरूप ढाला है।

देवेगौड़ा लिखते हैं कि नरेंद्र मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बन चुके हैं। इस उपलब्धि ने जवाहरलाल नेहरू का पुराना कीर्तिमान पीछे छोड़ दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और जीवंतता का प्रमाण भी है।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली अग्निकाडों के हादसों की राजधानी बनी

अपने आलेख में वह बताते हैं कि जब नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे, तब परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत, महात्मा गांधी का नैतिक प्रभाव और कांग्रेस का व्यापक प्रभुत्व उनके साथ था। उस समय विपक्ष बेहद कमजोर था और चुनावी प्रतिस्पर्धा सीमित थी। 1952 के पहले आम चुनाव में केवल कुछ ही दल मैदान में थे और मतदाताओं की संख्या भी अपेक्षाकृत कम थी।

इसके विपरीत नरेंद्र मोदी ने ऐसे दौर में राजनीति की जब देश का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्वरूप पूरी तरह बदल चुका था। अब लोकतंत्र अधिक जागरूक, प्रश्न पूछने वाला और प्रतिस्पर्धी हो गया है। मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार और फिर 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री पद प्राप्त किया। देवेगौड़ा के अनुसार यह उपलब्धि साधारण नहीं है, क्योंकि आज का मतदाता अधिक सजग और अपेक्षाओं से भरा हुआ है।

अपने आलेख में देवेगौड़ा इस बात पर भी जोर देते हैं कि पहले के प्रधानमंत्रियों को जो सामाजिक और राजनीतिक आधार सहज रूप से मिल जाता था, वह मोदी जैसे नेताओं को नहीं मिला। न तो वह किसी राजनीतिक वंश से आए और न ही उनके पास कोई पारिवारिक विरासत थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, संगठन क्षमता और जनता से सीधे संवाद के बल पर स्वयं को स्थापित किया।

देवेगौड़ा अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि उनका स्वयं का प्रधानमंत्री कार्यकाल बहुत छोटा रहा, इसलिए वह यह देखकर आश्चर्य करते हैं कि नरेंद्र मोदी लगातार लंबे समय तक जनता का विश्वास बनाए रखने में कैसे सफल रहे? उनके अनुसार इसका उत्तर मोदी की अद्भुत ऊर्जा, अनुशासन और निरंतर आत्ममंथन में छिपा है।

देवेगौड़ा के आलेख में नेहरू और मोदी के समय के बीच सामाजिक बदलावों की तुलना भी की गई है। देवेगौड़ा लिखते हैं कि नेहरू के समय मंत्रिमंडल में समाज के विभिन्न वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं था। उस दौर में ऊंची जातियों का वर्चस्व अधिक दिखाई देता था। इसके विपरीत मोदी के मंत्रिमंडल में पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं की भागीदारी अधिक दिखाई देती है। इसे वह आधुनिक भारत की सामाजिक विविधता का प्रतिबिंब मानते हैं।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर भी देवेगौड़ा ने मोदी सरकार की सराहना की है। उनका कहना है कि संसद और राजनीति में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में जो प्रयास हुए हैं, वह भारत को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

देवेगौड़ा के अनुसार आज का भारत नेहरू काल के भारत से बहुत अलग है। अब नागरिक अधिक शिक्षित, जागरूक और अधिकारों के प्रति सजग हैं। सामाजिक न्याय, पर्यावरण, महिला अधिकार और नागरिक अधिकार जैसे विषयों पर समाज में गहरी चर्चा होती है। ऐसे समय में शासन चलाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है। अपने आलेख में वह विशेष रूप से यह भी कहते हैं कि आज के नेताओं को चौबीसों घंटे सोशल मीडिया और समाचार चैनलों की आलोचना का सामना करना पड़ता है। कभी कभी आलोचना कठोर और व्यक्तिगत भी हो जाती है। फिर भी नरेंद्र मोदी लगातार जनता के बीच सक्रिय बने हुए हैं और आलोचनाओं से घबराने की बजाय स्वयं को जनता के सामने खुला रखते हैं।

अपने आलेख में देवेगौड़ा ने मोदी की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक दृष्टि का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा है कि मोदी ने भारत को तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाने का प्रयास किया है। साथ ही राष्ट्रीय हितों की रक्षा के मामले में उन्होंने दृढ़ता दिखाई है। उन्होंने लिखा है कि सैन्य संघर्षों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के समय उनका निर्णयात्मक नेतृत्व स्पष्ट रूप से सामने आया। पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा यह भी कहते हैं कि मोदी केवल प्रशासनिक प्रमुख नहीं हैं, बल्कि वह जनता से भावनात्मक जुड़ाव रखने वाले नेता हैं। अपने रेडियो संवाद, तकनीक के उपयोग और सीधे संपर्क के माध्यम से उन्होंने समाज के हर वर्ग तक पहुंचने का प्रयास किया है।

अपने आलेख के अंत में देवेगौड़ा निष्कर्ष देते हैं कि नरेंद्र मोदी की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका आत्मचिंतनशील स्वभाव है। वह निरंतर स्वयं का मूल्यांकन करते रहते हैं, जनता की अपेक्षाओं को समझते हैं और बदलते समय के अनुसार अपने कार्य और दृष्टिकोण में सुधार करते रहते हैं। यही गुण उन्हें लंबे समय तक जनविश्वास प्राप्त कराने में सबसे अधिक सहायक बना है।

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
All the updates here:

अन्य न्यूज़