Japanese Yen Crash: 1986 के बाद सबसे निचले स्तर पर मुद्रा, Satsuki Katayama ने दिए Currency Market में दखल के संकेत

Satsuki Katayama
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Ankit Jaiswal । Jul 24 2026 8:57PM

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिकी ब्याज दरों में स्थिरता की संभावनाओं ने डॉलर को मजबूत किया है, जिससे जापानी येन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि केवल जापान का व्यक्तिगत हस्तक्षेप सीमित प्रभावी हो सकता है, फिर भी सरकार मुद्रा के अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए हर संभव निर्णायक कदम उठाने को तैयार है। जापानी मुद्रा संकट, डॉलर बनाम येन और वैश्विक तेल कीमतों का प्रभाव इस आर्थिक घटनाक्रम के मुख्य कारक हैं।

जापान की मुद्रा येन में लगातार आ रही कमजोरी ने वहां की सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कतायामा ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि यदि हालात की मांग हुई तो सरकार विदेशी मुद्रा बाजार में बिना किसी देरी के उचित और निर्णायक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार पूरे सप्ताह यही संदेश दोहराती रही है ताकि बाजार को यह संकेत मिल सके कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

बता दें कि शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले येन की कीमत लगभग 163.96 तक पहुंच गई, जो वर्ष 1986 के बाद सबसे कमजोर स्तरों में से एक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण निवेशकों का रुझान डॉलर की ओर बढ़ा है, जिसका सीधा असर जापानी मुद्रा पर पड़ा है।

वित्त मंत्री सात्सुकी कतायामा ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब भी आवश्यकता होगी, सरकार विदेशी मुद्रा बाजार में उचित कार्रवाई करेगी और किसी भी फैसले में हिचकिचाएगी नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जापान और अमेरिका दोनों इस बात पर सहमत हैं कि विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं होता है। उनके अनुसार दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में रहते हैं और हर समय स्थिति की समीक्षा करते रहते हैं।

गौरतलब है कि अमेरिकी वित्त विभाग ने भी अपनी हालिया मुद्रा रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों का अंतर पहले की तुलना में कम होने के बावजूद येन लगातार कमजोर बना हुआ है। रिपोर्ट में विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को लेकर चिंता भी जताई गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका फिर तेज हुई है। इसके चलते निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है या उनमें और बदलाव कर सकता है। यही कारण है कि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और येन पर दबाव बढ़ रहा है।

अर्थशास्त्री मासातो कोइके का मानना है कि यदि जापान अकेले विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप भी करता है तो उसका असर सीमित रह सकता है, क्योंकि मौजूदा कमजोरी का मुख्य कारण डॉलर की मजबूती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति भी बन सकती है जिसमें सरकार हस्तक्षेप न करे और येन में गिरावट आगे भी जारी रहे। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर जापान सरकार के अगले कदम और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर टिकी हुई हैं।

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