ट्विन टॉवर तो ढह गये, पर इसे बनाने वाले लोगों पर कब होगी कार्रवाई?

Supertech Twin Towers
ANI
आपको बता दें कि सुपरटेक बिल्डर को एमराल्ड कोर्ट के लिए इस जमीन का आवंटन 23 नवंबर 2004 को हुआ था, जिसका मानचित्र वर्ष 2006 में पास हुआ था, जिसके बाद से इस प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचारियों के गठजोड़ के दम पर तरह-तरह के तिकड़मबाजी के खेल शुरू हो गये थे।

उत्तर प्रदेश का नोएडा एक बार फिर देश-दुनिया की मीडिया की जबरदस्त सुर्खियों में चल रहा है, इस बार चर्चा के केन्द्रबिंदु में एक गगनचुंबी इमारत है। हालांकि अब भ्रष्टाचारियों के गठजोड़ की मजबूत नींव पर खड़ी हुई इस इमारत को ध्वस्त कर दिया गया है, यह गगनचुंबी इमारत कभी सुपरटेक बिल्डर की सल्तनत का एक बेहद अहम हिस्सा थी। यहां आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-93 ए में बेहद पॉश ढंग से सुपरटेक बिल्डर का एमराल्ड कोर्ट नामक एक विशाल प्रोजेक्ट है, जिसमें से अवैध रूप से बने गगनचुंबी ट्विन टॉवर एपेक्स और सियान को 28 अगस्त की दोपहर 2:30 बजे चंद सेकेंडों के दरम्यान अपने पूर्व निर्धारित तय कार्यक्रम के अनुसार सफलतापूर्वक जमींदोज कर दिया गया हैं।

लेकिन नोएडा की यह इमारत भ्रष्टाचार की एक बड़ी प्रतीक बनकर अपने पीछे अब बहुत सारे सवाल छोड़ गयी है। वर्ष 2012 से चली एक बहुत लंबी कानूनी जंग के बाद देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश के अनुपालन में भ्रष्टाचार के गठजोड़ का बड़ा प्रतीक बन चुके सुपरटेक बिल्डर के इन ट्विन टॉवर्स को तमाम बाधाओं को दूर करते हुए आखिरकार 28 अगस्त रविवार को ध्वस्त कर ही दिया गया है। हालांकि देश की ताकत का मुख्य केंद्र राजधानी दिल्ली के पास में इस तरह का यह अनोखा पहला मामला है। पहली बार देश की सर्वोच्च अदालत से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर इतनी बड़ी इमारत को गिराया गया है। हालांकि टीआरपी की जंग में देश के बहुत सारे न्यूज़ चैनल इस मसले को सनसनीखेज बनाने के लिए बेहद चतुराई के साथ पूरे देश का पहला मामला बताकर लोगों में जिज्ञासा पैदा करने का कार्य कर रहे हैं, जो सरासर झूठ है।

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आपको बता दें कि भारत में इस तरह से कोई बहुमंजिला इमारत पहली बार ध्वस्त नहीं की गयी है, इससे पहले भी दो वर्ष पूर्व वर्ष 2020 के जनवरी माह में भ्रष्टाचार के दम पर बनी केरल के मराडू में ऊंची बहुमंजिला इमारतों एच 20 होली फेथ, अल्फा सेरेन, जैन कोरल कोव और गोल्डन कयालोरम को गिराया गया था। वर्ष 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने झील के तट पर बनी इन सभी विशाल बहुमंजिला इमारतों को गिराने आदेश दिया था। झील के किनारे बनी इन सभी इमारतों के निर्माण में भी भ्रष्टाचार के दम पर देश के 'तटीय नियमन क्षेत्र' के प्रावधानों की जमकर धज्जियां उड़ाई गयी थीं। उस वक्त भी कुछ पैसे वाले ताकतवर लोगों ने सिस्टम को अपनी जेब में रखने का दुस्साहस किया था। वही स्थिति नोएडा में सुपरटेक बिल्डर ने ट्विन टॉवर के निर्माण के वक्त करने का कार्य किया था, बिल्डर ने धनबल के बलबूते पर अधिकारियों व चंद राजनेताओं के साथ गठजोड़ करके इस बड़े अवैध निर्माण करने के मंसूबे को धरातल पर साकार करने कार्य बेहद सफलता पूर्वक लगभग पूरा कर ही लिया था, यह तो अंतिम समय में अहंकार व दुस्साहस के चलते इस मामले की पोल खुल गई और ट्विन टॉवर्स का यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक चला गया।

   

हमें उन सभी लोगों की हिम्मत की दाद देनी होगी, जिन्होंने इस भ्रष्टाचार के ताकतवर गठजोड़ की समय-समय पर हर स्तर पर निरंतर शिकायत बिना डरे व हार माने करने का कार्य किया। उन सभी लोगों को इस बेहद लंबी चली जंग का फाइनल अंतिम परिणाम 28 अगस्त 2022 को भ्रष्टाचार के दम बनी इन इमारतों के ध्वस्तीकरण के रूप में अब मिल गया है। हालांकि यह सब होना आसान नहीं था, क्योंकि कदम-कदम पर जबरदस्त ढंग से भ्रष्टाचार से परिपूर्ण सिस्टम वाली हमारे देश की व्यवस्था में इतनी आसानी से कुछ भी सही कार्य करवाना संभव नहीं है, इसके लिए कुछ लोगों ने निरंतर सिस्टम में बैठे ताकतवर लोगों के विभिन्न झूठ-प्रपंच, छल-कपट षड्यंत्रों को नंगा करके मात देते हुए, वर्ष 2012 में उच्च न्यायालय से लेकर के सर्वोच्च न्यायालय तक वर्षों की लंबी लड़ाई लड़़ने का कार्य बिना अपना दीन-ईमान बेचे पूर्ण ईमानदारी से करने का काम किया था, तब ही इस जंग में एक बेहद ताकतवर बिल्डर के पेरोल पर नौकरों की तरह बनकर रहने वाले ताकतवर अधिकारियों व राजनेताओं के भ्रष्ट गठजोड़ के खिलाफ आम आदमी की जीत हुई है। ट्विन टॉवर के इस मसले में कुछ लोगों ने भ्रष्टाचारियों के बेहद ताकतवर गैंग के खिलाफ बेहद ईमानदारी से लंबी लड़ाई लड़ते हुए बिल्डर की मनमानी के खिलाफ एक बेहद बुलंद आवाज उठाकर भ्रष्ट तंत्र को घुटनों पर ला देने का कार्य संपन्न किया है। अब भविष्य में ट्विन टॉवर के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिया गया निर्णय समय-समय पर एक बेहद अहम नज़ीर बनने का कार्य करेगा।

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आपको बता दें कि सुपरटेक बिल्डर को एमराल्ड कोर्ट के लिए इस जमीन का आवंटन 23 नवंबर 2004 को हुआ था, जिसका मानचित्र वर्ष 2006 में पास हुआ था, जिसके बाद से इस प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचारियों के गठजोड़ के दम पर तरह-तरह के तिकड़मबाजी के खेल शुरू हो गये थे और धीरे-धीरे एक बड़े विवाद ने जन्म ले लिया। जिसके बाद वर्ष 2012 में यू.बी.एस. तेवतिया, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, एमराल्ड कोर्ट और अन्य लोगों ने उच्च न्यायालय की शरण में जाने का कार्य किया था। इन सभी याचिकाकर्ताओं की उच्च न्यायालय से लेकर के सर्वोच्च न्यायालय तक दस वर्ष की लंबी कानूनी जंग चली थी। जिसके बाद इमारत के ध्वस्त होने के दिन 28 अगस्त 2022 को इन सभी लोगों को धरातल पर असली जीत मिलती है। लेकिन आज आम जनमानस के मन में एक सवाल कौंध रहा है कि भ्रष्टाचार की प्रतीक इन इमारतों को बनने देने के दोषियों को आखिरकार सजा कब मिलेगी, क्योंकि नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर की मिलीभगत के चलते ही वहां पर नियम कायदे कानून को पूरी तरह से ताक पर रखकर ट्विन टॉवर्स का निर्माण होने का कार्य तेजी से चल रहा था।

हालांकि इस मसले पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आ जाने के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच शुरू करवाने के लिए अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त के नेतृत्व में 4 सदस्यों की एक जांच समिति का गठन कर दिया था। सूत्रों के अनुसार इस समिति की जांच रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण के 26 अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ सुपरटेक लिमिटेड के 4 निदेशक और उनके 2 आर्किटेक्ट को भी भ्रष्टाचार के दम ट्विन टॉवर के निर्माण के लिए जिम्मेदार माना गया है, जिसमें कई सीनियर आईएएस अधिकारी से लेकर के प्राधिकरण के सीनियर अधिकारी संलिप्त हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सिवाय औपचारिकता निभाने के धरातल इन लोगों के खिलाफ आज तक कोई ठोस प्रभावी कार्यवाही ना जाने क्यों नहीं हो पाई है। भ्रष्टाचार की बेहद मजबूत नींव पर बने ट्विन टॉवर के ध्वस्त हो जाने के बाद अब एकबार फिर लोगों को उम्मीद जगी है कि इस मामले के लिए जिम्मेदार सभी लोगों पर नज़ीर बनने वाली कार्यवाही अवश्य होगी। वरना लोग डंके की चोट पर कहेंगे कि-

अंधेर नगरी चौपट राजा,

टका सेर भाजी टका सेर खाजा।

-दीपक कुमार त्यागी

(वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व राजनीतिक विश्लेषक)

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